बच्चों को कहीं जहरीली चीजें तो नहीं खिला रहे:हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं फूड सप्लीमेंट्स, फैट बढ़ने के साथ पेट भी खराब हो सकता है

8 महीने पहले
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बच्चों के हेल्दी ग्रोथ के लिए सही डाइट जरूरी है लेकिन पेरेंट्स के लिए कई मुश्किलें होती हैं। बच्चे जिद्दी होते हैं। न तो हरी सब्जियां खाना चाहते हैं और न ही दूध पीना चााहते हैं। दूसरे हेल्दी फूड्स लेने से भी भागते हैं। ऐसे में उन्हें फूड सप्लीमेंट का सहारा लेना पड़ता है, ताकि बच्चों को सभी पोषक तत्व मिल सकें। लेकिन लगातार ये सप्लीमेंट्स देने से बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

बच्चों में बीमारियां कर रहीं घर
दिल्ली में न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. शैली तोमर का कहना है कि लगातार सप्लीमेंट देने से हम बच्चों को बीमारियों का शिकार बना रहे होते हैं। मल्टीविटामिन कैप्सूल्स, प्रोटीन पाउडर या दूध में मिलाए जाने वाले एनर्जी ड्रिंक्स जैसे डायटरी सप्लीमेंट देने से बच्चों में डायबिटीज, स्किन रैशेज और डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

… इसलिए जरूरी हैं सप्लीमेंट्स
दिल्ली में डाइट मंत्रा की डायटिशियन कामिनी कुमारी का कहना है कि हमारे शरीर को कार्ब (अनाज ), फैट ( घी-तेल ), प्रोटीन (दाल, अंडा, मछली ), विटामिन (सीड्स, नट्स, बीन्स, मशरूम) और पानी की बराबर मात्रा में जरूरत होती है। लेकिन जब कार्ब या फैट के अलावा शरीर को बाकी चीजें खाने से नहीं मिल पातीं तो डाइट को संतुलित करने के लिए बच्चों को भोजन के साथ-साथ सप्लीमेंट्स की जरूरत पड़ती है।

कई फॉर्म में होते हैं सप्लीमेंट्स
फूड सप्लीमेंट्स खाद्य पदार्थों से ही बने होते हैं। गोली, कैप्सूल, पाउडर, जेल कैप्सूल या लिक्विड के फॉर्म में आते हैं। इनमें विटामिन, मिनरल, फाइबर, एमिनो एसिड्स, जड़ी-बूटी, पौधे और एंजाइम्स हो सकते हैं।

बच्चों को संतुलित डाइट देना मुश्किल : पोल
हाल ही में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन हेल्थ सीएस मोट्ट चिल्ड्रेंस नेशनल के बच्चों की सेहत पर हुए पोल के मुताबिक, आधे से ज्यादा पेरेंट्स मानते हैं कि उनके बच्चों को बैलैंस डाइट देना मुश्किल है। दूसरी तरफ, आधे पेरेंट्स कहते हैं कि वे बच्चों को नियमित तौर पर सप्लीमेंट्स देते हैं। पोल के अनुसार, ज्यादातर पेरेंट्स डायटरी सप्लीमेंट्स की ओर रुख करते हैं।
डायटरी सप्लीमेंट्स का उपयोग शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए किया जाता है।

डॉ. शैली तोमर का कहना है कि डायटरी सप्लीमेंट्स सेहत के लिए जितना फायदेमंद है उतना ही बिना डॉक्टर की सलाह से लिए जाने की वजह से नुकसानदायक भी साबित होते हैं।
डॉ. शैली तोमर का कहना है कि डायटरी सप्लीमेंट्स सेहत के लिए जितना फायदेमंद है उतना ही बिना डॉक्टर की सलाह से लिए जाने की वजह से नुकसानदायक भी साबित होते हैं।

सभी को जरूरी नहीं सप्लीमेंट्स
सभी बच्चों को इन सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं पड़ती। जो बच्चे बैलेंस डाइट ले रहे हैं उनमें प्रोटीन, फल, सब्जियां शामिल रहती हैं, उन्हें सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं होती।
वे बच्चे जो कमजोर हैं ठीक नहीं रहते, पेट खराब रहता है, उन्हें सप्लीमेंट की जरूरत पड़ती है। यहां तक कि वे बच्चे जो शाकाहारी हैं उन्हें विटामिन बी12 सप्लीमेंट की जरूरत होती है।

फॉर्मूला मिल्क भी है सप्लीमेंट
ऐसे बच्चे जो एक महीने के हैं और मां का दूध नहीं पी पा रहे तब उन्हें सप्लीमेंट के तौर पर फॉर्मूला मिल्क दिया जाता है। यह डॉक्टर/न्यूट्रिशनिस्ट की गाइडेंस में ही लेना चाहिए।

सप्लीमेंट दें, लेकिन संभल कर
कुछ नवजातों को जन्म के तुरंत बाद विटामिन डी सप्लीमेंट ड्रॉप्स के रूप में दिया जाता है। बच्चों में विटामिन डी की कमी से रिकेट्स नामक बीमारी हो जाती है। रिकेट्स में हड्डियों में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और फॉस्फोरस नहीं रहता, इसके कारण वो नरम और विकृत हो जाती हैं।

जरूरत पड़ने पर ही दें सप्लीमेंट्स
अगर डॉक्टर की सलाह से काम किया जाए तो यह स्थिति नहीं आएगी। वे बच्चे जो प्रीमेच्योर पैदा होते हैं उन्हें भी कैल्शियम, फॉस्फोरस और आयरन की जरूरत पड़ती है। अगर बच्चे को बिना जरूरत के ही विटामिन ए और विटामिन डी दिया जाता है तो यह बॉडी में जहर की तरह काम करता है। इसकी ज्यादा मात्रा पेट खराब कर सकती है। वहीं, ज्यादा शुगर लेने से मोटापा बढ़ता है। इसलिए जब जरूरत हो तभी बच्चों को सप्लीमेंट्स दें।

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