नॉर्मल के बजाय जब हो सिजेरियन डिलीवरी:डाइट और हाइजीन का रखेंगी ख्याल तो जल्दी भरेंगे बेबी बर्थ के टांके और इमोशनल हेल्थ रहेगी सही

19 दिन पहलेलेखक: मीना
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सिजेरियन डिलीवरी में प्रेग्नेंट महिला के पेट के निचले हिस्से और यूटरस पर कट लगाकर बच्चे को निकाला जाता है। दिल्ली स्थित बत्रा हॉस्पिटल में गायनाकोलॉजिस्ट विभाग की प्रमुख डॉ. शैली बत्रा का कहना है कि यह डिलीवरी नेचुरल नहीं होती, बल्कि इमरजेंसी की हालत में इस तरह की डिलीवरी का फैसला लिया जाता है। इसे सी-सेक्शन डिलीवरी भी कहा जाता है। इमरजेंसी और इलेक्टिव दो तरह से सिजेरियन डिलीवरी की जाती है। चूंकि इस पूरी प्रक्रिया में महिला को पेट और यूटरस पर टांके लगते हैं, इसलिए उन्हें अपना विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

इमरजेंसी और इलेक्टिव दो तरह की सिजेरियन डिलीवरी की जाती है। इन दोनों की जरूरत अलग-अलग कारणों से पड़ती है।
इमरजेंसी और इलेक्टिव दो तरह की सिजेरियन डिलीवरी की जाती है। इन दोनों की जरूरत अलग-अलग कारणों से पड़ती है।

सिजेरियन डिलीवरी की जरूरत क्यों?
डॉ. शैली बत्रा का कहना है कि सिजेरियन डिलीवरी दो तरह की होती है। इमरजेंसी और इलेक्टिव सीजेरियन डिलीवरी दोनों की अलग-अलग कारणों से जरूरत होती है।
इमरजेंसी सिजेरियन - अगर बच्चे में कोई रिस्क हो, बच्चे की धड़कन कमजोर हो रही है या बहुत तेज हो रही है, बच्चे ने यूटरस के अंदर पॉर्टी कर दी, बच्चा टेढ़ा हो गया, बच्चे का सिर नीचे है, लेकिन बच्चा नीचे नहीं आ रहा है, नीचे का रास्ता भी नहीं खुल रहा है। लेबर पेन में दो चीजें देखी जाती हैं पहला, बच्चा नीचे आए और दूसरा, नीचे का रास्ता खुलता जाए, इन दोनों में से कोई भी चीज ठीक से नहीं होती है तो इमरजेंसी सिजेरियन किया जा सकता है। अगर लेबर पेन के दौरान मां का ब्लड प्रेशर बढ़ जाए, ब्लीडिंग बढ़ जाए या मां लेबर पेन सह नहीं पा रही है तब भी इमरेंजसी सिजेरियन करना पड़ता है।
इलेक्टिव सिजेरियन- कुछ केस ऐसे होते हैं जहां डॉक्टर्स प्लान करके सिजेरियन करते हैं उसे इलेक्टिव सिजेरियन कहते हैं। इसकी जरूरत तब पड़ती है जब महिला को लेबर पेन के दौरान उसकी जान को खतरा है जैसे-मां को एपलेप्सी या गंभीर हार्ट डिजीज है। अगर मां का नीचे का रास्ता बहुत टाइट है और वह डिलीवरी कर ही नहीं सकती है, नीचे की हड्डियां बहुत कसी हुई हैं, नीचे के रास्ते कोई ऑपरेशन हो चुका है और बच्चे की पोजीशन ठीक नहीं है, तब भी इलेक्टिव सिजेरियन किया जाता है।

सिजेरियन डिलीवरी से आई दिक्कतों को जल्दी ठीक करने के लिए हाई प्रोटीन डाइट लें।
सिजेरियन डिलीवरी से आई दिक्कतों को जल्दी ठीक करने के लिए हाई प्रोटीन डाइट लें।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद किन बातों का रखें विशेष ख्याल?

  • उत्तर प्रदेश में आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. गुंजन भटनागर का कहना है कि सिजेरियन डिलीवरी वाली महिला का शरीर करीब 40 दिन में सही हो पाता है। इस दौरान परिवार को चाहिए कि महिला का पूरी तरह ख्याल रखा जाए, क्योंकि शिशु के जन्म के बाद मां का शरीर शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से प्रभावित होता है।
  • कई महिलाएं सिजेरियन के बाद डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं, इसलिए परिवार को इस दौरान उनकी इमोशनल हेल्थ पर भी ध्यान देना चाहिए।
  • पेट पर टांके होने के कारण सिजेरियन के बाद मां को उठने बैठने में समय लगता है, लेकिन एक घंटे के अंदर बच्चे को दूध पिलाना जरूरी है। ज्यादा समय लेटे रहने से दिक्कतें बढ़ जाती हैं, इसलिए जरूरी है कि मरीज जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी चलना-फिरना शुरू कर दे।
  • एक्टिव रहने से गैस बनने की समस्या नहीं होती। मरीज की जितनी अच्छी डाइट होगी उतने अच्छे से वह ब्रेस्टफीड करा पाएगी, इसलिए जरूरी है कि उसे हाई प्रोटीन डाइट जैसे- दाल, सोयाबीन, पनीर और चिकन आदि दिया जाए।
  • डॉक्टर गुंजन कहती हैं कि सिजेरियन के पेशेंट को ऑपरेशन के दौरान यूरीन बैग की भी जरूरत होती है जिसके कारण उन्हें यूटीआई होने की ज्यादा आशंका रहती है। इसलिए जरूरी है कि नई माताओं का हाइजीन मेंटेन किया जाए।
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