खड़े होकर पानी पीते हैं तो किडनी होगी खराब:लिवर पर पड़ेगा असर, दिल की बीमारियां भी घर कर लेंगी

3 महीने पहले
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खड़े होकर पानी पीते हैं, चलते-चलते मुंह से बोतल लगाया और गटक लिया...ऐसा करते हैं तो अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। क्या आपने बड़े-बुजुर्गों की बातों पर ध्यान दिया है जब वो खड़े होकर पानी पीने पर टोक देते हैं। ऐसा इसलिए कि यह सही तरीका नहीं है।

आयुर्वेद में भी कहा गया है कि जैसे जमीन पर पालथी मार कर भोजन करना बेहतर होता है वैसे ही पानी भी बैठकर पीना चाहिए। इससे पानी शरीर के सभी अंगों में पहुंचता है। जो भोजन हम करते हैं वो पचने में सहायक होता है। बॉडी से जहरीले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। रांची स्थित आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. सुदामा प्रसाद बताते हैं कि वास्तव में अधिकतर लोग जब प्यास लगती है तब यह नहीं देखते कि पानी कैसे पी रहे हैं खड़े हैं या बैठे हैं।

खड़े होकर पानी पीना यानी कई बीमारियों को दावत देना है। ऐसी स्थिति में पानी उन अंगों तक नहीं पहुंचता जहां उसे जाना चाहिए। यानी किडनी और ब्लॉडर से जिन वेस्ट को फिल्टर कर बाहर निकलना चाहिए, नहीं निकल पाता। ऐसे लोगों में किडनी स्टोन की परेशानी अधिक देखने को मिलती है।

ऑक्सीजन लेवल होता है कम

खड़े होकर पानी पीने से फूड कैनल से पानी तेजी से पेट के निचले हिस्से पर गिरता है। यह पेट की भीतरी दीवारों को नुकसान पहुंचाता है। साथ ही आसपास के अंगों को भी चोट पहुंचती है। इससे पाचन तंत्र में गड़बड़ी होती है। ऑक्सीजन लेवल भी डिस्टर्ब होता है। लंग्स और हार्ट भी इसके कारण प्रभावित होता है।

इलेक्ट्रोलाइटि्स नहीं रहता बैलेंस

हमारी बॉडी का 70 प्रतिशत पानी है। ऐसा माना जाता है कि जब हम खड़े होकर पानी पीते हैं तो इलेक्ट्रोलाइटिस भी बैलेंस नहीं रह पाते। अचानक से अधिक मात्रा में पानी पी लेने से सोडियम लेवल भी घट जाता है। जिससे कई तरह की परेशानी शुरू हो जाती है जैसे सिर भारी होना, चक्कर आना, दौरे पड़ना, मांसपेशियों में ऐंठन आदि। कई लोगों को जोड़े में दर्द भी होने लगता है।

पानी में होती है जीरो कैलोरी

पानी जिसमें जीरो कैलोरी होती है हमारे वजन को स्थिर रखता है। जब बैठ कर थोड़ा-थोड़ा पानी शरीर के भीतर जाता है तो सारे अंग एक्टिव हो जाते हैं। माना जाता है कि जब खड़े होकर पानी पीते हैं तो प्यास नहीं बुझती। और पानी पीने की इच्छा होती है। मशहूर कुंडलिनी योग टीचर बिजय जे आनंद कहते हैं 'ड्रिंक योर फूड एंड इट योर वाटर'। यानी पानी को थोड़ा-थोड़ा करके धीरे-धीरे पीना ही सेहत के लिए अच्छा होता है।

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