रात में आईना देखना भी बीमारी:बॉडी डिस्मार्फिक डिसआर्डर से पीड़ित होते हैं ऐसे लोग, बुरा दिखने का रहता है डर

6 महीने पहले
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हर कोई खुद को आईने में निहारता है। कोई सुबह उठकर सबसे पहले मिरर देखना पसंद करता है तो कोई ब्रश करने, नहाने, ऑफिस के लिए तैयार होने आदि के समय भी। कई बार लोग बार-बार मिरर देखते हैं। कुछ तो बड़े मिरर के सामने खड़े होकर बोलते हैं और अपनी भाव-भंगिमाओं को देखते हैं।

यही नहीं, कुछ लोग रात में भी आईना देखते हैं। दिलचस्प यह है कि रात में आईना देखने को अच्छा नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे चेहरे पर झाइयां पड़ जाती हैं। क्वलिटी नींद नहीं आती।

एक शोध के अनुसार, रात में आईना देखना भी एक तरह का डिसआर्डर है। यह ठीक वैसा ही है जैसे बार-बार आईना देखना। इसे बॉडी डिस्मार्फिक डिसआर्डर कहते हैं। इसमें व्यक्ति खुद को आईने में देखता है और सोचता है कि वह अच्छा दिख रहा है या नहीं।

सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकेट्री की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संघमित्रा गोडी कहती हैं कि यह ऐसी मानसिक अवस्था होती है जिसमें कोई व्यक्ति किसी हीन भावना से ग्रसित होता है। नाक छोटी होना, भौंहें मोटी होना, आंख-कान आदि को लेकर वह असहज महसूस करता है। यह स्थिति तब होती है जब वह किसी से कमेंट्स सुनता है।

खासकर बाल और चेहरे को लेकर। तब ऐसे व्यक्ति बार-बार आईना देखते हैं। रात में भी वे उठकर मिरर देखते हैं और खुद को संतुष्ट करते हैं कि वह अच्छा तो दिख रहा न।

अपनी शारीरिक बनावट को लेकर इस तरह का डर व्यक्ति में अवसाद पैदा करता है। ये अवसाद व्यक्ति को सुसाइड की ओर भी ले जाता है। खासकर महिला्ओं में। कुछ शोधों में पाया गया है कि कई लोगों में इस डिसआर्डर के लिए जीन को भी जिम्मेदार माना जाता है। यानी ये आनुवांशिक भी हो सकती है।

सेरोटोनिन में कमी भी है जिम्मेदार

वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों में इसके लक्षण पाए जाते हैं उनमें सेरोटोनिन लेवल कम पाया जाता है। सेरोटोनिन न्यूरो ट्रांसमीटर होते हैं। जब व्यक्ति का इलाज किया जाता है तो इन लक्षणों में कमी देखने को मिली है।

एलजीबीटीक्यू कम्यूनिटी के लोगों में अधिक शिकायत

अमेरिका के द एलजीबीटीक्यू हेल्थ एजुकेशन सेंटर के एक शोध के अनुसार, सबसे अधिक ट्रांसजेंडरों में यह डिसआर्डर देखने को मिलता है। शारीरिक बनावट, आवाज, चलने-फिरने आदि को लेकर जब वो कमेंट्स सुनते हैं तो वे इस डिसआर्डर के शिकार हो जाते हैं।

उड़ जाती है नींद

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं का कहना है कि जब आप रात में आईना देखते हैं तो क्वालिटी नींद पर असर पड़ता है। चूंकि लाइट मिरर से रेफ्लेक्ट होती है ऐसे में ऐसे मूवमेंट को भी आंखें कैद करती हैं। आंखों की रेटिना में एक न्यूरल सर्किट होती है जो रेफ्लेक्शन को भी पकड़ती है।

साउंड को भी रेफ्लेक्ट करता है मिरर

मिरर केवल इमेज को ही रेफ्लेक्ट नहीं करता बल्कि साउंड को भी। हालांकि मिरर अधिकतर साउंड को एब्सॉर्ब करता है लेकिन बचे हुआ साउंड वापस कमरे में ही आता है। ऐसी स्थिति में भी हमारी बॉडी ऐसे साउंड के प्रति रियेक्ट करती है। तब नींद डिस्टर्ब होती है।

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