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बात दिमागी सेहत की:बच्चे में बढ़ रहा तनाव तो घबराएं नहीं पैरेंट्स, तीन बातों का रखें ख्याल, दोस्त बनकर जानें दिल के राज

6 दिन पहले
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अगर आपने भी अपने बच्चे को गुमसुम, अकेला या परेशान देखा है तो घबराने की जरूरत नहीं है। बच्चों के ऐसे बिहेवियर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। संभव है कि वे स्कूल लाइफ और फ्रेंड्स के पीयर प्रेशर के कारण परेशान हों या फिर घर में हुए बदलाव उन्हें इस तरफ धकेल रहे हों। हां, पैरेंट्स होने के नाते आपको ये ध्यान देने की जरूरत है कि आपके बच्चे में क्या बदलाव आ रहे हैं। बच्चों को इस फेज से बाहर निकालने में गार्जियन का रवैया और सपोर्ट बहुत मायने रखता है, क्योंकि बड़ों के व्यवहार को ही बच्चे अपनी जिंदगी में अपनाते हैं। ऐसे फेज में पहुंचे बच्चों के साथ माता-पिता को किस तरह डील करना चाहिए, आइए समझते हैं।

सिम्बॉलिक फोटो
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घर का माहौल बनाए रखें पॉजिटिव
बच्चों को टेंशन से निकालने में पैरेंट्स की अहम भूमिका होती है। साइकाइट्रिस्ट डॉ. अभिनव तिवारी कहते हैं कि घर का माहौल अगर अच्छा है तो बच्चों को तनाव से बाहर निकलने में मदद मिलती है। घर का माहौल पॉजिटिव है तो बच्चे खुद घर के बड़ों से अपनी परेशानी शेयर करते हैं। अगर बच्चों को लगेगा कि उनके पैंरेट्स खुद टेंशन में हैं या बिजी हैं तो बच्चे उनसे बात करने से कतराते हैं। बच्चों को पॉजिटिव फील कराने के लिए आप उनके साथ मिलकर प्रार्थना कर सकते हैं या फिर वीकेंड पर पिकनिक पर या बाहर घूमने जा सकते हैं।

अगर हॉबीज छोड़ रहा है बच्चा तो ध्यान दें
बच्चे में क्या काबिलियत है ये उसके माता-पिता से बेहतर और कोई नहीं जान सकता। अगर बच्चा अपनी हॉबीज को फॉलो नहीं कर रहा है तो आपको इस ओर ध्यान देना चाहिए। टेंशन में बच्चे अक्सर अपने फेवरेट गेम्स, हॉबीज भी छोड़ देते हैं। अगर ऐसा दिखे तो उसे अपनी हॉबीज फॉलो करने के लिए मोटिवेट करें। उसके साथ खेलने के लिए थोड़ा समय निकालें। उसे एक्सरसाइज करने के लिए भी मॉटिवेट करें ताकि बच्चे के अंदर अच्छे भाव पैदा हों। बच्चा अगर अपनी परेशानी के बारे में बात नहीं करना चाहता तो उस पर प्रेशर न बनाएं, बल्कि उसे पेंटिंग करने या किसी भी टॉपिक पर लिखने के लिए कहें। इससे भी आप अंदाजा लगा सकेंगे कि वह परेशान है या नहीं।

बच्चे से जताएं प्यार, दोस्त बनकर जानें दिल के राज
ऐसे समय में बच्चों के साथ बातचीत करना जरूरी होता है। उन्हें ये अहसास जरूर दिलाएं कि आप उनसे बहुत प्यार करते हैं। उन पर भरोसा करते हैं। बच्चों पर विश्वावस करने से वे आपको दोस्त समझेंगे और दिल की बात कर सकेंगे। हो सकता है कि आपका और उनका रिश्ता खुलकर बातचीत करने के आड़े आ रहा हो। ऐसे में दोस्त बनकर उनके दिल के राज जान सकते हैं। उनकी परेशानी को छोटा समझकर किनारे न करें, बल्कि उन्हें हर चुनौती से लड़ने की सीख दें। आप उन्हें अपनी जिंदगी के उदाहरण देकर भी समझा सकते हैं।

सिम्बॉलिक फोटो
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क्यों ऐसा फील करने लगते हैं बच्चे?
1 - पढ़ाई में परफार्मेंस का प्रेशर
2 - स्कूल के अलावा ज्यादा एक्टिविटी क्लासेस करने से थकान
3 - बुलिंग का शिकार होना
4 - दोस्ती में दिक्कतें आना
5 - माता-पिता का अलग होना या परिवार में किसी तरह का बदलाव आना

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ऐसे पता करें कि आपका बच्चा तनाव में है या नहीं
अगर बच्चा तनाव महसूस कर रहा है तो जाहिर सी बात है कि उसके व्यवहार में काफी बदलाव दिखाई देगा। पढ़िए तनाव होने पर बच्चों में किस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं।

व्यवहार में बदलाव - पढ़ाई में ध्यान न लगना, स्कूल में दिक्कत होना, ज्यादा घबराना व चिड़चिड़ापन और पेरेंट्स की बात मानने से इनकार करना।

इमोशनल बदलाव - ज्यादा गुस्सा करना, डरावने सपने आना, घर के लोगों से दूर भागना और जल्दी रोना।

फिजिकल बदलाव - पेट में अचानक दर्द होना, सिर दर्द रहना या माइग्रेन की परेशानी, नाखून चबाना और ठीक से नहीं सोना।

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