अंकुरित आलू खाने से पहले जान लें:यह बन जाता है जहरीला, बढ़ सकता है ब्लड शुगर लेवल और फूड पॉइजनिंग का खतरा

18 दिन पहलेलेखक: मरजिया जाफर
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आलू बहुत दिनों तक घर में रखा रहे तो उसमें अंकुर निकल आते हैं। इन अंकुरित आलूओं को खाने के बारे में बहुत-सी बातें भी होती हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इन्हें खाने से डाइजेशन की परेशानी हो सकती हैं तो कुछ महिलाएं आलू के अंकुर हटाकर उनका इस्तेमाल कर लेती हैं। डाइटीशियन स्‍वाति विश्नोई से जानते है अंकुरित आलू खाने चाहिए या नहीं।

अंकुरित आलू सेहत के लिए सही नहीं है। अंकुरित होने का मतलब ये है कि सब्‍जी एक रसायनिक प्रतिक्रिया से गुजर रही है। ऐसे आलू के सेवन से सेहत को खतरा हो सकता है। आलू के गड्ढे वाले हिस्‍सों से अंकुर निकलना शुरू होता है। अंकुरित होने पर आलू में पाये जाने वाला कार्बोहाड्रेट ‘स्‍टार्च’ शुगर में बदलने लगते है, जिस वजह से आलू काफी नरम हो जाता है। ये प्रक्रिया सोलानिन और अलफा-कैकोनिन नाम के दो एल्कलॉइड के प्रोडक्ट का कारण बनती है। सैलोनिन को विषाक्‍त माना जाता है।

हरे रंग के आलू भी नहीं खाने चाहिए

हल्‍के हरे रंग के आलू भी नहीं खाने चाहिए। आलू बनाने से पहले हरे रंग के हिस्‍से को काटकर अलग कर देना चाहिए। हरे रंग का आलू खाने से फूड पॉइजनिंग की समस्‍या भी हो सकती है। अगर पैदावार के समय से आलू अंकुरित है, तो अंकुर हटाकर उसे खाया जा सकता है। अध्‍ययन के अनुसार, इस दौरान आलू की सब्जी में ज्यादातर पोषक तत्‍व होते हैं। लेकिन आलू काफी दिनों से रखा हुआ है और वो सिकुड़ गया है या उसमें झुर्रियां पड़ गई हैं, तो उसे फेंकना ही बेहतर है।

अंकुरित आलू में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो सेहत पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। ये आलू खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा हो सकता है।
अंकुरित आलू में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो सेहत पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। ये आलू खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा हो सकता है।

ब्लड शुगर बढ़ाता है आलू

नेशनल कैपिटल पॉयजन सेंटर की रिपोर्ट कहती है, अंकुरित आलू को फेंक देना ही बेहतर है। ज्‍यादातर घरों में आलू को ज्यादा मात्रा में खरीदा जाता है। नतीजा, कुछ दिनों बाद इसमें अंकुरण शुरू हो जाता है, लेकिन लोग इसे नजर अंदाज करते हुए सब्‍जी में इस्‍तेमाल कर लेते हैं। कभी सोचा है कि ये अंकुरित आलू सेहत के लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह। इस पर नेशनल कैपिटल पॉइजन सेंटर का कहना है, अगर घर में रखे आलू अंकुरित हैं तो इन्हें फेंक देना ही बेहतर है। ऐसे आलू स्‍वास्‍थ्‍य के लिए सही नहीं होते। अंकुरित आलू जहरीला बन जाता है। नेशनल कैपिटल पॉइजन सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक, आलू में प्राकृतिक तौर पर कुछ जहरीले तत्‍व जैसे- सोलेनिन और चाकोनाइन होते हैं। हालांकि, ये इसमें काफी कम मात्रा में पाए जाते हैं, लेकिन इसके पौधे और पत्‍त‍ियों में अध‍िक मात्रा में मौजूद होता है। इसलिए जैसे-जैसे आलू अंकुरित होना शुरू होता है, वैसे-वैसे इसमें दोनों जहरीले तत्‍वों की मात्रा में बढ़ने लगती है। इसलिए ऐसे आलू को किसी भी रूप में खाने पर शरीर में वो तत्‍व पहुंचने लगते हैं। रिपोर्ट कहती है, एक या दो बार ऐसे आलू खाने से ज्‍यादा नुकसान नहीं होता, लेकिन लगातार ऐसे ही आलू का बना खाना खा रहे हैं तो कई तरह की दिक्‍कतें हो सकती हैं, खासतौर पर पेट से जुड़ी।

ऐसे लक्षण दिख सकते हैं

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आलू के जहरीले तत्‍व शरीर में ज्यादा मात्रा में पहुंचने लगते हैं तो कई तरह के लक्षण दिखते हैं। जैसे- उल्‍टी होना, डायरिया होना और पेट में दर्द होना। कुछ लोगों में इसके लक्षण हल्‍के और कुछ में ये लक्षण गंभीर रूप ले सकते हैं। हालत ज्‍यादा गंभीर होने की स्थिति में ब्‍लड प्रेशर लो होना, बुखार और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखते हैं। अगर सही समय पर इसे नहीं रोका गया तो मौत भी हो सकती है। इसलिए अलर्ट रहें।

आलू के जहरीले तत्‍व शरीर में पहुंचने लगते हैं तो उल्‍टी, डायरिया,पेट में दर्द होता है।
आलू के जहरीले तत्‍व शरीर में पहुंचने लगते हैं तो उल्‍टी, डायरिया,पेट में दर्द होता है।

आलू को अंकुरित होने से ऐसे रोकें

  • आलू में हरा रंग दिख रहा है या पहले से कहीं पर अंकुरण हो रहा है तो उसे निकाल दें।
  • आलू को ऐसी जगह रखें जहां पर सूरज की किरणें न पहुंचें और न ही वो बहुत ठंडी जगह हो।
  • इसे स्‍टोर करते समय हमेशा प्‍याज जैसी सब्जियों से अलग रखें, क्‍योंकि ये गैस छोड़ती हैं, जिससे आलू में अंकुरण शुरू हो सकता है।
  • ज्यादा आलू खरीदा है तो इसे कॉटन के बैग में रख सकते हैं। बैग ऐसा होना चाहिए, जिसमें से हवा पास हो सके।
  • आलू से अंकुरित वाला हिस्‍सा अलग किया है तो उसे बगीचे में लगाकर आलू के पौधे उगा सकते हैं।

डिस्क्लेमर- इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीकों और दावों को सिर्फ सलाह के तौर पर लें, हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं । इस तरह के किसी भी इलाज और डाइट और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।