'आओ बहन चुगली करें':क्या चुगली करने के भी फायदे होते हैं? ये 4 कारण बनते हैं चुगली की वजह

4 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

चुगली हमारी रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा है, लेकिन हमारे समाज में इसे अच्छा नहीं माना जाता। पर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि चुगली समाज में बेशक अच्छी आदत नहीं मानी जाती, लेकिन साइकोलॉजिकली इसका प्रभाव हमारे दिमाग और शरीर पर पड़ता है। जब भी कोई व्यक्ति किसी की बात से नाराज होता है, लो फील करता है, चिंता में होता है या दुखी होता है तब चुगली करता है। इसे निगेटिव डिफेंसिव बिहेवियर कहा जाता है।

चुगली को नेगेटिव डिफेंसिव बिहेवियर कहा जाता है।
चुगली को नेगेटिव डिफेंसिव बिहेवियर कहा जाता है।

डॉ. प्रज्ञा का मानना है कि समाज में हम देखते हैं कि अपनी परेशानी को चुगली के जरिए बाहर निकालकर खुद को खुश करने का सबसे आसान तरीका माना जाता है। इसे लर्निंग बिहेवियर कहा जाता है, जिसे हम बचपन से अपने आसपास से सीखते आते हैं। जब व्यक्ति अपने गुस्से और इमोशन को कंट्रोल नहीं कर पाता तब चुगली करता है। चुगली करना बुरी आदतों में शामिल है, लेकिन फिर भी इसे सभी करते हैं। अब सवाल उठता है कि लोग चुगली क्यों करते हैं और इससे उन्हें क्या फायदा मिलता, उसके बारे में बता रही हैं डॉ. प्रज्ञा मलिक-

खुद को बड़ा बनाने के लिए चुगली
हमेशा चुगली में देखा गया है कि थीम सामने वाले के बिहेवियर या पहनावे पर होती है। जैसे-देखो उसने कैसे कपड़े पहने हैं, देखो वो क्या कर रहा है, कैसे चल रहा है, पड़ोसी ने क्या कर लिया है? ये सभी बातें बताती हैं कि व्यक्ति जो चुगली कर रहा है वह खुद भी वैसा ही करना चाहता है लेकिन सामने वाले के बिहेवियर को स्वीकार नहीं कर पा रहा है और अपनी हीन भावना की वजह से सामने वाले के बिहेवियर को निगेटिव सेंस में प्रेजेंट करता है ताकि वह खुद को बड़ा बना सके। खुद को गर्व महसूस कराने के लिए हम ऐसा करते हैं।
दूसरों से स्वीकृति की जरूरत
हम सभी सामाजिक प्राणी हैं। इस वजह से हमें हमेशा किसी दूसरे की स्वीकृति की जरूरत होती है।अपनी बात को चुगली के जरिए दूसरों की स्वीकृति से खुद को सही ठहराने की कोशिश करते हैं। जैसे-कई बार हमने सुना होगा कि जब कोई व्यक्ति हमसे किसी दूसरे की चुगली करता है तो ‘मैं सही बोल रहा हूं न’ जैसे शब्द बोलता है। इससे जाहिर होता है कि वह व्यक्ति अपनी बात किसी दूसरे के मुंह से अप्रूव्ड कराना चाहता है।
रिलेक्स महसूस होता है
अमूमन देखा गया है कि कोई व्यक्ति किसी से नाराज होता है, तो तुरंत किसी दूसरे से उसकी चुगली करता है। इससे व्यक्ति को यह महसूस होता है कि कोई हमें समझ रहा है। कोई हमारी सुन रहा है, जिससे उसे रिलेक्स फील होता है।

चुगली करने के बाद लोग रिलेक्स फील करते हैं।
चुगली करने के बाद लोग रिलेक्स फील करते हैं।

एंग्जायटी का शिकार लोग करते हैं चुगली
डॉ. प्रज्ञा के मुताबिक, जिन लोगों में एंग्जायटी ज्यादा होती है वे चुगली की आदत को चुनते हैं। जब हम अच्छा महसूस नहीं करते या लो फील करते हैं, तो दूसरों को अपनी बात बताना चाहते हैं। अपनी कमियों को न देखते हुए सामने वाले की कमियां किसी को गिनाते हैं, जिससे खुद का मन शांत होता है।
क्या है सलूशन?
डॉ. प्रज्ञा का कहना है कि चुगली करना कुछ समय के लिए फायदे का सौदा हो सकता है लेकिन लंबे समय तक अगर आप इस आदत को साथ लेकर चलते हैं, तो यह आपको निगेटिव इंसान बना देती है। इसलिए जरूरी है कि कोई भी बात किसी के बारे में कहने से पहले उस बात को जांच-परख लें। खुद के लिए मी टाइम निकालें, ताकि आप खुद को अच्छा महसूस करा पाएं। अपनी परेशानियों को पेपर पर लिखें। ब्रीदिंग एक्सरसाइज से मन को शांत करें। ये वे कुछ तरीके हो सकते हों, जो चुगली की जगह हेल्दी विकल्प बन सकते हैं।