प्रेग्नेंसी प्लानिंग:30 की उम्र के बाद कर रही हैं मां बनने की तैयारी, तो डॉक्टर्स से करें इन टेस्ट पर बात

4 महीने पहलेलेखक: श्वेता कुमारी
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मां बनना एक सुखद एहसास है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। करिअर को ध्यान में रखते हुए महिलाएं मां बनने का फैसला भी सोच-समझकर लेती हैं। वर्किंग वुमन मां तो बनना चाहती हैं, लेकिन इसमें वो किसी तरह की जल्दबाजी करने से बचती हैं। चूंकि अब महिलाएं समझदार और इंडिपेंडेंट हो चली हैं, इसलिए प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले बच्चे के सुरक्षित भविष्य को सोचते हुए वे प्लानिंग में देरी कर जाती हैं। 30 की उम्र के बाद बेबी प्लान करने से पहले महिला को किन जरूरी टेस्ट से गुजरना चाहिए, बता रही हैं मुंबई की कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. वैशाली जोशी।

इन टेस्ट से होगी प्रेग्नेंसी में खतरे की चिंता दूर

एंटी मुलेरियन हॉर्मोन टेस्ट - एएमएच टेस्ट के जरिए ओवरी में एग की स्थिति का पता लगाया जाता है। इस टेस्ट से गुजरकर महिलाएं अपने फर्टिलिटी लेवल की जानकारी हासिल करती हैं।

पैप स्मीयर - यह टेस्ट सर्वाइकल कैंसर को जांचने के लिए होता है। डॉ. जोशी के मुताबिक, 25 साल की उम्र के बाद हर महिला को तीन साल के अंतर पर यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। प्रेग्नेंसी प्लान करने के पहले इस टेस्ट से सुनिश्चित किया जाता है कि मां बनने के लिए शरीर स्वस्थ और तैयार है भी अथवा नहीं।

एनीमिया टेस्ट - महिलाओं में यह सबसे आम समस्या है। प्रेग्नेंसी से पहले ही यह टेस्ट करवा लेने से इस बात का पता चल जाएगा कि शरीर में ब्लड की कमी तो नहीं है। अगर खून की कमी है, तो हेल्दी डाइट अपनाकर एनीमिया से बच सकेंगी और प्रेग्नेंसी में किसी तरह के कॉम्प्लीकेशंस का खतरा नहीं रहेगा।

ब्लड शुगर टेस्ट - फास्टिंग में और खाने के बाद ये टेस्ट जरूर करवा लें। चूंकि, प्रेग्नेंसी में होने वाली मां के डायबिटिक होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में, अगर आप पहले ही ब्लड शुगर टेस्ट करवा लेती हैं और शरीर में ब्लड शुगर बढ़ा हुआ मिलता है, तो डाइट में सुधार करते हुए प्रेग्नेंट होने के पहले इसे कंट्रोल कर सकती हैं।

प्रेग्नेंसी से जुड़े टेस्ट करवाना मां और बच्चे दोनों के लिए जरूरी है।
प्रेग्नेंसी से जुड़े टेस्ट करवाना मां और बच्चे दोनों के लिए जरूरी है।

थायरॉयड टेस्ट - हार्मोनल इमबैलेंस की वजह से महिलाएं थायरॉयड से खास तौर पर प्रभावित होती हैं। ऐसे में प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले इस टेस्ट को जरूर करवा लें। अगर मां इससे पीड़ित हैं, तो समय रहते इसे बढ़ने से कंट्रोल किया जा सके और वो सारे जरूरी कदम उठाए जा सकें, जिससे बच्चे पर इसका प्रभाव न पड़े।

वेट चेक करवाएं - प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, तो वेट पर भी ध्यान दें। अगर डॉक्टर आपको अंडर या ओवर वेट बताते हैं, तो सबसे पहले उसमें सुधार लाने का काम करें, ताकि प्रेग्नेंसी किसी भी तरह जटिल न रहे।

थैलेसीमिया स्क्रीनिंग टेस्ट - इसे हीमोग्लोबिन ए-2 टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है। इस टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जाता है कि कहीं मां थैलेसीमिया पॉजिटिव तो नहीं है। अगर ऐसा होता है, तो बच्चे को भी इस जानलेवा जेनेटिक बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि होने वाले बच्चे के लिए मां के अलावा पिता भी इसके कैरियर हो सकते हैं। इसलिए दोनों ही पेरेंट्स का ये टेस्ट करवाना जरूरी है।

रूबेला एंटीबॉडी - इसे जर्मन मीजल्स या खसरा के नाम से भी जाना जाता है। अगर प्रेग्नेंसी के दौरान मीजल्स हो जाए, तो इससे बच्चे में कई शारीरिक विकृतियां होने का खतरा बना रहता है। इसकी वजह से डॉक्टर्स एबॉर्शन करने की सलाह देते हैं। वैक्सीन लेने के एक महीने बाद तक प्रेग्नेंसी प्लान को रोकना बेहतर माना जाता है।

क्यों जरूरी है टेस्ट?

डॉ. जोशी के मुताबिक, पढ़ाई, जॉब, लव लाइफ को टाइम और फिर फ्यूचर सिक्योर करने की वजह से लड़कियां फैमिली प्लानिंग की सोच तक पहुंचते-पहुंचते अक्सर 30 साल की उम्र पार कर जाती हैं। हालांकि इस उम्र के बाद शुरुआती समय (अर्ली 30) में प्रेग्नेंट होने को लेकर चिंता की कोई बात नहीं होती। लेकिन हेल्दी प्रेग्नेंसी और स्वस्थ बच्चे के लिए कुछ जरूरी टेस्ट करवा लें, जिससे इस बात का पता रहे कि मां पूरी तरह स्वस्थ है और एक हेल्दी बच्चे को जन्म दे सकती है।