योग के फायदे:रिप्रोडक्टिव सिस्टम और हार्मोनल हेल्थ को बूस्ट करने के लिए घर पर करें ये दो योगासन, परेशानियां होंगी दूर

10 दिन पहलेलेखक: मीना
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यों तो योग पुरुष हो या स्त्री सभी के लिए फायदेमंद है, लेकिन चूंकि महिलाओं को प्रेगनेंसी, मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम्स, फर्टिलिटी इशुज और मेनोपॉज जैसी समस्याओं से भी गुजरना पड़ता है। ऐसे में उनके लिए योग अधिक लाभदायक है। योग रिप्रोडक्टिव सिस्टम को ठीक रखने में काफी मदद करता है। इससे शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की समस्याएं दूर होती हैं। यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है जिससे प्रेगनेंसी भी हेल्दी होती है। योग की वजह से प्रजनन अंगों में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है जिसकी वजह से प्रजनन क्षमता बढ़ती और हार्मोनल हेल्थ भी बेहतर होती है। योग महिलाओं को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत भी करता है। इनोसेंस योगा की योग एक्सपर्ट भोली परिहार बता रही हैं वे योगासन जो रिप्रोडक्टिव सिस्टम के लिए फायदेमंद होते हैं।

रिप्रोडक्टिव और हार्मोनल हेल्थ के लिए योग के फायदे
योग एक्सपर्ट भोली परिहार का कहना है कि योग से हमारी लोअर बॉडी जिसमें हमारे लेग्स, हिप्स और बैक आती है, यह वह एरिया है जहां हमारा रिप्रोडक्टिव सिस्टम होता है। अगर हम कुछ आसनों का अभ्यास करते हैं तो उससे हम अपने पैरों को फ्लैक्सिबल बना सकते हैं। कमर को मजबूती दे सकते हैं। साथ ही जहां हमारा रिप्रोडक्टिव सिस्टम होता है उसके आसपास की सभी मांसपेशियों को मजबूत कर सकते हैं। जिन महिलाओं को इंफर्टिलिटी की समस्या होती है, उसमें भी कुछ योग आसन बहुत लाभकारी हैं।

योग पीरियड्स में होने वाले क्रैंप्स व पीसीओडी के मैनेजमेंट में भी मददगार है। यह हमारे रिप्रोडक्टिव सिस्टम के काम करने की क्षमता को बढ़ाता है। योग आसन रिप्रोडक्टिव सिस्टम को डिटॉक्सीफाई करते हैं। अगर हमारा रिप्रोडक्टिव सिस्टम ठीक नहीं है तो इससे हमारी मेंटल, सोशल और फिजिकल लाइफ इफैक्ट होती है। योग से इन सभी समस्याओं से निपट सकते हैं। यह स्ट्रेस और एंग्जाइटी को भी कम करते हैं। भोली परिहार का कहना है कि जितने भी आसन जिनमें हम अपने पैर को खोलते हैं, वे सभी रिप्रोडक्टिव सिस्टम को इंप्रूव करने के लिए होते हैं। इनमें कूर्मासन, भूनमन आसन, बद्धकोण, पश्चिमोत्तानासान और उपविष्ट कोण आसन प्रमुख हैं। यहां हम पश्चिमोत्तानासन और उपविष्ट कोण आसन की विधि बता रहे हैं।

पश्चिमोत्तानासन
पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन (Seated wided leg forward fold) करने का तरीका

  • दोनों पैरों को सामने की ओर खोलकर बैठ जाएं व अपने दोनों हाथों को जांघों के बगल में रख लें।
  • अपने दोनों पैरों के बीच में 15-20 इंच की दूरी बना लें। साथ ही साथ अपनी कमर व कंधे को हल्का सा सीधा करें।
  • धीरे से सांस भरते हुए अपने दोनों हाथों को बगल से आसमान की ओर ले जाएं व नमस्कार बना लें।
  • धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपनी बॉडी को अपनी क्षमता अनुसार आगे की ओर झुकाते जाएं।
  • अपने दोनों हाथों को दोनों पैरों के बीच में रख लें व कुछ देर वहीं होल्ड करें।
  • धीरे से सांस भरते हुए हाथों को ऊपर लाते हुए नीचे कर लें व कुछ देर विश्राम करें।
  • इस आसन में 10-15 सेकेंड होल्ड करें।
उपविष्ट कोणासन
उपविष्ट कोणासन

उपविष्ट कोण आसन (wided leg pose) करने का तरीका

  • अपने दोनों पैरों को सामने की ओर खोल दें।
  • अपने दोनों हाथों को जांघों के बगल में रख लें।
  • धीरे से कमर को सीधा रखते हुए अपने दोनों घुटनों को एक-एक करके मोड़ लें।
  • अपने दोनों हाथों का प्रयोग करते हुए अपने हाथ की पहली दो ऊंगली तर्जनी व माध्यमिका से अपने अंगूठे को पकड़ लें। सीधे हाथ से सीधे पैर के अंगूठे को उल्टे हाथ से उल्टे पैर को पकड़ लें।
  • धीरे से अपनी बॉडी को साधते हुए अपने राइट लेग को और फिर लेफ्ट लेग को हवा में उठाएं।
  • दोनों पैरों को धीरे-धीरे खोलते जाएं।
  • 15-20 सेकेंड होल्ड करें व धीरे से वापस आ जाएं।
  • अगर यह आसन आप दोनों पैरों से करने में असमर्थ हैं, तो पहले सीधे पैर से करें फिर कुछ देर उल्टे पैर से कर लें। इसमें आप दीवार का सहारा भी ले सकते हैं।

सावधानियां

  • जो लोग ज्यादा मोटे हैं, वो किसी की देखरेख में करें।
  • जिनको कमर दर्द है वे सावधानीपूर्वक इस आसन को करें।

इन योग आसनों की मदद से आप रिप्रोडक्टिव सिस्टम को बेहतर और सेहतमंद रख सकते हैं।

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