कितनी दवा देना जरूरी:बच्चों की भलाई नहीं कर रही है ज्यादा दवाई, दोस्त बैक्टीरिया को खत्म करके उनको कर रही कमजोर

नई दिल्ली2 महीने पहले
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बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों से लड़ने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। इन एंटीबायोटिक्स से कई बीमारियों से बचा जा सकता है। शिशुओं को निमोनिया, टायफाइड और यूरीन इंफेक्शन जैसी परेशानियों में एंटीबायोटिक्स देना लाइफ सेविंग होता है। उनकी इम्युनिटी भी कमजोर होती है, इसलिए भी उन्हें ये दवाएं दी जाती हैं, लेकिन इसके ओवर यूज से नुकसान भी होते हैं।

डॉक्टर का कहना है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक्स नहीं देने चाहिए।
डॉक्टर का कहना है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक्स नहीं देने चाहिए।

क्या है डॉक्टर की राय?

फोर्टीज हॉस्पीटल, जीके 2 में पीडियाट्रीशन डॉ. राधिका बतरा का कहना, शिशुओं को जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक्स देने से उनके शरीर के गुड बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स खिलाने से सुपरबग पैदा होने की आशंका रहती है जिससे बच्चे के ऊपर बाकी दवाओं का असर बंद हो जाता है। इन दवाओं का इस्तेमाल सावधानी से किया जाना चाहिए। इन्हें केवल तभी इस्तेमाल करें जब डॉक्टर आपको सजेस्ट करें।

दवाओं का असर एंटीबायोटिक्स का इम्युनिटी पर पड़ता है।
दवाओं का असर एंटीबायोटिक्स का इम्युनिटी पर पड़ता है।

क्या कहती है स्टडी?

रटगर्स और मायो क्लीनिक की ओर से 14,572 बच्चों पर किए शोध से मालूम हुआ है कि जिन शिशुओं को शुरुआती 2 सालों में एंटीबायोटिक्स दिए गए उनमें सांस संबंधी, मोटापा और अस्थमा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया। इन दवाओं से इम्युनिटी सिस्टम पर भी नेगेटिव असर पड़ता है।

एंटीबायोटिक्स के जितने फायदे हैं उतने ही नुकसान भी। जरूरत से ज्यादा मात्रा में देने पर शिशुओं को नुकसान भी हो सकता है, इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स न दें।

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