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बच्चों के लिए वैक्सीन:वैक्सीनेशन के बाद मायोकार्डिटिस की चपेट में आ रहे बच्चे, जानें भारत में इस बीमारी से बचने की क्या हैं तैयारियां?

नई दिल्ली6 दिन पहलेलेखक: दीप्ति मिश्रा
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अमेरिका समेत दुनिया भर के कई देशों में बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही है। भारत भी महामारी की तीसरी लहर की आशंका के बीच बच्चों के लिए टीकाकरण शुरू करने की तैयारी में लगा है। कोविड पर विषय विशेषज्ञ समिति (SEC) ने बच्चों के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को सुरक्षित बताते हुए इसे मंजूरी देने की सिफारिश की है।

उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही कोवैक्सीन 2 से 18 साल तक के बच्चों को लगाई जाएगी। हालांकि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की ओर से अंतिम मंजूरी मिलना अभी बाकी है। इस बीच कई देशों में वैक्सीनेशन के बाद बच्चों में 'मायोकार्डिटिस' के लक्षण नजर आ रहे हैं।

आइए जानते हैं कि किन देशों में लग रही है बच्चों को कोरोना वैक्सीन और क्या है मायोकार्डिटिस बीमारी...

अमेरिका, ब्रिटेन, हांगकांग और नॉर्वे समेत कई देशों में बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगाने का दौर जारी है। इस बीच हांगकांग, ब्रिटेन, नॉर्वे समेत कई देशों ने 12 वर्ष और इससे अधिक उम्र के बच्चों को फाइजर बायोएनटेक की एक डोज देने का फैसला किया है। डेनमार्क और स्वीडन ने भी बीते हफ्ते बच्चों को मॉडर्ना की एक डोज देने का निर्णय किया।

विशेषज्ञों ने यह फैसला वैक्सीन की दो डोज लगने के बाद बच्चों में मायोकार्डिटिस के लक्षण नजर आने के चलते लिया है। बच्चों में हृदय की मांसपेशियों में सूजन जैसी समस्या सामने आई है। डॉक्टरों का मानना है कि ऐसा एमआरएनए वैक्सीन के दो डोज लगाने के बाद होता है।

अमेरिका में बदलनी पड़ी वैक्सीनेशन की रणनीति
अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के जून के आंकड़ों के मुताबिक कोविड टीका लगवाने वाले प्रति 10 लाख बच्चों में से 70 बच्चे मायोकार्डिटिस की चपेट में आए। इसके चलते वैक्सीन की दोनों डोज के साइड इफेक्ट के बारे में गंभीरता से फैसला करना पड़ा। सरकार को वैक्सीनेशन की रणनीति में बदलाव करना पड़ा।लिहाजा अब यहां कई अभिभावक अपने बच्चों को वैक्सीन लगवाने से डर रहे हैं।

इजराइल में अब तक 54 केस,​​​​​​ एक की मौत
न्यू इंग्लैंड जर्नल के अनुसार इजराइल में प्रति एक लाख बच्चों में से 11 में मायोकार्डिटिस के लक्षण सामने आए हैं। यहां अब तक मायोकार्डिटिस के 54 केस मिले हैं। एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है। इजराइल में 16 साल से अधिक उम्र के बच्चे इस बीमारी की चपेट में आए हैं। एक स्टडी के मुताबिक एक डोज लेने वालों की तुलना में दो डोज लेने वाले 16 से 19 साल के बच्चों में मायोकार्डिटिस के नौ गुना ज्यादा मामले मिले हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

क्या है मायोकार्डिटिस?
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक मायोकार्डिटिस में हृदय की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है, जो किसी संक्रमण या फिर दवाई के साइड इफेक्ट के कारण होती है। मायोकार्डिटिस के मरीजों में सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, पल्स रेट का बढ़ना और ​धड़कनों का अचानक तेज होना आदि लक्षण नजर आते हैं।

लड़कों के मामले ज्यादा
यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग के डॉ. वैलिड गैलार्ड के मुताबिक वैक्सीन के दोनों डोज लगने के बाद मायोकार्डिटिस के मामले लड़कों में ज्यादा सामने आए हैं। इसका मतलब है कि लड़कियों के लिए ज्यादा चिंता की बात नहीं है। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के डॉ. जेरेमी ब्राउन के अनुसार ऐसा माना जा रहा है कि मायोकार्डिटिस के कारण बच्चों के दिल पर बुरा प्रभाव पड़ता है। हालांकि इस पर ​अभी रिसर्च चल रहा है।

भारत में मायोकार्डिटिस के डेटा को मॉनिटर कर रहीं स्वास्थ्य एजेंसियां
कोरोना वैक्सीन लगने के बाद बच्चों के मायोकार्डिटिस की चपेट में आने की रिपोर्ट को भारत की स्वास्थ्य एजेंसियां मॉनिटर कर रही हैं। नोएडा स्थित मेट्रो हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीर गुप्ता कहते हैं कि तीसरी लहर की आशंका के बीच बच्चों का वैक्सीनेशन किया जाना बेहद जरूरी है। जिन देशों में टीकाकरण के बाद बच्चे मायोकार्डिटिस की चपेट में आए हैं, उनका आंकड़ा देखें तो बेहद मामूली है।

बरतें ये सावधानियां
डॉ. समीर गुप्ता कहते हैं कि मायोकार्डिटिस को लेकर बहुत ज्यादा सोचने और डरने की जरूरत नहीं है। खाने-पीने का विशेष ख्याल रखें। खूब पानी पिएं। वैक्सीन लगने के बाद अगर बच्चों को सीने में दर्द और सांस फूलने जैसी समस्या हो रही है तो अस्पताल जाकर जांच कराएं।