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दिमागी उथल-पुथल:फिल्म में दिखाई गई दिमागी बीमारी क्या है? जिसकी वजह से सारा अली खान को खानी पड़ी मार

6 महीने पहलेलेखक: श्वेता कुमारी
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हाल ही में ओटीटी प्लेटफार्म हॉटस्टार पर एक फिल्म आई जिसका नाम है अतरंगी रे। ये फिल्म हॉटस्टार पर बॉलीवुड की अब तक सबसे ज्यादा देखे जाने वाली फिल्म बन चुकी है। इस फिल्म की हीरोइन एक मेंटल प्रॉब्लम से जूझ रही है। उसकी कल्पना में ही एक शख्स है, जिससे वो बहुत प्यार करती है। लेकिन असल जिंदगी में वैसा ही कोई आदमी है ही नहीं। कहानी में हीरोइन बार बार एक लड़के के साथ भागती है, लेकिन हर बार घर वाले उसे पकड़ लेते हैं। इसकी वजह से घर वाले उसकी पिटाई भी करते हैं। इस दिमागी वहम को पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) कहते हैं। इस दिमागी बीमारी की क्या वजह है, जानिए अपोलो हॉस्पिटल के साइकेट्रिस्ट डॉ. संदीप वोहरा से।

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर क्यों होता है?

कोई भी व्यक्ति इस मानसिक बीमारी का शिकार तभी होता है, जब वो किसी गहरे सदमे में हो। आंखों के सामने किसी बड़े हादसे का होना, किसी नजदीकी को अचानक खोना या मृत्यु का पास से छू कर गुजरना आदि। बुरी घटनाएं जो जीवन में अचानक घटती है और व्यक्ति को हक्का-बक्का कर देती है, ऐसी स्थिति से जूझने वाला व्यक्ति इस डिसऑर्डर का शिकार हो सकता है। महिलाएं पुरुषों से ज्यादा सेंसिटिव और इमोशनल होती हैं, इसलिए किसी दुर्घटना का उनकी आंखों के सामने अचानक होना उनमें पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर पैदा कर देता है। महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले ये डिसऑर्डर ज्यादा देखने को मिलता है।

कौन हो सकते हैं इसका शिकार?

डॉ. वोहरा कहते हैं कि इस डिसऑर्डर का शिकार किसी हादसे का सर्वाइवर या फिर रेस्क्यू टीम में शामिल व्यक्ति भी हो सकता है। मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले के दौरान आम लोगों से लेकर ऑपरेशन में शामिल अलग-अलग टीम के सदस्यों तक में यह डिसऑर्डर देखा गया। वहीं, कोविड के दौरान बढ़ते मृत्यु दर के आंकड़े देखने वाले फ्रंटलाइन वर्कर्स भी इस डिसऑर्डर का शिकार हुए। इन दो उदाहरणों से समझ आता है कि बड़ी त्रासदी देखने वाला व्यक्ति पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर की चपेट में आ सकता है।

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर पर एक्सपर्ट की राय।
पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर पर एक्सपर्ट की राय।

इसके लक्षण क्या होते हैं?

  • व्यक्ति को घटना बार-बार याद आती है। उसे लगता है कि उसकी आंखों के सामने वह चीज लगातार घट रही है।
  • पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर की वजह से नींद भी प्रभावित होती है।
  • लोगों में घबराहट और एंग्जायटी के लक्षण दिख सकते हैं।
  • इस डिसऑर्डर की वजह से व्यक्ति स्ट्रेस में चला जाता है।

किनसे बचना शुरू कर देता है पीड़ित?

डॉ. वोहरा बताते हैं कि अगर कोई शख्स, एयर क्रेश सर्वाइवर है और पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर से गुजर रहा है, तो वह व्यक्ति हादसे से जुड़ी हर बात से दूरी बनाएगा। वो एयरपोर्ट जाने से बचेगा। हादसे से जुड़ी बातें पढ़ने-सुनने से बचेगा। रेस्क्यू ऑपरेशन में पहने जाने वाले कपड़ों से भी वह डरेगा। वो ऐसे मिलते-जुलते कपड़े पहने हुए लोगों से भी बचना चाहेगा।

बीमारी का इलाज क्या है?

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर पर डॉक्टर कहते हैं कि इसकी पहचान जितनी जल्दी की जा सकेगी, ट्रीटमेंट उतनी ही जल्दी शुरू होगा। इसके अलावा पेशेंट को मिलने वाला सोशल सपोर्ट, उसकी फैमिली लाइफ भी उसके ट्रीटमेंट के लिए मायने रखती है। व्यक्ति किसी तरह के नशा का आदी न हो और सही डॉक्टर से इलाज कराने पर जल्दी ठीक हो सकता है।