मैटरनिटी-फीडिंग पिलो कर सकती है मदद:अच्छी नींद और सोने की पोजीशन में सुधार करे, बॉडी पेन से राहत दे, डिलीवरी के बाद भी मददगार

23 दिन पहले
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महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान जो समस्याएं आती हैं उनमें सबसे आम समस्या है आरामदायक नींद। बिस्तर पर लेटने के बाद करवट लेना या फिर कंफर्टेबल तरीके से सोना बेहद मुश्किल होता है। इस दौरान प्रेग्नेंसी पिलो गर्दन, कंधे और पीठ दर्द जैसी सामान्य समस्याओं से निजात देती है। एसिड रिफ्लेक्स को कम करती है, जिससे अच्छी नींद आती है। प्रेग्नेंसी पिलो की मदद से आप आरामदायक नींद ले सकती हैं। साथ ही इस बात का भी पूरा ख्याल रख सकती हैं कि गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान न हो।

प्रग्नेंसी के दौरान महिलाओं में रोज नए बदलाव आते हैं, जिसमें उनके पहनने-ओढ़ने के तरीके से लेकर खान-पान, उठना-बैठना सब कुछ बदल जाता है। मां बनना जितना खुशी का मौका है, उतना ही मुश्किल समय। इसके साथ तालमेल बनाने के लिए खास ख्याल रखना पड़ता है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिला को अपने साथ ही पेट में पल रहे शिशु का भी पूरा ख्याल रखना होता है।

मैटरनिटी पिलो क्या है

प्रेग्नेंसी पिलो को मैटरनिटी पिलो के नाम से भी जानते हैं। इसे खास तौर पर गर्भावस्था के समय महिलाओं के शरीर में हुए परिवर्तन को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिससे प्रेग्नेंसी में सही तरह से सोने के लिए सपोर्ट मिल सके। ये तकिया आम तकिए से ज्यादा बड़ा और आरामदायक होता है। यह प्रेग्नेंसी के दौरान सही पोजिशन में सोने और अच्छी नींद लेने में मदद करता है। प्रेग्नेंसी पिलो एक नया प्रोडक्ट है जो प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को आराम से सोने में मदद करता है।

प्रग्नेंसी पिलो के फायदे

अच्छी नींद- प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को ठीक से नींद न आने की परेशानी होना आम बात है। प्रेग्नेंसी पिलो का इस्तेमाल कर इस परेशानी में काफी हद तक सुधार पाया जा सकता है। इसे लेकर कई रिसर्च की गईं, जिनमें पाया गया कि प्रेग्नेंसी पिलो का इस्तेमाल करने से आरामदायक नींद आती है।

बॉडी पेन से राहत- प्रेग्नेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला का वजन बढ़ने के कारण बॉडी के अलग-अलग हिस्सों में दर्द होता है। इस दर्द को कम करने में भी प्रेग्नेंसी पिलो मदद करता है। इस पिलो का इस्तेमाल करने से पीठ, हिप, बेबी टमी, घुटनों को पूरा सपोर्ट मिलता है, जिससे प्रेग्नेंट महिला को पूरा आराम मिलता है। साथ ही बॉडी के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले दर्द से भी राहत मिलती है।

सोने की पोजीशन में सुधार- प्रेग्नेंसी के दौरान सही तरीके से नहीं सोने पर बच्चे का जन्म समय से पहले होने का जोखिम हो सकता है। प्रेग्नेंसी के पिलो सोने की पोजीशन सुधारने में मदद करता है, जिससे कि समय पूर्व जन्म का जोखिम कम हो सकता है।

डिलीवरी के बाद भी मददगार- मैटरनिटी पिलो का एक फायदा यह भी है कि आप इसे प्रेग्नेंसी में तो इस्तेमाल कर ही सकती हैं, डिलीवरी के बाद भी यह आपकी मदद करेगा, क्योंकि यह फीडिंग के दौरान बच्चे को सही पोजीशन में रखने में मदद करेगा।

प्रेग्नेंसी पिलो नींद के साथ ही प्रेग्नेंसी में होने वाले दर्द से भी राहत देता है। साथ ही इस दौरान पेट में गैस बनने की दिक्कतों को भी खत्म करता है।

प्रेग्नेंसी पिलो से आरामदायक नींद आती है और गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान नहीं होता।
प्रेग्नेंसी पिलो से आरामदायक नींद आती है और गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान नहीं होता।

कब शुरू करें प्रेग्नेंसी पिलो का इस्तेमाल

प्रेग्नेंसी पिलो का इस्तेमाल करने का कोई समय नहीं होता। जब भी सोने में परेशानी हो प्रेग्नेंसी के करीब 20वें हफ्ते में महिला का पेट बढ़ने लगता है जिससे वजन बढ़ने के कारण उन्हें लिगामेंट्स और बॉडी पार्ट्स में दर्द होने लगता है। उसी समय से प्रेग्नेंसी पिलो का इस्तेमाल शुरू कर सकती हैं।

फीडिंग पिलो क्या है

डिलीवरी के बाद ब्रेस्ट फीडिंग का अनुभव सुखद होता है, वहीं कुछ मांओं को काफी तकलीफ से भी गुजरना पड़ता है। मां और बच्चा जब तक एक दूसरे के साथ तालमेल नहीं बिठा लेते, तब तक ब्रेस्ट फीडिंग दोनों के लिए चैलेंजिंग हो सकता है। इसमें 4 से 6 हफ्ते लग सकते हैं और इस सफर को आसान बनाने में फीडिंग पिलो मदद कर सकता है। फीडिंग पिलो को नर्सिंग पिलो भी कहा जाता है। ब्रेस्ट फीडिंग को बेहतर बनाने के लिए इसे खास तौर से तैयार किया गया है।

फीडिंग पिलो का इस्तेमाल

फीडिंग पिलो को ब्रेस्ट के लेवल तक ले जाएं, ताकि बच्चे को निप्पल पर पकड़ बनाने में परेशानी न हो।

अगर आपको लगे कि ऐसे में बच्चे को दूध पीने में आसानी होगी, तो आप पीछे की ओर थोड़ा झुक सकती हैं।

बच्चे के वजन के कारण फीडिंग पिलो नीचे की ओर थोड़ा दब सकता है। अगर इससे बच्चे को दूध पीने के लिए निप्पल पर पकड़ बनाने में परेशानी हो रही है, तो आप फीडिंग पिलो और आपके पैरों के बीच रेगुलर तकिया लगा सकती हैं। फिर आप फ्री हाथों से बच्चे को थाम सकती हैं या उसके सिर को एडजस्ट कर सकती हैं, जिससे उसे दूध पीने में आसानी हो।

बैठकर फीड कराना- ऐसी कई मां हैं, जो बैठकर बच्चे को दूध पिलाना पसंद करती हैं। इससे बच्चे निप्पल तक आसानी से पहुंच पाते हैं और उन्हें दूध पीने में आसानी होती है।

दर्द में कमी- पीठ का दर्द और गर्दन का दर्द ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान झुकने से होने वाले कुछ साइडइफेक्ट हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि फीडिंग के समय बच्चे को उठाकर छाती तक लाना पड़ता है। फीडिंग पिलो की मदद से झुकने से छुट्टी मिल जाती है।

यह बेहतर है- बेबी फीडिंग पिलो बॉडी पर लगा सकती हैं। वहीं कुछ फीडिंग पिलो में पॉकेट्स भी होते हैं, जो कि बहुत उपयोगी हैं, क्योंकि ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान आप ज्यादा हिल-डुल नहीं सकतीं।

बच्चे की पोजिशन- फीडिंग पिलो बच्चे के सिर के लिए एक उभरे हुए प्लेटफार्म के साथ आते हैं। ये न सिर्फ बच्चे को सही से तरह से दूध पीने में मदद करते हैं, बल्कि रिफ्लेक्स एक्शन को भी कम करते हैं।

नर्सिंग पिलो का इस्तेमाल बच्चे के टमी टाइम और बच्चे को नीचे से सहारा देने के लिए भी किया जा सकता है।

पिता भी इस्तेमाल कर सकते हैं

कौन कहता है कि बच्चे को बड़ा करने में पिता मदद नहीं कर सकते। जो पिता अपने बच्चे को बोतल से दूध पिलाना चाहते हैं, उनके लिए नर्सिंग पिलो बहुत मददगार हो सकता है।

मां और बच्चा जब तक एक दूसरे के साथ तालमेल नहीं बिठा लेते, तब तक ब्रेस्ट फीडिंग दोनों के लिए चैलेंजिंग है।
मां और बच्चा जब तक एक दूसरे के साथ तालमेल नहीं बिठा लेते, तब तक ब्रेस्ट फीडिंग दोनों के लिए चैलेंजिंग है।

नर्सिंग पिलो के नुकसान

नर्सिंग पिलो का इस्तेमाल सही तरीके से न किया जाए, तो बच्चे को दूध पीने में परेशानी हो सकती है, क्योंकि बच्चे नर्सिंग पिलो में धंस जाते हैं और निप्पल तक ठीक से नहीं पहुंच पाते। जिन मांओं को अक्सर बाहर जाना पड़ता है, उन्हें इतने बड़े पिलो को हमेशा साथ ले जाने में परेशानी होती है। अलग-अलग बॉडी टाइप की महिलाओं को अपने शरीर और जरूरत को देखते हुए नर्सिंग पिलो का चुनाव करना होता है, क्योंकि इसका कोई एक स्टैंडर्ड साइज नहीं है। एक स्टैंडर्ड मेजर की कमी के कारण मां के लिए सही फिट का चुनाव कर पाना मुश्किल हो जाता है।

नर्सिंग पिलो खरीदने के टिप्स

कपड़े खरीदने की तरह ही नर्सिंग पिलो भी सोच समझकर खरीदना चाहिए। ज्यादा ढीला होने पर यह गिर सकता है और बच्चे को दूध पीने में मुश्किल हो सकती है। अगर पिलो बहुत छोटा हो, तो जांघों और तकिये के बीच खाली जगह बच सकती है और बच्चे के वजन के कारण यह फिसल सकता है। ये कई शेप और साइज में आते हैं और सबका अपना एक अलग फायदा होता है। बाहर आने-जाने वाली मां को बड़े तकियों को साथ रखने में असुविधा हो सकती है, इसलिए उनके लिए छोटे तकिए अच्छे होते हैं, ताकि उन्हें कैरी करने में आसानी हो। बच्चों की स्किन नाजुक होती है, इसलिए पॉलिस्टर जैसे सिंथेटिक मटेरियल से बचना बेहतर है, इससे स्किन इरिटेशन और रैशेज जैसी समस्या हो सकती है। कॉटन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ये एक हेल्दी ऑप्शन है। फ्लेम रेजिस्टेंस और रिंकल फ्री तकिए भी नहीं खरीदने चाहिए, उनमें फॉर्मलडिहाइड होता है, जोकि कैंसर पैदा कर सकता है।

डिस्क्लेमर -सलाह सहित यह सामग्री सिर्फ सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

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