लड़के के जन्म का वादा करतीं दगाबाज दवाइयां:सेक्स सिलेक्शन ड्रग्स से बेटा होने का चांस जीरो, बर्थ डिफेक्ट के साथ पैदा होते हैं बच्चे

नई दिल्ली5 दिन पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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  • चूहों पर किया गया सेक्स सिलेक्शन ड्रग्स का टेस्ट, जन्मे विकृत बच्चे
  • इस दवा को खाने के हैं ढेरों टोटके, जैसे- बछड़े वाली गाय के दूध के साथ दवा लेने से होगा बेटा

दो पोतियों की दादी मंजू गुप्ता बेहद खुश हैं, इस बार छोटी बहू को पाेता ही होगा, क्योंकि इस बार बहू ने पूरी प्रेग्नेंसी में ‘सेक्स सेलेक्शन ड्रग्स’ (एसएसडी) ली है। बहू की गोदभराई पर पूरे मोहल्ले में एडवांस में लड्‌डू बंटवाया, मगर मंजू गुप्ता डिलीवरी के दिन मातमी चेहरा लिए बैठी थीं, क्योंकि बहू ने मृत बच्चे को जन्म दिया। एसएसडी के चूरन ने कोई कमाल नहीं दिखाया और उल्टा इसमें मौजूद हानिकारक तत्वों की वजह से बच्चे की जान भी चली गई।

सेक्स सिलेक्शन ड्रग्स का खुलासा होने पर हरियाणा सरकार ने काफी छापे मारे।
सेक्स सिलेक्शन ड्रग्स का खुलासा होने पर हरियाणा सरकार ने काफी छापे मारे।

हरियाणा सरकार की ओर से कराए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं को पहले से बेटी थी, उनमें इन दवाओं के सेवन की संभावना आम महिलाओं की तुलना में 3.5 गुना अधिक थी। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च की डायरेक्टर डॉ. सुतोपा बंदोपाध्याय नियोगी की इसी विषय पर लिखी गई किताब जुलाई 2021 में प्रकाशित हुई, जो काफी चर्चा में है।

एक या दो बेटी के बाद बेटे की चाहत में लेते हैं खतरनाक दवाइयां।
एक या दो बेटी के बाद बेटे की चाहत में लेते हैं खतरनाक दवाइयां।

क्या होती हैं सेक्स सिलेक्शन ड्रग्स?
बेटे को जन्म देने की चाहत रखने वाली महिलाएं इस ड्रग्स को लेती हैं। युवतियां इसे पहली तिमाही में ही लेना शुरू कर देती हैं। डॉ. सुतोपा बी. नियोगी की इन दवाओं पर की गई स्टडी के अनुसार, इनमें कई हानिकारक तत्व होते हैं, जो बच्चे का सेक्स तो नहीं बदलते, लेकिन मां और बच्चे के लिए खतरनाक साबित होते हैं।

नेशनल हेल्थ मिशन हरियाणा के सहयोग से हुई स्टडी में पाया गया कि जन्मजात विकारों और मृत पैदा होने वाले बच्चों का एसएसडी लेने वाली प्रेग्नेंट महिलाओं से सीधा संबंध है। यह पाया गया कि बर्थ डिफेक्ट्स के साथ जन्म लेने वाले 25% बच्चों के केसेज में प्रेग्नेंट औरतों ने एसएसडी को खाया था। वहीं करीब 16% स्टिल बर्थ के मामलों में भी गर्भवती महिलाओं ने एसएसडी की खुराक ली थी। आमतौर पर इन ड्रग्स को लेने वाली मां के बच्चों में ‘क्लेफ्ट लिप’ या ‘पैलेट लिप’, स्पाइना बाइफिडा, क्लब फुट जैसे बर्थ डिफेक्ट देखने को मिलते हैं।

लोगों में लिंग जांच के लिए बने कड़े कानूनों का डर।
लोगों में लिंग जांच के लिए बने कड़े कानूनों का डर।

कैसे बिक रही हैं ये खतरनाक दवाइयां?

अक्सर औरतें ऐसी केमिस्ट शॉप पर जाती हैं, जहां चोरी-छिपे इस तरह की दवाएं बेची जाती हैं। महिलाएं यह रोना रोती हैं कि उनकी केवल बेटियां हैं। उसे बेटे के लिए घर में सताया जाता है। सास ताना देती है और पति तलाक की धमकी देता है। इसी तरह की बातों से इस दवाई की इच्छुक औरतें केमिस्ट को भरोसे में लेती हैं। पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही केमिस्ट महिला को दवा देता है। डॉ. सुतोपा बताती हैं कि इस दवा पर अध्ययन करने के दौरान उन्होंने खुद भी इस दवा काे खरीदने वाली महिला की एक्टिंग की। इस तरह से उन्होंने अलग-अलग कई दुकानों से सैंपल्स जुटाए। इन सैंपल्स को जांच के लिए लखनऊ स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक में भेजा गया और इसके साइड इफेक्ट्स को परखा गया।

दवा के लिए भी टोटके का सहारा।
दवा के लिए भी टोटके का सहारा।

ऐसी गाय के दूध के साथ दवा लेने का टोटका, जिसे बछड़ा हो
एसएसडी बनाने वाले नीम-हकीमों ने इसकी खुराक को लेने से जुड़े टोने-टोटके भी बना रखे हैं। कई बार केमिस्ट भी अपने खरीदारों पर तरस खाकर इस दवा को खाने के टोटके बताते हैं, जैसे एसएसडी को ऐसी गाय के दूध के साथ ही लेने से बेटा पैदा होगा, जिसका बछड़ा हो। इसे दिन के किसी खास पहर में ही लेना है, वर्ना लड़का नहीं होगा। इसे लेते समय किसी लड़की पर नजर नहीं पड़नी चाहिए, इससे भी बेटे के जन्म के चांसेज कम हो जाएंगे। दवा लेने के दिनों में केवल लड़के के बारे में ही सोचना जरूरी है।

साल 2030 तक स्टिल बर्थ कम करने का ग्लोबल टारगेट।
साल 2030 तक स्टिल बर्थ कम करने का ग्लोबल टारगेट।

स्टिल बर्थ के आंकड़े क्या कहते हैं
साल 2014 को वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में ‘एवरी न्यूबॉर्न एक्शन प्लान’ के अंतर्गत साल 2030 तक एक हजार जन्मे बच्चे पर 12 या इससे कम स्टिल बर्थ होने का ग्लोबल टारगेट रखा गया है। साल 2019 तक करीब 128 ‘हाई-इनकम’ और ‘अपर-मिडिल इनकम’ देशों ने इस लक्ष्य को पूरा कर लिया है, लेकिन अभी भी कई देशों में यह समस्या पहले जैसी ही बनी हुई है। अभी भी टोटल स्टिल बर्थ 84% मामले ‘लो’ और ‘लोअर मिडिल इनकम’ वाले देशों में ही होते हैं।

ऐसे जन्मजात विकारों का रहता है डर।
ऐसे जन्मजात विकारों का रहता है डर।

शिशु के होमोसेक्शुअल होने के भी चांसेज
एसएसडी पर किए गए एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि प्रेग्नेंसी के दौरान इन दवाओं का उपयोग करने से स्टिल बर्थ की आशंका 2.5 गुना अधिक बढ़ जाती है। यह दवा लेने वाली 5 महिलाओं में से एक मृत बच्चे को जन्म देती हैं। सैंपल्स की जांच में पाया गया कि इन दवाओं में फाइटोएस्ट्रोजन और टेस्टेस्टोरॉन जैसे हार्मोन बहुत ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं। इन दवाओं में लेड और मरक्यूरी जैसे रासायनिक तत्व भी मौजूद होते हैं। डॉ. सुतोपा का कहना है कि इन दवाओं में बड़ी मात्रा में हार्मोंस का इस्तेमाल किए जाने के कारण बच्चे के होमोसेक्शुअल होने की भी आशंका हो सकती है। हालांकि अभी इस दिशा में और गहन अध्ययन किए जाने की जरूरत है।

चूहे पर हुए शोध में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
चूहे पर हुए शोध में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

चूहों पर भी दवा का समान असर
बेटा होने का दावा करने वाली इन दवाओं का सच जानने के लिए इन्हें चूहों पर भी टेस्ट किया गया। चूहों को यह दवा दिए जाने के बाद उनके बच्चों में भी विकृति पाई गई। हरियाणा के ‘डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ की ओर से चूहों पर किए गए इस टेस्ट के लिए ड्रग के सैंपल हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, गुजरात से भी मंगाए गए थे।

बेटी के जन्म को लेकर माता-पिता की सोच भी बदली है।
बेटी के जन्म को लेकर माता-पिता की सोच भी बदली है।

सोच में आ रहा बदलाव, कानून भी सख्त
यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति वर्ष 17 लाख बच्चे ‘बर्थ डिफेक्ट्स’ के साथ पैदा होते हैं। नई दिल्ली की उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल की ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी की हेड डॉ. एकता बजाज कहती हैं कि बच्चों के साथ-साथ मां पर भी इन दवाओं का खराब असर होता है, क्योंकि इनमें हार्मोंस का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह की दवाओं के लेने से अबॉर्शन के चांसेज होते हैं। करीब 20 सालों की प्रैक्टिस में उन्होंने पाया कि बेटियों को लेकर समाज की सोच में बदलाव आया है। पेरेंट्स यह पूछने की हिम्मत भी नहीं करते कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग क्या है। कन्या भ्रूण हत्या को लेकर बने कड़े कानूनों को इसका श्रेय जाता है, लेकिन अंदर छिपी बेटे की लालच ऐसी गलतियां करा देती है।