AC में घंटों रहे तो आंखें हो जाएंगी खराब:ड्राई आई सिंड्रोम से हो सकते हैं पीड़ित, फंगल इंफेक्शन से कॉर्निया के अल्सर का भी खतरा

नई दिल्ली2 महीने पहले
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गर्मी में कूल रहने के लिए घरों व ऑफिस में धड़ल्ले से एयर कंडीशनर और कूलर चल रहे हैं। 15-16 घंटे तक हम एसी कमरों में रहते हैं। इसमें कृत्रिम रूप से बाहर के मुकाबले कमरे का टेंपरेचर कम होता है जिसका हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है खासकर आंखों पर। इससे ड्राई आई सिंड्रोम से पीड़ित हो सकते हैं। आंखों में जलन, इचिंग, चुभना आदि इसके लक्षण हैं। वहीं कॉर्निया के अल्सर का भी खतरा होता है।

रांची सदर अस्पताल के ऑप्थैलमोलॉजिस्ट डॉ. वत्सल लाल बताते हैं कि एयर कंडीशनर में लंबे समय तक बैठना या काम करना सेहत के लिए ठीक नहीं है। एसी कमरे में नेचुरल टेंपरेचर नहीं होता। नतीजा स्किन, आई सहित कई अंग प्रभावित होते हैं।

एसी कमरों में खासकर जब तापमान काफी कम हो जाए तब ह्यूमिडिटी घट जाती है। यानी हवा में नमी नहीं रहती। हवा बिल्कुल ड्राई हो जाती है। इससे माइबोमी ग्लैंड से ऑयल कम निकलता है जिससे आंखें तेजी से ड्राई होने लगती हैं। तब आंखें गड़ने लगती हैं। कई बार खुजलाहट होती है। रेगुलर एसी में रहने से आंखें लाल भी हो जाती हैं।

रेगुलर कराएं एसी का मेंटेनेंस

यही नहीं, एसी का मेंटेनेंस भी रेगुलर होना चाहिए। मेंटेनेंस नहीं होने से बैक्टीरिया या फंगस भी एसी में होने लगते हैं। इसके कारण भी आंखों में इंफेक्शन हो सकता है। इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

दूसरी बीमारियों का भी खतरा

केवल आंख ही नहीं, एसी में लगातार रहने से एलर्जी हो सकती है। साथ ही ओस्टियोपोरोसिस की भी शिकायत होती है। खासकर बुजुर्ग महिलाओं में। आरकेएलसी मेट्रो हॉस्पिटल शादीपुर दिल्ली के डॉ. राकेश कुमार यादव कहते हैं रेगुलर एसी में बैठने से सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। अस्थमा रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। वहीं जिन्हें लंग्स में इंफेक्शन है उनके लिए यह घातक होता है।

नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडीफायर का इस्तेमाल

आजकल घर या ऑफिस में नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडीफायर का प्रयोग बढ़ा है। चूंकि एसी से एयर ड्राई हो जाती है। ऐसे में ह्यूमिडीफायर से हवा में नमी बढ़ जाती है। केवल गर्मी ही नहीं ठंड के दिनों में इसका इस्तेमाल सेहत के लिए ठीक होता है। इससे होंठ नहीं फटते। स्किन ड्राई नहीं होती, न ही बाल रुखे होते हैं।