बोतल में पानी नहीं, प्लास्टिक पी रहे:ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, समय पर न आए पीरियड्स तो हो जाएं अलर्ट, हार्मोन में भी होते हैं बदलाव

2 महीने पहले
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बोतलबंद पानी सेहत के लिए ठीक नहीं। गर्मियों में तो यह और नुकसानदेह है। अभी धड़ल्ले से पानी के जार का इस्तेमाल किया जा रहा है। तापमान अधिक होने की वजह से पानी में माइक्रो प्लास्टिक मिल जाते हैं। लंबे समय तक इसका इस्तेमाल किया जाए तो ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। महिलाओं का रिप्रोडक्टिव सिस्टम भी प्रभावित हो सकता है।

एंडोक्राइनोलॉजिस्ट का कहना है कि माइक्रो प्लास्टिक के कई दुष्परिणाम होते हैं। इससे हार्मोन के ग्रोथ पर बुरा असर पड़ता है। जिन्हें थॉयराइड होता है उनकी परेशानी बढ़ जाती है। दरअसल, ये माइक्रो प्लास्टिक इतने सुक्ष्म होते हैं कि इन्हें नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता। ये बॉडी के टीश्यूज, ब्लड और दूसरे अंगों में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं।

यही नहीं प्रेगनेंट महिला से उसके नवजात में भी ये माइक्रो प्लास्टिक चले जाते हैं। शोध में यह भी पाया गया है कि माइक्रो प्लास्टिक के कारण पीरियड्स भी समय पर नहीं आते।

लखनऊ स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टोक्सिकोलॉजी रिसर्च में माइक्रो प्लास्टिक पर काफी शोध हुए हैं। इसकी थ्योरी दूसरे संस्थाओं के मुकाबले अलग है। बताया गया है कि गर्म मौसम के कारण बोतल या जार से प्लास्टिक निकल कर पानी में घुल जाए, ऐसा प्रमाणित नहीं हो पाया है।

हालांकि महत्वपूर्ण वे सोर्स हैं जहां का पानी इन बोतलों में भरा गया है। यदि सोर्स ही प्रदूषित हों तो फिर बोतल में जो हम पानी पी रहे हैं वो निश्चित रूप से ठीक नहीं होगा। जैसे नदियों में गिरने वाले शहर के कचरा में प्लास्टिक कचरा भी होता है।

लंबे समय तक पानी में रहने पर ये प्लास्टिक छोटे मोलिक्यूल्स में टूट जाते हैं। उन जगहों से जब पानी को प्लांट में लाया जाता है तो प्यूरिफाई करने पर भी माइक्रो प्लास्टिक हटते नहीं हैं। ऐसे पानी को पीना हेल्थ के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

भूल कर भी नहीं पीएं पानी का पाउच

राह चलते प्यास लगने पर लोग पानी का पाउच खरीद लेते हैं। पांच-दस रुपये में मिलने वाला पाउच खराब प्लास्टिक का बना होता है। जबकि भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार, पाउच बनाने में कई तरह की गाइडलाइंस का पालन करना होता है। आइस 14543 स्टैंडर्ड के तहत पाउच के लिए पॉलिइथिलीन फ्लेक्सिबल फिल्म का इस्तेमाल होना चाहिए। आमतौर पर प्लास्टिक निर्माता ऐसा नहीं करते।

नहीं पता होता मिनरल वाटर पी रहे या पैकेज्ड वाटर

बाजार में मिलने वाला पैकेज्ड वाटर है या मिनरल वाटर, ये लोगों को पता नहीं होता। उन्हें बस प्यास बुझाने से मतलब रहती है। पानी की बोतल खरीदी और पी लिया। दरअसल, पैकेज्ड वाटर पानी का कोई भी सामान्य स्रोत हो सकता है जैसे सतह का जल, ग्राउंड वाटर, नदी आदि। लेकिन मिनरल वाटर सिर्फ झरने वाली जगह का ही होता है। कई कंपनियों की बोतल पर यह लिखा रहता है।

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