सेक्स चेंज-तन तो बदल जाता है, पर मन का क्या:लिंग परिवर्तन में जान का जोखिम, मर्द से औरत बनना इतना भी आसान नहीं

नई दिल्लीएक वर्ष पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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कुछ दिन पहले आंध्र प्रदेश में एक लड़के की सेक्स चेंज सर्जरी के दौरान मौत हो गई। यह सर्जरी बीफार्मा के दो स्टूडेंट्स यू-ट्यूब की मदद से कर रहे थे। इस तरह की सर्जरी कब कराई जाती है, क्या इससे तन और मन दोनों को खतरा रहता है।

ग्लोबल मार्केट इनसाइट की एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रांसजेंडर मुद्दों पर बढ़ती जागरूकता की वजह से जेंडर चेंज के मामले बढे़ हैं। इसके अलावा इस तरह के सर्जिकल सेंटर्स बढ़ने की वजह से भी जेंडर चेंज सर्जरी में तेजी आई है।
ग्लोबल मार्केट इनसाइट की एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रांसजेंडर मुद्दों पर बढ़ती जागरूकता की वजह से जेंडर चेंज के मामले बढे़ हैं। इसके अलावा इस तरह के सर्जिकल सेंटर्स बढ़ने की वजह से भी जेंडर चेंज सर्जरी में तेजी आई है।

नए शरीर के प्रति क्यों लालायित रहते हैं स्त्री-पुरुष
जब किसी पुरुष को यह लगता हो कि उसका शरीर मर्द का है, लेकिन वह खुद को महिला जैसा महसूस करता है, तो वह सेक्स चेंज सर्जरी की मदद लेता है। ऐसी सर्जरी की इच्छुक ज्यादातर महिलाएं भी इसी स्थिति में ही सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी की मदद लेती हैं।

साइकेट्रिस्ट डॉ. ज्योति कपूर के अनुसार, ऐसी सर्जरी के पहले काउंसलिंग बेहद जरूरी होती है। यह काउंसलिंग लंबी चलती है और इसमें साइकेट्रिस्ट यह जानने की कोशिश करते हैं कि व्यक्ति आवेश में आकर या भावना में बहकर तो ऐसे निर्णय तो नहीं ले रहा है।

जर्मनी में लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर को लेकर कानून में आए बदलाव की वजह से पूरे यूरोप में यहां का सेक्स चेंज सर्जरी का मार्केट सबसे बड़ा माना जाता है।
जर्मनी में लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर को लेकर कानून में आए बदलाव की वजह से पूरे यूरोप में यहां का सेक्स चेंज सर्जरी का मार्केट सबसे बड़ा माना जाता है।

किस तरह से शरीर में बदलाव किया जाता है दिल्ली के एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल के प्लास्टिक सर्जन डॉ. किरणमोय सारंगी के मुताबिक, “‘सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी’ में पुरुष जननांग को महिला जननांग में बदला जाता है। इसके बाद नया जेनेटेलिया ‘फंक्शन’ और ‘फीचर’ में महिला जननांग जैसा हो जाता है। मतलब यह है कि महिला बन चुका पुरुष की सेक्स लाइफ सामान्य महिलाओं की तरह हो जाती है। लेकिन मेल टू फीमेल बनने की इस सर्जरी के बाद भी वह मां नहीं बना जा सकता है। ऑपरेशन के पहले सेक्स चेंज करने की इच्छा रखने वाले पुरुष को फेमिनाइज़िग हॉर्मोन थेरेपी दी जाती है। इसे इंडोक्राइन हॉरमोन थेरेपी भी कहते हैं। हॉरमोन दिए जाने से पुरुष का शरीर महिला शरीर में बदलने काे तैयार होने लगता है। उसके चेहरे के बालों को कम करने में मदद करता है। कम से कम एक साल तक दो साइकेट्रिस्ट से काउंसलिंग कराई जाती है। प्लास्टिक सर्जन समेत डॉक्टरों की पूरी टीम को जब यह लगता है कि व्यक्ति वाकई शरीर और दिमाग से सेक्स चेंज कराने के लिए तैयार है, तभी सर्जरी की जाती है।

ऑस्ट्रेलिया में मेडिकेयर और हेल्थ इंश्योरेंस कवर की वजह से इस तरह की सर्जरी भी जरूरतमंद लोगों को ऐसी सर्जरी के लिए लुभा रही है।
ऑस्ट्रेलिया में मेडिकेयर और हेल्थ इंश्योरेंस कवर की वजह से इस तरह की सर्जरी भी जरूरतमंद लोगों को ऐसी सर्जरी के लिए लुभा रही है।

लड़के की ठुड्‌डी को लड़की की तरह बनाया जाता है
डॉ. किरणमोय सारंगी के मुताबिक, इस सर्जरी को दो भागों में बांटा जाता है टॉप सर्जरी और बॉटम सर्जरी। पुरुष से महिला बनने की प्रक्रिया में पुरुषों की जबड़ों को महिलाओं की तरह बनाई जाती है। यह टॉप सर्जरी का हिस्सा होती है। ब्रेस्ट इंप्लांट भी टॉप सर्जरी में ही आता है।

वेजाइनोप्लास्टी को बॉटम सर्जरी का हिस्सा माना गया है। महिला से पुरुष बनने की प्रक्रिया में मैस्केटोमी सर्जरी होती है। इस सर्जरी में शरीर से ब्रेस्ट को हटा दिया जाता है। डॉक्टर इस सर्जरी को कराने से पेशेंट से कागजी कार्रवाई पूरी करवाते हैं, क्योंकि इस सर्जरी को दोबारा बदलकर पहले की तरह का शरीर नहीं पाया जा सकता है। यह लगभग असंभव जैसी प्रक्रिया होती है।

नालसा वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया के डिसीजन में लेस्बियन, गे, ट्रांसजेंडर, ट्रांससेक्शुअल, क्वीर कम्युनिटी को थर्ड जेंडर की कैटगरी में डाला गया। साथ ही कहा गया कि इनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
नालसा वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया के डिसीजन में लेस्बियन, गे, ट्रांसजेंडर, ट्रांससेक्शुअल, क्वीर कम्युनिटी को थर्ड जेंडर की कैटगरी में डाला गया। साथ ही कहा गया कि इनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी।

सेक्स में बदलाव का अधिकार यानी राइट ऑफ चॉइस
सुप्रीम कोर्ट के वकील निपुण सक्सेना के अनुसार, “सेक्स चेंज कराना ‘राइट ऑफ चॉइस’ के अंतर्गत आता है। सेक्स में बदलाव की स्वतंत्रता जस्टिस केएस पुट्‌टास्वामी वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया में 11 जजों की खंडपीठ में दी गई। इस अधिकार को ‘राइट ऑफ डिग्निटी’ माना गया। है। यह अधिकार हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जिंदगी जीने का अधिकार देता है। राइट ऑफ डिग्निटी अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत आता है।

कुछ देशों में इंश्योरेंस कवर मिलने की वजह से लोग वहां जाकर सर्जरी कराना चाहते हैं। इससे मरीज का खर्चा कम होता है। साथ ही दूसरे देशों से ऐसी सर्जरी के लिए आने वालों की संख्या बढ़ती है।
कुछ देशों में इंश्योरेंस कवर मिलने की वजह से लोग वहां जाकर सर्जरी कराना चाहते हैं। इससे मरीज का खर्चा कम होता है। साथ ही दूसरे देशों से ऐसी सर्जरी के लिए आने वालों की संख्या बढ़ती है।

थाईलैंड जाते हैं ऐसी सर्जरी कराने, 10 लाख तक का खर्च
भारत में ऐसी सर्जरी पर 4 से 10 लाख रुपए तक का खर्च आता है। अलग-अलग हॉस्पिटल की सुविधा के अनुसार इस सर्जरी के खर्चे में अंतर होता है। इस्तेमाल में लाई जाने वाली चीजों के आधार भी कीमत में फर्क दिखता है जैसे ब्रेस्ट इम्पलांट 30 हजार से लेकर लाख रुपए तक का आता है। कुछ लोग ऐसी सर्जरी के लिए विदेश भी जाते हैं खासकर वे लोग जो इसे छिपाना चाहते हैं।
थाईलैंड ऐसी सर्जरी कराने वालों की पसंदीदा जगह है। इसके अलावा यूके, यूएसए, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस जैसे देशों में भी यह सर्जरी हो रही है।

सेक्स चेंज से संबंधित कानून और सजा
एडवोकेट निपुण सक्सेना के मुताबिक, सेक्स चेंज ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो आईपीसी की 304 ‘ए’ के तहत उस पर केस दर्ज होगा। इस मामले में यह देखा जाता है कि किस तरह की सर्जरी की जा रही थी, इसे कौन कर रहा था, क्या इसमें लापरवाही बरती गई।

अगर लापरवाही साबित हो जाती है, तो मेडिकल नेग्लिजेंस का मामला बनेगा। दो साल की कठोर सजा हो सकती है। किसी पुरुष के साथ जबरदस्ती सेक्स चेंज कराने की प्रक्रिया होती है, तो इसे इमैस्कुलेशन कहते हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 320 के तहत यह दंडनीय अपराध माना जाता है। इसमें सात साल की सजा का प्रावधान है।

पहले पति का जेंडर चेंज कराया, फिर बच्चा नहीं दे सकता कहकर मांगा तलाक

कुछ दिन पहले भोपाल में जेंडर चेंज के एक मामला आया। इसमें पत्नी के कहने पर पति ने जेंडर बदल डाला लेकिन बाद में महिला यह कहकर तलाक मांगने लगी कि पति उसे बच्चा नही दे सकता।

स्टडी के अनुसार कई बार सेक्स चेंज के बाद मरीज को अहसास होता है कि उसने गलती कर दी है। इस तरह के मार्केट को बढ़ रहे जेंडर चेंज मार्केट की राह का पत्थर माना जा रहा है।