पत्नी के साथ सेक्स या हैवानियत:क्या पति भी होता है बलात्कारी, सेक्सुअल रिश्ता जब कानून के दायरे में आ जाए

6 दिन पहलेलेखक: कमला बडोनी
  • कॉपी लिंक

अपना ही पति जब संबंध बनाते समय बलात्कारी लगे, तब महिला की मानसिक स्थिति और कष्ट का अंदाजा लगाना मुश्किल है। इसी स्थिति को ‘मैरिटल रेप कहा जाता है। मैरिटल रेप’ को अपराध समझा जाए या नहीं, ये हमेशा से विवाद का विषय रहा है। पति-पति के शारीरिक संबंध जब कोर्ट तक जा पहुंचते हैं, तो क्या होता है? मैरिटल रेप का सच जानने के लिए हमने एक्सपर्ट्स से बात की और कई अनछुए-अनकहे पहलुओं को जाना।

मैरिटल रेप के मुद्दे पर हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी आई कि भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत, बिना सहमति के यदि सेक्स संबंध बनता है, तो यह अपराध है, लेकिन मैरिटल रेप अभी तक इसमें अपवाद क्यों है? इसके बाद मैरिटल रेप पर एक बार फिर से बहस शुरू हो गई। हमने इस मुद्दे को महिला और पुरुष दोनों के नजरिए से देखने को कोशिश की है और एक्सपर्ट्स से इसकी वजह और निवारण दोनों पर बात की।

मैरिटल रेप को गुनाह नहीं माना जाता

वुमन राइट एक्टिविस्ट और लॉयर आभा सिंह कहती हैं, “भारत में मैरिटल रेप को गुनाह नहीं माना जाता। हमारे देश में लड़की को मायके से यही सीख दी जाती है कि पति परमेश्वर है, उसे हर हाल में खुश रखना, पति की संतुष्टि ही औरत का फर्ज है। इस मानसिकता के चलते पुरुष समझता है कि पत्नी के साथ वो कुछ भी कर सकता है। जब मैरिटल रेप का केस पहली बार कोर्ट में आया, तब ये कहा गया कि इस ग्राउंड पर यदि तलाक होने लगेंगे, तो हमारा मैरिज सिस्टम ही खत्म हो जाएगा। विदेशों में भी जहां मैरिटल रेप का कानून है, वहां इससे बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है। हर महिला अपनी शादी को चलाना चाहती है इसलिए ऐसी शिकायतें बहुत कम आती हैं। जो शिकायतें आती भी हैं, वो शारीरिक हिंसा की होती हैं। यदि महिला शादी के बंधन में नहीं रहना चाहती, तो वह उससे बाहर आ सकती है। इसके लिए महिलाओं के पास कानून है जिसका वो उपयोग भी कर रही हैं। धारा 498ए के तहत महिलाएं शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक प्रताड़ना के लिए भी पति पर केस कर सकती हैं। मैरिटल रेप के कानून से महिलाओं की जिंदगी में बहुत ज्यादा बदलाव आने वाला नहीं है, इसके लिए लोगों की मानसिकता बदलनी जरूरी है।”

मैरिटल रेप ज्यादा तकलीफदेह होता है

सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. राजन भोसले के अनुसार, यूएसए में जब पहली बार मैरिटल रेप पर बात की गई, तो लोग हैरान रह गए थे कि पत्नी के साथ भी पति बलात्कार कर सकता है। फिर जब इस पर खुलकर बहस हुई तो ये बात सामने आई कि कई मामलों में मैरिटल रेप आम बलात्कार से भी ज्यादा बदतर होता है। बलात्कार के अधिकतर मामलों में महिला रेपिस्ट को नहीं जानती, उसके साथ एक बार बलात्कार होता है, तो वह तुरंत इसकी शिकायत कर दोषी को सजा दिलवा सकती है। कानून और लोगों की संवेदनाएं उसके साथ होती हैं। मैरिटल रेप में रेपिस्ट पति होता है और वह बार-बार पत्नी का बलात्कार करता है और महिला रो-चिल्लाकर उसे रोक भी नहीं सकती। किसी से कुछ कह नहीं सकती, क्योंकि पति-पत्नी के बीच सेक्स होना आम बात है।

सेक्स मेनियाक स्त्री को टॉर्चर करते हैं

रिलेशनशिप काउंसलर माधवी सेठ ने बताया, “कई पुरुष ऐसे भी होते हैं, जिन्हें सेक्स के दौरान पत्नी को तकलीफ पहुंचाकर संतुष्टि मिलती है। ऐसे लोगों को ‘सेक्स मेनियाक’ कहते हैं। ये पुरुष सेक्स के दौरान पत्नी को मारते, काटते और गंदी गालियां देते हैं। अननैचुरल सेक्स का दबाव भी डालते हैं। ऐसी अमानवीय हरकतों को मैरिटल रेप ही कहेंगे। जब सेक्स में सिर्फ एक पार्टनर की मर्जी चलती है, तो इसे रेप ही कहा जाना चाहिए। ज्यादातर महिलाएं घर बचाने के लिए सबकुछ चुपचाप सहन करती हैं, लेकिन जब अति हो जाती है, फिर वे चुप नहीं रह पातीं।”

महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं

आभा सिंह महिलाओं की स्थिति बताते हुए कहती हैं कि विडंबना ये है कि जिन महिलाओं के साथ वाकई अत्याचार होता है, उन्हें कानून की कोई जानकारी नहीं होती। उन्हें तो ये भी पता नहीं होता कि वो जो व्यवहार सहन कर रही हैं, वो अमानवीय है। उन्हें लगता है कि पति है तो मारेगा-पीटेगा ही, क्योंकि वो अपने आसपास यही देखती हैं। ऐसी महिलाएं आर्थिक रूप से पति पर निर्भर होती हैं इसलिए उनके पास साहस नहीं होता कि वो पति के बिना अपने बलबूते पर रह सकें। माता-पिता भी बेटी की जिम्मेदारी उठाने के लिए सक्षम नहीं होते इसलिए वहां से भी चुपचाप सबकुछ सहन करने के लिए कहा जाता है। ऐसी महिलाओं को न कानून की जानकारी होती है और न ही उनके पास वकील की फीस चुकाने के लिए पैसे होते हैं इसलिए पति के अत्याचार सहते हुए जिंदगी गुजर जाती है।

भारत में मैरिटल रेप के केस ज्यादा हैं

डॉ. राजन भोसले मानते हैं कि हमारे देश में जागरूकता की कमी के कारण मैरिटल रेप के केसेस ज्यादा हैं। उन्होंने इसके बारे में बताते हुए कहा, “यूएसए में जब मैरिटल रेप पर सर्वे किया गया, तो इसमें 18 से 80 वर्ष की महिलाओं को शामिल किया गया। उनसे सवाल किया गया कि आपकी शादीशुदा जिंदगी में कभी ऐसा हुआ है जब पति ने आपका बलात्कार किया हो। सर्वे में 20% महिलाओं ने स्वीकारा कि पति उनके साथ बलात्कार करते हैं। ये सर्वे अमेरिका जैसे विकसित देश में हुआ था जहां महिलाएं पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं। हमारे देश में आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं पढ़ी-लिखी नहीं हैं, उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होती, वो आर्थिक रूप से पति पर निर्भर रहती हैं, उन्हें मैरिटल रेप जैसी बात शायद समझ में भी न आए।” डॉ. भोसले कहते हैं कि उन्होंने अपनी प्रैक्टिस के दौरान महसूस किया कि हमारे देश में मैरिटल रेप के केस बहुत ज्यादा हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि हर केस में पति अत्याचारी ही हो। अधिकतर पुरुषों को ये जानकारी नहीं होती कि पत्नी की सेक्स इच्छाओं का ध्यान कैसे रखा जाए। सिर्फ पांच प्रतिशत मामलों में पति स्वभाव से क्रूर होता है और सेक्स के दौरान भी पत्नी को प्रताड़ित करता है। 15% महिलाएं ऐसी हैं, जो सेक्स पर बात नहीं करतीं, जो हो रहा है उसे होने देती हैं। ऐसे में पति को कैसे पता चलेगा कि पत्नी की इच्छा क्या है। वो जान-बूझकर पत्नी को तकलीफ नहीं पहुंचाता। बाकी 80% स्त्री-पुरुषों में जानकारी और जागरूकता की कमी के कारण सेक्स लाइफ को लेकर मतभेद होता है।

महिलाओं का मन नहीं पढ़ पाते पुरुष

माधवी सेठ का ये मानना है कि पुरुष शादी के बाद पत्नी के शरीर पर अपना अधिकार समझने लगते हैं। कानूनी तौर पर भी उन्हें सेक्स का लाइसेंस मिल जाता है, लेकिन पत्नी का मन क्या चाहता है, इसे वो जानने की कोशिश नहीं करते। स्त्री या पुरुष, किसी को भी किसी के शरीर पर उसकी मर्जी के खिलाफ अधिकार जताने का हक नहीं है। पुरुषों की सेक्सुअल डिमांड महिलाओं से ज्यादा होती है इसलिए वो सेक्स को लेकर ज्यादा एक्टिव होते हैं। महिलाओं को ये सिखाया जाता है कि पति को पल्लू में बांधकर रखना, नहीं तो वो कहीं और भटक जाएगा, उन्हें हर हाल में पति को संतुष्ट करना है। इस डर से महिलाएं पति की हर ज्यादती बर्दाश्त करती हैं। किसी भी महिला का शरीर पाने के लिए पहले उसका मन पाना होता है, तभी दोनों सेक्स लाइफ को एंजॉय कर सकते हैं।

कानून का दुरुपयोग भी हो रहा है

आभा सिंह ये मानती हैं कि मैरिटल रेप के मामले में कानून का दुरुपयोग हो रहा है। उनके अनुसार, कई ऐसी पढ़ी-लिखी महिलाएं भी हैं जो अपने फायदे के लिए कानून का दुरुपयोग कर रही हैं। वो पति पर झूठे आरोप लगाकर तलाक में मोटी रकम वसूल रही हैं। धारा 498 का दुरुपयोग करने वाली महिलाओं की भी कमी नहीं है, जो दहेज या प्रताड़ना का झूठा आरोप लगाकर पति और उसके परिवार को फंसाती हैं। ऐसा कोई दंपती नहीं जिनमें तू तू-मैं मैं न हो, लेकिन हर छोटी बात पर तलाक नहीं लिया जा साकता। सेक्स में पति यदि पत्नी के साथ हिंसा करता है, तो ये अपराध है, इसके लिए उसे सजा मिलनी चाहिए, लेकिन पत्नी यदि सेक्स के नाम पर पति को ब्लैकमेल करे, तो ये भी सही नहीं है।

महिलाएं अब तलाक लेने लगी हैं

आभा सिंह कहती हैं, “पढ़ी-लिखी आत्मनिर्भर महिलाएं पति की ज्यादती सहन नहीं करतीं। जब बात उनके बर्दाश्त से बाहर पहुंच जाती है, तो वो पति से अलग हो जाती हैं। एक महिला ने पति पर आरोप लगाया कि वो अपने दोस्तों के साथ पत्नी के ब्रेस्ट के साइज पर डिस्कशन करता था, उन्हें बताता था कि उसके निप्पल अंदर की तरफ हैं, उल्टे हैं। पत्नी को ये बात अच्छी नहीं लगी इसलिए उसने पति पर केस कर दिया। किसी भी औरत के लिए इससे बड़ी भावनात्मक क्रूरता क्या होगी कि उसका पति अपने दोस्तों के सामने उसके शरीर का मजाक उड़ाता है। महिलाएं अपनी गृहस्थी बचाने की पूरी कोशिश करती हैं, लेकिन जब बात बर्दाश्त से बाहर हो जाती है, तो फिर वो कानून का सहारा लेती हैं। एक महिला ने पति के अफेयर को सबूत के साथ पेश किया और तलाक में बड़ी रकम मांगी। पढ़ी-लिखी आत्मनिर्भर महिलाएं अब अबला नहीं रहीं, उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी है और अपने हक के लिए वो कानून का इस्तेमाल भी कर रही हैं।”

पति अत्याचारी हो ये जरूरी नहीं

डॉ. राजन भोसले सेक्स एजुकेशन को बहुत जरूरी मानते हैं। वो कहते हैं, “अज्ञानता में जब सेक्स संबंध बनाए जाएंगे, तो वो मैरिटल रेप ही कहलाएंगे। कई महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें शादी के सालों बाद एक बार भी सेक्स संतुष्टि नहीं मिलती। पति संबंध बनाकर तृप्ति पा लेता है, लेकिन पत्नी की संतुष्टि के बारे में नहीं सोचता। उसे मालूम ही नहीं होता कि पत्नी सेक्स से संतुष्ट नहीं है। महिला शर्म और संकोच के मारे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाती और कभी सेक्स को एंजॉय नहीं करती। शादी से पहले स्त्री और पुरुष दोनों को सेक्स संबंध की सही जानकारी देना जरूरी है, तभी मैरिटल रेप के मामलों को रोका जा सकता है।”