राजू श्रीवास्तव को हार्ट अटैक, हालत में सुधार:महिलाओं का दिल पुरुषों से कमजोर, फिर भी 40 की उम्र तक कम आते हैं अटैक

नई दिल्ली5 महीने पहलेलेखक: ऐश्वर्या शर्मा
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दुनिया का सबसे मुश्किल काम किसी को हंसाना है। जो इस गुर को सीख ले वह लोगों के दिलों में बस जाता है। राजू श्रीवास्तव ऐसे ही कॉमेडियन हैं जिन्होंने लोगों को खूब लोटपोट किया।

‘गजोधर भैया’ के किरदार से मशहूर राजू दिल्ली के एम्स में भर्ती हैं। 10 अगस्त 2022 को जिम में वर्कआउट करने के दौरान उन्हें हार्ट अटैक आया। उनका ब्रेन रिस्पॉन्स नहीं कर रहा है। हालांकि उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है। राजू से पहले भी 40 की उम्र से ऊपर और जिम जाने वाले कई सेलिब्रिटी को हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट की खबरें आ चुकी हैं।

40 पार की उम्र वालीं एक्ट्रेसेज रवीना टंडन, शिल्पा शेट्टी, मलाइका अरोड़ा, करीना कपूर भी रेगुलर जिम जाती हैं, लेकिन इन्हें उस तरह का रिस्क क्यों नहीं रहता? दरअसल महिलाओं को उनके हार्मोंस दिल की बीमारी से लंबे समय तक बचाकर रखते हैं। कैसे, आइए आपको बताते हैं।

महिलाओं के लिए पीरियड्स बन जाते हैं सुरक्षा कवच

महिलाएं मल्टी टास्क करती हैं और पुरुषों से ज्यादा स्ट्रेस भी लेती हैं। वे इमोशनल भी ज्यादा होती हैं, लेकिन स्ट्रेस उनके दिल को कमजोर नहीं कर पाता। यह तब तक होता है जब तक वे मेनोपॉज की स्टेज तक नहीं पहुंचतीं। यानी महिलाओं के पीरियड्स ही उनको सेफ जोन में रखते हैं और हार्ट अटैक से बचाते हैं।

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. सुमन भंडारी के अनुसार जहां पुरुषों में इसका खतरा 35 की उम्र से ही होने लगता है। वहीं महिलाओं में 40 की उम्र के बाद यह रिस्क देखने को मिलता है।

गुरुग्राम के पारस हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित भूषण शर्मा ने वुमन भास्कर को बताया कि जब तक पीरियड्स होते हैं, महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन नाम के 2 हार्मोन्स का लेवल ठीक रहता है। जब मेनोपॉज होता है तो इनका लेवल कम हो जाता है, जिससे उन्हें दिल की बीमारियां घेरना शुरू कर देती हैं।

एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन बनाते हैं महिलाओं को संपूर्ण

कहते हैं महिला को तब पूरा माना जाता है जब वह मां बनती है। इसके लिए पीरियड्स होना जरूरी है, क्योंकि इसके बाद ही हर महीने महिला में एग बनते हैं।

हालांकि पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही है। दरअसल, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन ही महिला के शरीर को संपूर्ण बनाते हैं। एस्ट्रोजन पीरियड्स में तो प्रोजेस्ट्रॉन प्रेग्नेंसी में मदद करता है। जब शरीर में इन दोनों का लेवल कम हो जाए तो महिला में इन्फर्टिलिटी, मिसकैरेज और मेनोपॉज के मामले बढ़ जाते हैं।

एस्ट्रोजन रक्त वाहिकाओं को चिकना बनाता है जिससे खून का प्रवाह ठीक रहता है। साथ ही खून के मुक्त कणों को सोखता है ताकि दिल की धमनियों को नुकसान न पहुंचे।

छोटा होता है महिलाओं का दिल, खतरा भी ज्यादा

क्या आप जानते हैं, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के दिल का आकार छोटा होता है। उनकी धमनियां भी पतली होती हैं। दिल को चार चैंबर में बांटने वाली दीवारें भी पतली होती हैं। इस कारण महिलाओं को दिल की बीमारियों का खतरा भी पुरुषों से ज्यादा होता है। फिर भी उनमें हार्ट अटैक के मामले ज्यादा क्यों नहीं दिखते?

इसका जवाब मिलता है नीदरलैंड्स हार्ट जर्नल की एक रिपोर्ट से। रिपोर्ट कहती है कि महिलाओं में हृदय रोगों की जांच और इलाज के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जाते। खुद महिलाएं भी इसके लिए जागरूक नहीं हैं। इससे समय पर उनमें बीमारियां पकड़ में नहीं आ पातीं।

कोरोनरी एंजियोग्राम जैसे टेस्ट में भी महिलाओं के दिल की धमनियों का आसानी से पता नहीं चल पाता। ऐसे में महिलाओं में हार्ट अटैक के मामले कम देखने को मिलते हैं।

महिला-पुरुष के दिलों पर स्ट्रेस का रिएक्शन अलग-अलग

बनावट में अंतर के चलते महिलाओं का दिल पुरुषों के दिल से ज्यादा तेज पंपिंग करता है, लेकिन हर बार 10 फीसदी कम ब्लड बाहर निकलता है। जब महिलाएं स्ट्रेस में होती हैं तो उनकी हार्ट बीट बढ़ जाती है और दिल ज्यादा मात्रा में खून पंप करने लगता है, लेकिन जब पुरुष तनाव में होते हैं, तब उनके दिल की धमनियां सिकुड़ जाती हैं और ब्लड प्रेशर तेज हो जाता है जिससे पुरुषों में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

आगे आपको बताते हैं कि महिलाओं को कम उम्र में किन स्थितियों में आ सकता है हार्ट अटैक।

एंडोमेट्रियोसिस में महिलाएं कम उम्र में हो सकती हैं बीमार

अमेरिका के ब्रिघम हेल्थ हॉस्पिटल ने 2016 में एक स्टडी की। इसके अनुसार जिन महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस की समस्या है, उनमें 40 साल की उम्र से पहले ही हार्ट अटैक की आशंका देखी गई। एंडोमेट्रियोसिस गर्भाशय में होने वाली बीमारी है। जब भी पीरियड्स होते हैं तो महिलाओं को बहुत दर्द से गुजरना पड़ता है।

नोएडा सेक्टर-110 के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में गायनेकोलॉजिस्ट मीरा पाठक के अनुसार एंडोमेट्रियोसिस में टिश्यू के बढ़ने से ओवूलेशन में दिक्कत आने लगती है।

यह इन्फर्टिलिटी का कारण बनती है। इसके दर्द से बचने के लिए महिलाओं में मेडिकल मेनोपॉज किया जाता है। यानी दवा से पीरियड्स को बंद किया जाता है ताकि शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल कम हो। जैसे ही एस्ट्रोजन का लेवल कम होगा, महिला को दिल की बीमारी घेर सकती है।

पीसीओडी और स्मोकिंग भी बनती है वजह

कार्डियोलॉजिस्ट मानते हैं कि जिन महिलाओं को पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) या पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) होता है, उनको भी कम उम्र में हार्ट अटैक की आशंका होती है। जो लड़कियां स्मोकिंग करती हैं या पहले से ही डायबिटीज की शिकार होती हैं, उनमें भी ऐसा होता है।

प्रेग्नेंसी में कुछ महिलाओं को होता है हाइपरटेंशन

गर्भावस्था की अंतिम तिमाही या डिलीवरी के बाद कुछ महिलाएं प्री-एक्लेमप्सिया की शिकार हो जाती हैं। यह एक गंभीर विकार है। इसमें प्रेग्नेंट महिला को हाई ब्लड प्रेशर रहता है। यह बीमारी गर्भावस्था के 20वें हफ्ते से शुरू हो सकती है। 34वें हफ्ते में ज्यादा खतरनाक हो जाती है।

इस वजह से प्लेसेंटा से खून का प्रवाह कम हो जाता है जिससे बच्चे तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान यह दिक्कत रहे तो उन्हें पूरी जिंदगी दिल की बीमारी बनी रहती है।

वहीं, अगर महिला को पहले से ही क्रोनिक हार्ट डिजीज हो तो हार्ट अटैक आ सकता है।

दिल में 15-20% होता है ब्लॉकेज

दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के कार्डियोलॉजी विभाग के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. अतुल माथुर ने बताया कि जब भी दिल में कोई ब्लॉकेज हो या इन्फेक्शन हो तो दिल का दौरा आ सकता है। कई लोगों के दिल में पहले ही थोड़ी ब्लॉकेज होती है जो उन्हें नहीं पता होता। यह 15-20% होती है। ऐसे में उन्हें जल्दी थकावट या एंग्जाइटी हो तो दिल में खून जम सकता है। कई बार कार्डियक अरेस्ट भी आ सकता है।

दिल का दौरा पड़ने से ब्रेन डेड होने का रिस्क

दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर अंशु रोहतगी ने बताया कि दिल का दौरा 5 मिनट या उससे ज्यादा रहे तो ब्रेन को ऑक्सीजन मिलनी बंद हो जाती है। जिससे ब्रेन का कुछ हिस्सा डैमेज हो जाता है। ब्रेन में सूजन आ जाती है। ब्रेन डेड भी हो सकता है। इस स्थिति में इंसान ठीक नहीं हो पाता। उन्हें आर्टिफिशियल लाइफ सपोर्ट पर रखा जाता है।

जिम में जी तोड़ मेहनत करते हैं पुरुष

पुरुष मसल्स और एब्स बनाने के चक्कर में लिमिट से ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं। जबकि महिलाएं आमतौर पर कार्डियो, योग और एरोबिक पर ज्यादा ध्यान देती हैं।

डॉ. सुमन भंडारी बताते हैं कि कई बार लोग जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं। जिससे शरीर में पैदा होने वाला एंडोर्फिन हार्मोन फील गुड करवाता है। उन्हें इसकी लत लग जाती है, लेकिन हार्ट एक्सरसाइज का इतना प्रेशर सहन करने लायक नहीं होता है। ऐसी स्थिति में कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।

पुरुषों को स्मोकिंग और कैफीन की लत कर रही बीमार

फिटनेस एक्सपर्ट व फिटनेस एक्सप्रेस इंडिया के डायरेक्टर अंकित गौतम ने बताया कि एक्सरसाइज करने के गलत तौर-तरीके और जिम जाने से पहले या बाद में गलत खानपान, हार्ट प्रॉब्लम की वजह बनता है।

कुछ लोग एक्सरसाइज के तुरंत बाद सिगरेट पीने लगते हैं। एक्सरसाइज के दौरान शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है, लेकिन एक्सरसाइज के बाद सिगरेट पीने से शरीर कार्बन सोखने लगता है और ये शरीर के लिए खतरनाक है।

डॉ. अमित भूषण शर्मा कहते हैं कि जिम में कई बार लोग प्री वर्कआउट सप्लीमेंट लेते हैं। जिनमें कैफीन होता है। स्टेरॉइड का इस्तेमाल करने से भी टेस्टोस्टेरोन बढ़ता है और लोग ज्यादा वेट उठाने लगते हैं। इससे भी कार्डियक अरेस्ट का डर बढ़ता है।

ऐसे नापें टारगेट हार्ट रेट

हर इंसान को टारगेट हार्ट रेट के हिसाब से एक्सरसाइज करनी चाहिए। अगर वर्कआउट के दौरान यह बढ़ जाए तो समस्या हो सकती है। टारगेट हार्ट रेट को नापने के लिए 220 में से अपनी उम्र को घटाएं। जैसे अगर किसी की उम्र 35 है तो 220-35=185 bpm

यूनानी मानते थे लिवर में बनता है खून

प्राचीन यूनान में हेमा यानी खून को धर्म से जोड़ा गया। यूनान की पौराणिक कथाओं के अनुसार खून से धर्म की उत्पत्ति हुई। यूनानी चिकित्सक हिप्पोक्रेट्स (450-380 ई.पू) ने पाया कि खून पूरे शरीर में गोल घूमता है। साथ ही यह भी माना कि लिवर से खून बनता है जो दिल तक पहुंचता है और फेफड़ों को गर्म या ठंडा करता है।

किसी को यह नहीं पता था कि नसों से खून पूरे शरीर में चलता है। उनका मानना था कि खून पूरे शरीर में फैला है।

हालांकि बाद में ब्रिटेन के चिकित्सक विलियम हार्वे (1578-1657) ने पहली बार इस बात का पता लगाया कि खून दिल के जरिए शरीर में घूमता है।

इनपुट: मनीष तिवारी

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