आयुर्वेदिक लाइफस्टाइल:वाइट डिस्चार्ज अंदरूनी अंग साफ करने में कारगर, सिंथेटिक अंडरगार्मेंट न पहनें, एक चम्मच मेथी दाना महकाएगा आपकी जिंदगी

नई दिल्ली6 महीने पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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  • आयुर्वेद में ‘श्वेत प्रदर’, इंग्लिश में ‘वाइट डिस्चार्ज’ और मॉडर्न मेडिसिन में इसे ‘ल्यूकोरिया’ कहते हैं।
  • आम बोलचाल की भाषा में इसे महिलाएं ‘सफेद पानी जाना’ के नाम से जानती हैं।

वाइट डिस्चार्ज को अक्सर रोग समझा जाता हैं जबकि ऐसा नहीं है। यह पुराने समय से चली आ रही एक गलत धारणा है। वजाइनल डिस्चार्ज एक सामान्य और सेहतमंद प्रक्रिया है। यह योनि मार्ग (वजाइना) को स्वच्छ और स्वस्थ रखने का काम करता है।

रंग और गंध में बदलाव है बीमारी का लक्षण
आमतौर पर 18 से 35 साल की लड़कियों और महिलाओं की यह आम समस्या है। सेक्स की उत्तेजना महसूस करने पर, फिर ओव्यूलेशन के दिनों में और ब्रेस्ट फीडिंग करा रही मांओं में भी वाइट डिस्चार्ज की मात्रा अधिक हो जाती है। सफेद पानी का आना नॉर्मल बात है। जब यह सामन्य से ज्यादा होने लगे, तो अलर्ट होने की जरूरत है।

वाइट डिस्चार्ज पतला न होकर गाढ़ा हो जाए, मात्रा बढ़ जाए, पारदर्शी न होकर सफेद, पीला और हरा रंग का हो जाए, तो सतर्क हो जाएं। इसमें दुर्गंध आना बीमारी की निशानी है। यह सभी लक्षण बताते हैं कि शरीर के अंदर कोई प्रॉब्लम पनप रही है।

गर्भ निरोधक गोलियां लेने पर भी बढ़ जाता है वाइट डिस्चार्ज
कुछ महिलाएं लंबे समय तक बर्थ कंट्रोल पिल्स लेती हैं तो उनमें इसके होने की आशंका बढ़ जाती है। यदि महिला स्टेरॉयड या एंटी-बायोटिक्स अधिक मात्रा में लेने लगे या लंबे समय तक लेना जारी रखे, तो भी वाइट डिस्चार्ज में अंतर दिखाई देता है। क्रोनिक डायबिटीज की परेशानी से जूझ रही महिलाओं में भी यह प्राॅब्लम कॉमन है। वजाइनल हाइजीन का भी वाइट डिस्चार्ज से सीधा संबंध है।

लापरवाही से भी होती है श्वेत प्रदर की परेशानी
महिलाओं में यह बहुत बड़ी गलतफहमी है कि वाइट डिस्चार्ज से शरीर में कमजोरी आती है। इस डिस्चार्ज के होने की कई वजहें होती हैं। स्टूल या यूरिन (मल-मूत्र) करने के बाद सफाई का गलत तरीका भी इस बीमारी की वजह बनता है।
आमताैर पर योनि से मलद्वार की तरफ यानी शरीर के आगे से पीछे की ओर सफाई की जानी चाहिए। जबकि बहुत सारी महिलाएं पीछे से आगे की तरफ सफाई करती हैं। इससे मलद्वार की गंदगी वजाइना में इंफेक्शन पैदा करती है। असुरक्षित सेक्स या पार्टनर में किसी किस्म का इंफेक्शन होने के कारण भी वाइट डिस्चार्ज में इंफेक्शन की समस्या हो सकती है।

यूटेरस निकाले जाने पर भी बढ़ जाता है वाइट डिस्चार्ज
यह पता लगाना आसान है कि वजाइनल इंफेक्शन की वजह बैक्टीरिया, फंगस, यीस्ट, सिफिलिस, गोनोरिया या ट्राइकोमोनस वेजाइनलिस है। कई बार पीरियड्स के पहले और उसके बाद भी वाइट डिस्चार्ज बढ़ा हुआ पाया गया है। यह सामान्य बात है।
यूटेरस का सर्जिकल रिमूवल होने की स्थिति में, यूटेरस के साथ फैलोपिअन ट्यूब और ओवरीज भी निकाल दी गई हो, तो इस ऑपरेशन के बाद भी वाइट डिस्चार्ज बढ़ जाता है। ऑफिस में या सार्वजनिक जगहों पर कॉमन बाथरूम इस्तेमाल करने के कारण हुआ इंफेक्शन भी वाइट डिस्चार्ज की वजह बनता है। योनि के भीतर सूजन या संक्रमण, जिसे पेल्विक इन्फ्लामेट्री डिसीज कहते हैं, से भी वाइट डिस्चार्ज बढ़ जाता है।

संक्रमण को समझना जरूरी है

  • वाइट, ग्रे और येलो कलर : बैक्टीरियल इंफेक्शन की निशानी है।
  • वाइट, चिपचिपा और गाढ़ा : फंगस या यीस्ट की वजह से होता है।
  • पिंक कलर का कारण : चाइल्ड बर्थ के बाद ऐसी रंगत हो जाती है।
  • ग्रीनिश-येलो, बदबू के साथ : ट्राइकोमोनस वजाइनलिस के संक्रमण में होता है।
  • धुंधला और पीला : गोनोरिया के कारण होता है।

अधिक खुशबू वाले सोप के इस्तेमाल से बचना जरूरी कुछ महिलाएं दुर्गंध से बचने के लिए तेज खुशबूवाले साबुन का इस्तेमाल करती हैं, इसका असर बुरा होता है। इससे बदबू तो कम होती है लेकिन त्वचा खराब हो जाती है साथ ही कई बार इंफेक्शन अधिक बढ़ जाता है। सामान्य वजाइनल डिस्चार्ज महिलाओं के लिए जरूरी है, ये नहीं होने पर समस्या होती है जैसे मेनोपॉज में वजाइनल डिस्चार्ज नहीं होता है , तो इस अंग में इचिंग होती है। रेडनेस बढ़ जाती है और ड्राइनेस के कारण सेक्स भी पेनफुल हो जाता है।

वजाइनल हाइजीन के लिए जरूरी है सही खानपान
वजाइनल हाइजीन के लिए अच्छे बैक्टीरिया का बढ़ना जरूरी है। इसके लिए खानपान में दही और छाछ को शामिल करें। इसके अलावा खमीर वाली चीजों को खाएं, जैसे इडली, डोसा, खमण या ढोकला।

एक से बढ़कर एक उपाय

  • एक लीटर पानी में 5 चम्मच धनिया और जीरा का पाउडर डालकर रातभर के लिए छोड़ दें। सुबह इसे 5-10 मिनट तक इसे उबाल कर ठंडा करें। छान कर यह पानी दिन में 4-5 बार पिएं।
  • एक से दो चम्मच मेथी के दानों को एक गिलास पानी में रात को भिंगोकर रख दें। सुबह मेथी दानों को मसल लें। इस पानी को गरम कर छान लें। दिन में दो बार इसे पीने से फायदा हाेगा।
  • एक या दो चम्मच मेथी दाने को रात को सोने के पहले गरम पानी के साथ भी लिया जा सकता है।
  • बैक्टीरियल इंफेक्शन में नीम के चूर्ण के पानी से वजाइना वॉश करना चाहिए।
  • यीस्ट का इंफेक्शन होने पर फिटकरी के पानी से प्राइवेट पार्ट को धोएं, आराम मिलेगा।
  • पंचवल्कल क्वाथ या पंचवल्कल तेल (दुकानों में मिल जाता है ) के टैम्पून को वजाइना में 5-7 दिन तक दिन में दो बार 2-3 घंटे के लिए रखने से यह तकलीफ कम होगी।
  • तंग कपड़े नहीं पहनने चाहिए। टाइट लेगिंग्स या जींस या सिंथेटिक अंडरगारमेंट पहनने से गरमी बढ़ती है और अधिक पसीना निकलता है। इससे बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन बढ़ता है।
  • सफेद पानी अधिक आने पर पैंटी लाइनर या फिर सैनेटरी पैड का इस्तेमाल करें।
  • तीन गिलास पानी में त्रिफला चूर्ण को रातभर पानी में भिगोकर रखें। सुबह उसे उबालने के बाद छानकर ठंडा कर लें। इस पानी से वजाइना धोएं। धोने के बाद साफ सूखे कपड़े से सूखा लें।
  • तीन से चार चम्मच गोंद को एक गिलास पानी में भिगो दें, इसे सुबह मिश्री के दिन में 2 बार लें।
  • जामुन की गुठली का चूर्ण और नीम के पत्तों का चूर्ण को एक-एक चम्मच लें। इसे शहद के साथ दिन में 2 बार लें।
  • पका हुआ लेकिन दिखने में हरा केला इलायची के साथ सुबह या दोपहर में खाएं लेकिन सूर्य डूबने के बाद नहीं खाएं।

इसे समझना बेहद जरूरी है कि वजाइना और सर्विक्स में मौजूद ग्लैंड्स से निकलनेवाला लिक्विड यानी सामान्य डिस्चार्ज की वजह से ही यहां मौजूद मृत कोशिकाएं और बैक्टीरिया शरीर से बाहर निकलती है इसलिए सामान्य तौर पर होने वाला डिस्चार्ज महिला के सेहतमंद रहने के लिए बहुत जरूरी है।

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