क्या है फाइब्रॉयड:इसे मामूली समझकर न करें अनदेखा, फाइब्रॉयड की वजह से सेक्स लाइफ पर पड़ता है असर

2 महीने पहले
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फाइब्रॉयड...इसे एक प्रकार की रसौली भी कहा जा सकता है, जो एक हंसती-खेलती महिला की जिंदगी में तांडव मचाकर रख सकती है। आखिर फाइब्रॉयड की क्या वजह है? ये कैसे पनपते हैं और इनका इलाज क्या है? आपके जेहन में कई सवाल हो सकते हैं। बता दें, फाइब्रॉयड एक सामान्य घटना है। अधिकतर महिलाओं को 35 से 50 की उम्र में इसकी प्रॉब्लम होने लगती है। अक्सर, इसके लिए एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन को जिम्मेदार ठहराया जाता है। ये ऐसे ट्यूमर (गांठें) होते हैं, जो कभी बेहद तकलीफ़देह मगर नॉन-कैंसरस होते हैं। वेबएमडी के अनुसार इनके साइज, शेप और इनकी लोकेशन हमेशा एक जैसी हो ये जरूरी नहीं। ये यूट्रस के अंदर भी हो सकते हैं और इसके बाहर भी चिपके हो सकते हैं। जयपुर के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में वरिष्ठ गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. सीपी दधीच बता रहे हैं फाइब्रॉयड क्या है, ये क्यों होता है और इसके संकेत कौन से हैं।

क्या है फाइब्रॉयड?
महिलाओं के यूट्रस (गर्भाशय) में होने वाली गांठ को फाइब्रॉयड कहते हैं। इसका साइज मूंग जितना छोटा भी हो सकता है और खरबूजे जितना बड़ा भी। इसके लक्षणों की पहचान कर ट्रीटमेंट लिया जाए तो इस प्रॉब्लम को कंट्रोल किया जा सकता है।
फाइब्रॉयड की वजह
फाइब्रॉयड के क्या कारण होते हैं? ये सवाल तब आपके मन में आता है, जब आप इसकी वजह से पैदा होने वाली समस्याओं का सामना करती हैं। बढ़ती उम्र, फैमिली हिस्ट्री, एल्कोहल का सेवन, विटामिन डी की कमी, लाइफ में बड़े तनाव, हॉर्मोनल बदलाव या जेनेटिक कारणों के चलते कई महिलाओं को फाइब्रॉयड की समस्या होने लगती है।

फाइब्रॉयड के संकेत

  • पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग
  • पीरियड्स में तेज पेट दर्द
  • लंबे समय तक पीरियड्स चलना
  • पेल्विक एरिया में दर्द
  • बार-बार यूरिन की समस्या
  • पेट फूलना
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द रहना
  • एनीमिया की प्रॉब्लम
  • ज्यादा समय तक कब्ज रहना

कई बार हो सकता है कि महिलाओं को यूट्रस में गांठ बनने के कोई लक्षण दिखाई न दें।

इससे महिलाओं की सेहत को क्या नुकसान?
आमतौर पर इससे महिलाओं की सेहत को ज्यादा नुकसान नहीं होता, लेकिन इसकी वजह से प्रेग्नेंसी में काफी परेशानी हो सकती हैं। साल 2010 की एक रिसर्च की मानें तो 10 से 30 फीसद महिलाओं को यूट्रस में फाइब्रॉयड के चलते प्रेग्नेंसी में काफी मुश्किलें आती हैं। प्रीमेच्योर डिलीवरी, मिसकैरेज, शिशु की पोजिशन में गड़बड़ी, जिससे नॉर्मल डिलीवरी संभव नहीं हो पाती और सर्जरी के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग की दिक्कत हो सकती हैं। वहीं, कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान फाइब्रॉयड सिकुड़ जाते हैं। एक स्‍टडी के मुताबिक 79 फीसद महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान इसका साइज कम हुआ था।

फाइब्रॉयड से सेक्स लाइफ पर पड़ता है असर
फाइब्रॉयड होने पर इंटरकोर्स के समय महिलाओं को हर बार दर्द से गुजरना पड़ता है। कई मामलों में इसके होने पर इंटरकोर्स के समय ब्लीडिंग तक होती है। ऐसे में सेक्स लाइफ प्रभावित हो सकती है। हालांकि, कुछ तरह की फाइब्रॉयड में दर्द नहीं होता।

उपचार के लिए क्या तरीके अपनाएं?
इस बीमारी का इलाज संभव है और इसके बाद भी महिलाएं हेल्दी और नॉर्मल रूटीन अपना सकती हैं। इन गांठों की पहचान अल्ट्रासाउंड, एमआरआई और सीटीस्कैन के जरिये होती है। इसके साइज और स्थिति को देखकर इलाज किया जाता है। अगर आपको हैवी ब्लीडिंग या दर्द की प्रॉब्लम न हो तो सर्जरी की जरुरत नहीं पड़ती, लेकिन जब फाइब्रॉयड की वजह से समस्याएं गंभीर रूप लेने लगें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसके लिए दवाएं दी जाती हैं और कभी-कभी सर्जरी की भी सलाह देते हैं। सर्जरी के बाद छह सप्ताह तक इंटरकोर्स से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

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