दीवारों पर सुसाइड नोट चिपका कर मरीं जवान बेटियां-मां:ऑनलाइन कोयला मंगाकर फ्लैट को बनाया गैस चैंबर, सेलोटेप से किया सील , जानें मास सुसाइड की वजह

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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  • साल 2019 में 1 लाख 39 हजार सुसाइड के केस दर्ज किए गए।
  • साल 2018 की तुलना में इसमें 3.4% की बढ़त देखी गई।

कुछ दिन पहले दिल्ली में एक महिला ने दो जवान बेटियों के साथ सुसाइड कर लिया। घर में मिले 10 पेज के सुसाइड नोट के अनुसार तीनों पिछले 3 महीने से सामूहिक आत्महत्या की तैयारी कर रही थीं। लेकिन एक साथ कई मौतें के पीछे किस तरह की भावना काम करती है जानें ।

स्रोत : दुर्खीम्स थ्योरी ऑफ सुसाइड, (दुर्खीम का पूरा नाम इमाइल दुर्खीम है।वह एक फ्रांसीसी समाजशास्त्री थे। आत्महत्या पर इनकी थ्योरी चर्चा में रही है।)
स्रोत : दुर्खीम्स थ्योरी ऑफ सुसाइड, (दुर्खीम का पूरा नाम इमाइल दुर्खीम है।वह एक फ्रांसीसी समाजशास्त्री थे। आत्महत्या पर इनकी थ्योरी चर्चा में रही है।)

साथ में मरने के लिए बनाया स्टेप बाय स्टेप प्लान
एक साल पहले वसंत विहार में 50 साल की मंजू श्रीवास्तव अपने पति उमेश चंद्र श्रीवास्वत और दोनों बेटियों के साथ अच्छी जिंदगी जी रही थी। बेशक, बाहर के लोगों के साथ परिवार का कोई उठना-बैठना नहीं था लेकिन चारों आपस में संतुष्ट थे, तभी कोरोना की वजह से घर के मुखिया उमेश श्रीवास्तव चल बसे। शायद यही हादसा इस सामूहिक आत्महत्या का बुनियाद बन गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पेशे से सीए उमेश अपनी दोनों बेटियों को भी सीए बनाना चाहते थे। पति की मौत से मंजू काे गहरा धक्का लगा। दोनों बेटियां 30 साल की अंकिता और 26 साल की अंशुता को लगने लगा कि अब उनके सारे सपने अधूरे रह जाएंगे। ऐसा पाया गया कि पिता की मौत के बाद यह परिवार और भी कटा-कटा रहने लगा।

पूरी प्लानिंग से लगाया मौत को गले तीनों महिलाओं ने
तीनों महिलाओं ने घर को गैस चैंबर में बदल कर आत्महत्या करने का प्लान बनाया। इसके लिए जरूरी चीजों जैसे अंगीठी, कोयला, एल्यूमीनियम फौइल, सेलोटेप को ऑनलाइन मंगवाया। पूरी प्लानिंग के साथ घर के सभी खिड़की-दरवाजे को सेलोटेप से सील किया। पुलिस का मानना है कि अंगीठी जलाकर घर को गैस चैंबर में बदल दिया गया। कोयले के धुएं की वजह से घर में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनी, जिसके कारण तीनों का दम घुट गया। मौके पर मिले सुसाइड नोट्स से पता चला कि परिवार आर्थिक तंगी झेल रहा था।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, भारत में हर साल करीब 1 लाख लोग सुसाइड करते हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, भारत में हर साल करीब 1 लाख लोग सुसाइड करते हैं।

परिवार ने अपने यहां काम करने वाली हेल्प को कई दिन पहले से छुट्‌टी दे रखी थी। अपने फ्लैट के साथ वाले अपने दूसरे फ्लैट में रह रहे किरायेदारों से उसे 3 महीने पहले ही खाली करवा दिया था ताकि वहां किसी को नुकसान नहीं पहुंचे। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने सेंसेटिव लोगों ने जिंदगी से हार मान कर क्यों मौत को गले लगा लिया?
आर्टेमिस हॉस्पिटल की साइकोलॉजिस्ट डॉ . रचना खन्ना सिंह के अनुसार, “कई बार ऐसे मामलों की वजह आर्थिक तंगी भी होती है। इस मामले में भी यह नजर आता है कि फैमिली का मुख्य कमाने वाला नहीं रहा, इसके बाद परिवार को गुजर-बसर करने में परेशानी आई होगी। इसमें कोई शक नहीं कि महंगाई के दौर में आर्थिक तंगी का जीवन पर बुरा असर पड़ता है।”

अनोमी आत्महत्या में पाया गया कि कई बार व्यक्ति जीवन में आने वाले बदलावों के साथ तालमेल नहीं बिठा पता है और आखिरी सफर पर निकल पड़ता है।
अनोमी आत्महत्या में पाया गया कि कई बार व्यक्ति जीवन में आने वाले बदलावों के साथ तालमेल नहीं बिठा पता है और आखिरी सफर पर निकल पड़ता है।

तो क्या केवल बदहाली ने परिवार की जान ले ली?
आत्महत्या की ढेरों वजहें हैं जैसे कैरियर से जुड़ी समस्याएं, अकेलेपन का अहसास, दुर्व्यवहार, हिंसा, परिवार से जुड़ी दिक्कतें, मानसिक परेशानियां, अल्कोहल की लत, आर्थिक तंगी और दूसरी तकलीफें। दुर्खीम की सुसाइड थ्योरी के अनुसार अनोमिक, फैटालिस्टिक, अल्ट्रूस्टिक और इगोस्टिक 4 तरह के सुसाइड होते हैं। इगोस्टिक सुसाइड की मुख्य वजह अकेलापन है। समाज से अलग-थलग रहने की वजह से और अपनों से दूरी बढ़ने के कारण अकेलापन अधिक हो जाता है। अल्ट्रूस्टिक सुसाइड के केसेज उन लोगों में देखने को मिलता है जहां कोई व्यक्ति वीरता का प्रदर्शन करने के लिए खुद की जान जोखिम में डाल लेता है।

जापान में देखा गया है अल्ट्रूस्टिक सुसाइड
कई बार जापान के लोगों में इस तरह के सुसाइड देखे जाते रहे हैं। इस सुसाइड को हाराकिरी के नाम से जाना जाता है। समाज की एकता और भलाई के लिए लोग खुद को समाप्त कर लेते हैं, उन्हें लगता है कि ऐसा करने से समाज बिखरेगा नहीं, उसकी एकता बरकरार रहेगी। हिंदुस्तान के सती प्रथा और बौद्ध भिक्षुओं में निर्वाण प्राप्त करने की प्रक्रिया को भी इसमें शामिल किया।

फैटालिस्टिक आत्महत्या की आशंका तब बनती है जब व्यक्ति की भावनाओं को कुचला जाता है और उसे अपना वजूद खत्म होता नजर आता है।
फैटालिस्टिक आत्महत्या की आशंका तब बनती है जब व्यक्ति की भावनाओं को कुचला जाता है और उसे अपना वजूद खत्म होता नजर आता है।

कोविड के बाद से बदल गया है सोसायटी का मेलजोल का फॉर्मूला
वसंत विहार के ट्रिपल सुसाइड केस के पहले भी सामूहिक आत्महत्या के कुछ मामले काफी चर्चा में रहे हैं। इसमें साल 2018 में एक ही परिवार के 11 लोगों की सामूहिक आत्महत्या और 2019 में तेलंगना में 20 के करीब बच्चों की सप्ताहभर के अंदर आत्महत्या शामिल है।साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी ऑफ मास सुसाइड्स रिपोर्ट के अनुसार सामूहिक आत्महत्या कई तरह की होती है जैसे मास सुसाइड और क्लस्टर सुसाइड।

डॉ. रचना खन्ना सिन्हा के मुताबिक सुसाइड के ढेरों कारण हो सकते हैं, समाज से अलग-थलग रहना, मेंटल डिप्रेशन की पारिवारिक हिस्ट्री, समाज से दूरी और आर्थिक तंगी सभी इसमें शामिल है। इस केस में भी परिवार पहले भी समाज से कटा-कटा रह रहा था, ऐसे में इस बात की भी आशंका बनती है कि परिवार में डिप्रेशन की हिस्ट्री रही हो। इस तरह के मामलों में मरीज को अपनी स्थिति की गंभीरता का समझकर तुरंत काउंसलर की मदद लेनी चाहिए।