मां बनने की तैयारी:नॉर्मल डिलीवरी ही होगी, आयुर्वेदाचार्य बता रहे हैं महिलाएं ऐसे करें तैयारी

एक वर्ष पहलेलेखक: कमला बडोनी
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सीजेरियन डिलीवरी के मामले इतने बढ़ रहे हैं कि महिलाओं को ये समझ नहीं आता कि उनकी नॉर्मल डिलीवरी होगी या सीसेशन (सीजेरियन)। डॉ. राहूल मारवाह, एमडी आयुर्वेद, फाउंडर वेदा हेल्थब्लिस आयुर्वेदा, मुंबई बता रहे हैं कुछ तैयारियां जिन्हें करके महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है।

क्यों होती है सीजेरियन डिलीवरी?

डॉ. राहूल के अनुसार, सीसेशन डिलीवरी का मुख्य कारण महिलाओं की गलत लाइफस्टाइल है। आजकल छोटी लड़कियों में भी पीसीओडी की समस्या देखने को मिल रही है, जिसकी वजह से उनके पीरियड्स रेगुलर नहीं रहते और आगे चलकर उन्हें मां बनने में भी दिक्कत होती है। लड़कियों में बढ़ता मोटापा पीसीओडी का एक प्रमुख कारण है। महिलाओं में अब स्मोकिंग, ड्रिंकिंग की आदतें भी बढ़ने लगी हैं, जिसकी वजह से उनके मां की संभावना कम होती है। तनाव भी मां बनने में रुकावट पैदा करता है। इसके अलावा महिलाओं की फिजिकल एक्टिविटीज बहुत कम हो गई हैं, ऐसे में स्टिफ मसल्स के कारण भी महिलाओं का शरीर नॉर्मल डिलीवरी के लिए तैयार नहीं हो पाता। पेरेंट्स को चाहिए कि वो बचपन से बेटी को स्पोर्ट्स या किसी भी शारीरिक गतिविधि में बीजी रखें। इससे उसकी मसल्स मजबूत होंगी, मोटापा नहीं बढ़ेगा और आगे चलकर वह हेल्दी बच्चे को जन्म दे सकेगी। साथ ही बच्चों को घर का स्वस्थ और पौष्टिक खाना खाने की आदत सिखाएं, ताकि आगे भी उनकी यही आदत बनी रहे और वो जंक फूड, सिगरेट, शराब से दूर रहें।

ऐसे होगी नॉर्मल डिलीवरी

आजकल के युवा पेरेंट्स बनने की जिम्मेदारी से डरते हैं और इस डर का असर महिला की प्रेग्नेंसी पर भी पड़ता है। हमारे पास ऐसे कपल्स आते हैं, जिनमें फिजिकली कोई कमी नहीं होती, लेकिन तनाव के कारण वो पेरेंट्स नहीं बन पाते। ऐसे कपल्स को काउंसलिंग की जरूरत पड़ती है।

पहले मानसिक तैयारी करें

सबसे पहले खुद को इस बात के लिए तैयार करें कि आप स्वस्थ बच्चे को जन्म देने जा रहे हैं और इसके लिए आप पूरी तरह से तैयार हैं। दूसरों की देखादेखी करने की बजाय अपनी प्लानिंग पर ध्यान दें। ऐसे लोगों के साथ रहें जो अच्छे पेरेंट्स हैं और अपनी इस जिम्मेदारी को बहुत अच्छी तरह निभा रहे हैं। मानसिक रूप से तैयार होने के बाद ही बेबी प्लान करें।

क्रेविंग को समझें

महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान मीठा या चटपटा खाने की इच्छा होती है और इस समय कई महिलाएं चॉकलेट, चायनीज, पिज्जा जैसी अनहेल्दी चीजें खा लेती हैं, जिससे शरीर में वाटर रिटेंशन बढ़ने लगता है। इस समय महिला को हेल्दी ऑप्शन दिया जाए तो उसकी प्रेग्नेंसी में बहुत फायदा होगा। महिलाओं को प्रेग्नेंसी में होने वाली क्रेविंग को समझने की जरूरत है। आजकल के युवाओं को मीठा खाने का मन करे, तो उन्हें चॉकलेट ही याद आती है और चटपटा खाना हो तो उन्हें पिज्जा-बर्गर खाने की इच्छा होने लगती है, इसीलिए महिलाएं प्रेग्नेंसी में भी ऐसी ही डिमांड करने लगती हैं, लेकिन इस समय उन्हें हेल्दी ऑप्शन देकर उनकी प्रेग्नेंसी को आसान बनाया जा सकता है। प्रेग्नेंसी में जरूरत से ज्यादा खाने से मोटापा और वाटर रिटेंशन बढ़ता है, जिससे सिजेरियन डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है।

योग व मेडिटेशन करें

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं वजन तो बढ़ा लेती हैं, लेकिन फिजिकल एक्टिविटीज पर ध्यान नहीं देतीं। इसकी वजह से नॉर्मल डिलीवरी में तकलीफ होती है। खुद को शारीरिक व मानसिक रूप से मां बनने के लिए तैयार करने के लिए अपने शरीर का ध्यान रखें, अपने लिए समय निकालें। प्रेग्नेंसी के दौरान खुद को शांत और फ्लेक्सिबल रखने के लिए नियमित रूप से योग व मेडिटेशन करें।

ऑयल मसाज भी जरूरी है

प्रेग्नेंसी के दौरान वजन बढ़ने के कारण महिलाओं मसल्स स्टिफ हो जाती हैं, जिसकी वजह से वे नॉर्मल डिलीवरी का प्रेशर सहन नहीं कर पातीं, इसलिए उन्हें फिजिकली एक्टिव रहना चाहिए। साथ ही उन्हें लोवर बैक, जांघों का मसाज भी करना चाहिए, ताकि वो नॉर्मल डिलीवरी के लिए तैयार हो सकें।

नॉर्मल डिलीवरी बच्चे के लिए सही है

ये बात रिसर्च से साबित हो चुकी है कि नॉर्मल डिलीवरी से पैदा होने वाले बच्चे सिजेरियन बच्चों के मुकाबले शारीरिक और मानसिक रूप से ज्यादा स्वस्थ होते हैं। नॉर्मल डिलवरी के दौरान बच्चा जो संघर्ष करता है, उससे उसकी इम्युनिटी बहुत बढ़ जाती है और वह मानसिक रूप से भी मजबूत बनता है।

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