शुगर कंट्रोल करे इंसुलिन प्लांट:खांसी, जुकाम, स्किन, और आंखों के इंफेक्शन में पहुंचाए आराम, फेफड़ों की बीमारी में भी फायदेमंद

6 दिन पहलेलेखक: मरजिया जाफर
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इंसुलिन प्लांट का बोटैनिकल नाम ‘चामेकोस्टस कस्पिडाटस’ या ‘कोस्टेसी' है। इसे फेयरी कॉस्टस, स्पाइरल फ्लैग या इंसुलिन प्लांट भी कहते हैं। इंसुलिन मेडिसिनल प्लांट है। आयुर्वेद में डायबिटीज के रोगियों के लिए यह टॉनिक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। आइए, आयुर्वेदाचार्य डॉ. सिद्धार्थ सिंह से जानते हैं इंसुलिन के पत्ते खाने के फायदे।

इलाज के काम आता है इंसुलिन का पौधा

इंसुलिन एक ऐसा पौधा है जिसकी पत्तियां चबाकर शुगर कंट्रोल कर सकते हैं। इसका आयुर्वेद में काफी महत्व है। इसे क्रेप अदरक, केमुक, कुमुल, कीकंद, पकरमुला, पुष्करमूला जैसे नामों से भी जाना जाता है।

इंसुलिन प्लांट के फायदे

  • इंसुलिन के पत्ते को चबाने से बॉडी मेटाबोलिक प्रोसेस बेहतर होता है।
  • शुगर ही नहीं, खांसी, जुकाम, स्किन, आंखों का इंफेक्शन, फेफड़ों की बीमारियां, दमा, लूज मोशन, कब्ज जैसी बीमारियों में भी इंसुलिन के पौधे का इस्तेमाल किया जाता है।
  • पौधे में मौजूद नेचुरल केमिकल शुगर को ग्लाइकोजन में बदलता है जिससे शुगर पेशेंट को फायदा होता है।

कॉसटस इग्नस के फायदे

कॉसटस इग्नस इंसुलिन डिस्चार्ज करता है। ये शुगर को कंट्रोल करने के साथ ही डायबिटीज होने के खतरे को भी कम करता है। इसमें प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स, एस्कॉर्बिक एसिड, आयरन, फ्लेवोनोइड्स, बी कैरोटीन और कोर्सोलिक एसिड जैसे न्यूट्रिशन मौजूद होते हैं। ये डायबिटीज के अलावा फेफड़े और आंखों को भी फायदा पहुंचाता है।

टाइप-2 डायबिटीज के लिए रामबाण

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो इम्यूनिटी कम करती है जिससे कई तरह की बीमारियां शरीर को अपनी चपेट में ले लेती हैं। ऐसे में इंसुलिन का पौधा शुगर लेवल कम करने में काफी असरदार है। ‘एनसीबीआई’ के मुताबिक, इंसुलिन के पत्ते की मदद से ब्लड शुगर को कंट्रोल और टाइप-2 डायबिटीज का इलाज किया जा सकता है। इस पौधे में इंसुलिन नहीं होता और न ही यह शरीर में इंसुलिन बनाता है।

इस तरह करें इस्तेमाल

  • इंसुलिन के पौधे की दो पत्तियों को धोकर पीस लें। इन्हें एक गिलास पानी में घोलकर सुबह-शाम रोजाना पिएं, डायबिटीज कंट्रोल होगी।
  • इंसुलिन के पत्तों को सुखाकर उसका पाउडर बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। शुगर बढ़े तो एक चम्मच पाउडर खा लें, आराम मिलेगा।
  • रोजाना नियम से सेवन करते हैं तो 12 से 15 दिनों में शुगर काफी हद तक कंट्रोल हो जाएगी।
  • इसके पत्तों का स्वाद हल्का खट्टा होता है।

इंसुलिन प्लांट स्टीविया क्या है

स्टीविया नैचुरली मीठा होने की वजह से इसे हनी प्लांट भी कहते हैं। इसके सेवन से पैंक्रियाज से इंसुलिन रिलीज होता है, जो बॉडी में ग्लूकोज की मात्रा ऑब्जर्व कर ब्लड शुगर कंट्रोल करता है।

डायबिटीज पेशेंट के लिए इंसुलिन प्लांट

इंसुलिन प्लांट स्टीविया डायबिटीज के पेशेंट के लिए फायदेमंद है। इससे ब्लड शुगर लेवल नहीं बढ़ता। स्टीविया हाई ब्लड प्रेशर, एसिडिटी और स्किन प्रॉब्लम्स को दूर करने के साथ-साथ कई अन्य रोगों के इलाज में कारगर है। बाजार में मिलने वाले शुगर फ्री प्रॉडक्ट्स पर मेंशन की किए गए इंग्रीडिएंट्स पर गौर करें, तो ज्यादातर शुगर फ्री प्रॉडक्ट्स में स्टीविया का ही इस्तेमाल किया जाता है। स्टीविया का स्वाद नैचुरली मीठा होने की वजह से यह डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है।

इंसुलिन प्लांट स्टीविया में मौजूद न्यूट्रिशन

इंसुलिन प्लांट स्टीविया में कई न्यूट्रिशन मौजूद हैं, जो डायबिटीज पेशेंट के लिए हेल्दी हैं, जैसे- स्टीविया का उपयोग मिठास के लिए किया जाता है। स्टीविया में एंटीऑक्सीडेंट जैसे फ्लेवोनोइड्स, टैनिन, कैफीक एसिड, क्वेरसेटिन जैसे न्यूट्रिशन मौजूद हैं। वहीं इस इंसुलिन प्लांट में फाइबर, प्रोटीन, आयरन, पोटैशियम, सोडियम, विटामिन ए और विटामिन सी की भी अच्छी मात्रा मौजूद है। सेहत के लिए इसमें छोटे कार्बनिक यौगिक भी मुख्य भूमिका निभाते हैं इसलिए यह डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है।

इंसुलिन प्लांट स्टीविया का इस्तेमाल कैसे करें

  • चाय या कॉफी में स्‍टीविया के पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • शिकंजी पीने के शौकीन चीनी की जगह स्टीविया पाउडर मिलाकर पी सकते हैं।
  • लंच या डिनर में स्‍टीविया की हरी पत्तियों को शामिल कर सकते हैं, जो खाने का टेस्ट बढ़ाती हैं।
  • दूध-दही में चीनी की कमी महसूस कर रहें हैं, तो चीनी की जगह स्टीविया पाउडर मिला सकते हैं।
  • मीठी चीजों में स्टीविया पाउडर मिक्स कर सकते हैं।
इंसुलिन प्लांट स्टीविया का स्वाद मीठा होता है, मीठी चीजों में स्टीविया पाउडर मिक्स करके इसका सेवन कर सकते हैं।
इंसुलिन प्लांट स्टीविया का स्वाद मीठा होता है, मीठी चीजों में स्टीविया पाउडर मिक्स करके इसका सेवन कर सकते हैं।

इंसुलिन प्लांट स्टीविया के साइड इफेक्ट्स

  • इंसुलिन प्लांट स्टीविया के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से शरीर में ऐंठन और सूजन होती है।
  • इसकी पत्तियां ज्यादा खाने से सिरदर्द या चक्कर आ सकता है।
  • अधिक सेवन से उल्टी, पेट दर्द का सामना करना पड़ सकता है।
  • इंसुलिन प्लांट स्टीविया का सेवन प्रेग्नेंट महिलाएं भी कर सकती हैं, लेकिन डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
  • इसका सेवन महिला या पुरुष दोनों में इनफर्टिलिटी का कारण भी बन सकता है।

हर उम्र के लोगों को डायबिटीज का खतरा

लाइफस्टाइल और खानपान का नेगेटिव इम्पैक्ट बॉडी पर पड़ता है। फिजिकल एक्टिविटी न करना, बच्चों का ज्यादा वक्त टीवी, कम्प्यूटर या मोबाइल के साथ गुजारना कहीं न कहीं शारीरिक परेशानियों को दावत देने जैसा है। ऐसे में डायबिटीज रोग भी दस्तक दे सकता है। ‘यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ फैमिली एंड हेल्थ वेलफेयर’ में पब्लिश्ड रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के रूरल एरिया में रह रहे 9.3 प्रतिशत बुजुर्गों में डायबिटीज की बीमारी है। डायबिटीज की प्रॉब्लम हर उम्र के लोगों में हो रही है। डायबिटीज होने पर में पैंक्रियाज में मौजूद बीटा सेल्स इंसुलिन का प्रोडक्शन बंद कर देते हैं। ऐसी में ब्लड ग्लूकोज लेवल बढ़ जाता है। ज्यादा दिनों तक ऐसी स्थिति बनी रहे, तो ब्लड में कीटोन बनने लगता है जो नुकसानदेह है।

इंसुलिन का पौधा साल भर में कभी भी लगा सकते हैं। यह एक झाड़ी नुमा पौधा है।
इंसुलिन का पौधा साल भर में कभी भी लगा सकते हैं। यह एक झाड़ी नुमा पौधा है।

घर पर लगा सकते हैं इंसुलिन का पौधा

इंसुलिन प्लांट को घर के आस पास लगा लें। शुगर बढ़ने पर इसके 2 से 4 पत्ते चबाने से शुगर कंट्रोल हो जाता है। इन पौधों की ऊंचाई करीब 2-3 फीट होती है। यह गर्मियों में फलता है। इसके सुंदर फूल शाखाओं के सिरों पर शंकु के आकार के प्रतीत होते हैं। इंसुलिन का पौधा साल भर में कभी भी लगा सकते हैं। यह एक झाड़ी नुमा पौधा है। मानसून में इस पौधे को लगाना आसान है। घर पर गमले में भी यह पौधा आसानी से पनप जाता है।

डिस्क्लेमर-यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। इसे अपनाने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।