15 मिनट सोशल मीडिया से दूरी से आएगी अच्छी नींद:गर्मी में पारा बढ़ेगा तो दिमाग होगा गरम, दाैड़ने से घुटने नहीं होंगे खराब

नई दिल्ली2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

नमस्कार,

आप अपनी और अपने परिवार की सेहत का ध्यान बेहतर ढंग से रख सकें, इसके लिए हम ‘वीकली हेल्थ ब्रीफ’ लाए हैं। इसमें आपको मिलेंगे प्रमुख हेल्थ अपडेट्स, महत्वपूर्ण रिसर्च से जुड़े आंकड़े और डॉक्टरों की रेलेवेंट सलाह। इसे मात्र 2 मिनट में पढ़कर आपको सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारियां मिलेंगी और आप परिवार का बेहतर ख्याल रख पाएंगी।

15 मिनट कम चलाएं सोशल मीडिया तो सेहत में 15%, क्वालिटी स्लीप में 50% का सुधार

आपने कहीं न कहीं पढ़ा ही होगा कि सोशल मीडिया पर ज्यादा वक्त बिताना आपकी मेंटल और फिजिकल हेल्थ के लिए ठीक नहीं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोशल मीडिया का थोड़ा सा कम इस्तेमाल करने से आपकी सेहत में कितना सुधार होगा?

ब्रिटेन की ‘स्वांसिया यूनिवर्सिटी’ ने इस विषय पर रिसर्च की है। रिसर्च में पाया गया कि सोशल मीडिया टाइम को सिर्फ 15 मिनट कम करने सेहत में काफी पॉजिटिव बदलाव लाया जा सकता है।

रिसर्च के दौरान 50 लोगों को दो समूहों में बांटा गया। पहले ग्रुप ने अपना सोशल मीडिया टाइम 15 मिनट कम किया; जबकि दूसरे ने ऐसा नहीं किया। 1 महीने तक हर दिन उनसे उनकी मेंटल-फिजिकल हेल्थ, नींद, मूड आदि के बारे में जानकारी ली गई। नतीजे में पाया गया कि सोशल मीडिया टाइमिंग कम करने वाले समूह के लोगों की नींद की क्वालिटी 50% बेहतर हो चुकी थी। उनमें डिप्रेशन का खतरा भी 30% तक कम हो गया। साथ ही उनकी इम्यूनिटी भी 15% तक बेहतर हो गई। कम सोशल मीडिया चलाने वाले लोगों में सर्दी-खांसी-बुखार और फ्लू के मामले भी कम देखे गए। वे लोग पहले से ज्यादा खुश भी रहने लगे थे।

हेल्थ ब्रीफ में आगे बढ़ने से पहले इस पोल पर अपनी राय साझा करते चलें...

घुटने और टखने को बचाने के लिए दौड़ने से रोकते थे डॉक्टर, रिसर्च में पाया गया कि कोई फर्क नहीं पड़ता

मेडिकल वर्ल्ड में लंबे समय से ऐसी मान्यता रही है कि ज्यादा या तेज दौड़ने से घुटने और टखने के लिगामेंट्स जल्दी खराब होते हैं। यही वजह है कि लिगामेंट्स रिलेटेड दिक्कतें आने के बाद डॉक्टर मरीजों को दौड़ने से रोक देते थे।

ऐसा सिर्फ भारत में नहीं; बल्कि विकसित माने जाने वाले अमेरिका और यूरोपीय देशों में भी हो रहा था। लेकिन मैराथन रनर्स पर हुई एक नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि ये सोच पूरी तरह से भ्रामक है। अमेरिका की 'नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी' रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि लिगामेंट्स प्रॉब्लम का ज्यादा या तेज दौड़ने से कोई संबंध नहीं है। ऐसी समस्या होने पर न दौड़ने की सलाह देना भी गलत है।

लगभग 4000 मैराथन रनर्स पर हुई रिसर्च में पाया गया कि इनमें से 7.3% लोग घुटने या टखने में लिगामेंट प्रॉब्लम से जूझ रहे थे। जबकि मैराथन या किसी भी तरह की दौड़ में हिस्सा न लेने वाले आम लोगों में भी ये आंकड़ा इतना ही पाया गया। जिसके आधार पर निष्कर्ष निकाला गया कि दौड़ने का लिगामेंट प्रॉब्लम से कोई संबंध नहीं।

बढ़ती गर्मी से साथ दिमाग भी होगा गरम, बिगड़ सकते हैं रिश्ते; ऐसे रखें खुद को कूल

आपने दिमाग का पारा चढ़ने वाले फ़िक़रा सुना ही होगा। लेकिन ये केवल बोलने की बात नहीं है। बोस्टन यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च बताती है कि गर्मी के मौसम में दिमाग के गर्म होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इस दौरान लोगों को गुस्सा भी ज्यादा आता है। जिसके चलते इन दिनों आपसी मनमुटाव और झगड़े भी बढ़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में मानसिक परेशानी, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन का भी खतरा होता है।

आपने गर्मी के मौसम में दिमाग पर पड़ने वाले प्रभाव को रिसर्च की मदद से समझ लिया है। अब गर्मी के दिनों में खुद को कूल रखने का फंडा डाइटीशियन से जान लीजिए…

सही डाइट से कूल और तरोताजा रहेगा माइंड

डाइटीशियन कोमल सिंह बताती हैं कि सही डाइट के सहारे गर्मी के दिनों में दिमाग को ठंडा और तरोताजा रखा जा सकता है। इसके लिए खूब पानी पीने के अलावा तरबूज जैसे रसीले मौसमी फल खाने चाहिए। ठंडी तासीर की चीजें जैसे पुदीना, दही-छाछ का उपयोग भी माइंड और बॉडी को ठंडा रखता है। इस दौरान ज्यादा तला-भुना, मसालेदार भोजन, अल्कोहल और कैफीन से बचना चाहिए।

खबरें और भी हैं...