आयुर्वेदिक लाइफस्टाइल:मकर संक्रांति पर खाएं सफेद-काले तिल, पीरियड्स- मेनोपॉज और स्किन प्रॉब्लम की होगी छुट्टी

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: निशा सिन्हा
  • कॉपी लिंक
  • मेनोपॉज की उम्र की महिलाओं को पांच सप्ताह तक तिल चबाकर खाने को दिया
  • नतीजे में इन सभी महिलाओं के हीमोग्लोबिन, हाॅरमोन और स्किन में सुधार पाया गया

ढोकला, पात्रा, मूठिया, बर्गर में तिल का इस्तेमाल खूब देखा होगा। इसके अलावा कभी-कभी खाने की खूबसूरती बढ़ाने के लिए भी सफेद और काले तिल का इस्तेमाल किया जाता है।

सदियों से हमारी परम्परा में ठंड के दिनाें में तिल की तिलवा, तिलकुट, रेवड़ी, चिक्की खाने का चलन है। सर्दी के मौसम में यह शरीर को गरम रखने के साथ ही इम्युनिटी बढ़ाता है। तिल और इसका तेल त्वचा, दांत, दिमाग, मांसपेशियां और हड्डियों के लिए बेस्ट है।

शास्त्रों में बताए गए हैं तिल के 6 उपयोग
शास्त्रों में तिल काे 6 तरीकों से इस्तेमाल करने को कहा गया है। तिल के पानी से स्नान करना, तिल को पीस कर उसके लेप को पूरे शरीर पर लगाना, तिल को अग्नि में होम करना, स्वर्ग के पितरों को अपर्ण करना, खाने में सेवन करना और इसका दान करना। आयुर्वेद में तिल को चिकने गुण वाला माना गया है। इसकी तासीर गरम होती है। यह पचने में भारी होता है इसलिए इसे ज्यादा खाना सही नहीं है।

स्त्रियों का जिगरी दोस्त तिल
यह बालों और त्वचा के पोषण के लिए बहुत फायदेमंद होता है। बाल और दांत की जड़ों को मजबूती देता है। यह मसूढ़ों को भी हेल्दी रखता है। तिल को पीसकर उसमें चुटकीभर हल्दी मिक्स करके त्वचा पर लगाने से पिंपल दूर होंगे। इसे लगाने से काले धब्बे भी हट जाते हैं।

सर्दियों में एक-एक चम्मच काले तिल काे रोज चबा-चबाकर खाने से शरीर को ताकत मिलेगी। अनियमित माहवारी की स्थिति में 4-4 चम्मच सुबह शाम गुड़ के साथ लें। इसे चबाकर ही खाएं। मेनोपॉज के बाद ज्यादातर महिलाएं ऑस्टियोपोरोसिस (हडि्डयों की बीमारी) की समस्या से जूझती हैं।

इसमें मौजूद कैल्शियम, आयरन, मैगनीज, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और विटामिन डी ज्यादा मात्रा में मिलता है। यही वजह है कि 45 साल से अधिक उम्र होने पर जब महिलाओं की हडि्डयां कमजोर होने लगे, तो 2-4 चम्मच काले तिल को गुड़ के साथ चबाकर खाने से ऐसी तकलीफें दूर होगी।

शानदार मुखवास है तिल
इसका मुखवास के रूप में इस्तेमाल करने के भी ढेरों फायदे हैं। इसके लिए तिल को कड़ाही मे सेंक लें, इसमें मात्रा और स्वाद के हिसाब से नमक और हल्दी मिला लें। खाना खाने के बाद लेने से खाना पचेगा और मुंह भी साफ रहेगा।

इसमें कॉलेस्ट्रॉल नहीं होता है। कार्बोहाइड्रेट, सोडियम और शुगर की मात्रा भी न के बराबर होती है। इसको किसी भी डिश में इस्तेमाल करके खाया जा सकता है क्योंकि 100 ग्राम तिल के अंदर 650 कैलोरी होती है इसलिए मोटापे की चिंता किए बगैर इसके पोषण का फायदा उठाएं।

पाइल्स और टीबी में भी असरदार
जिन लोगों को पाइल्स की दिक्कत है, वे सुबह-सुबह काले या सफेद तिल को मक्खन या गुड़ के साथ चबाकर लें। यह आसानी से पेट साफ करेगा, दर्द भी कम होगा और खून गिरना भी बंद हो जाएगा।

टीबी के रोगियों का शरीर जब बहुत कमजोर हो जाए, तो उन्हें काले तिल के साथ गुड़ दें। इसे दिन में दो या तीन बार दिया जा सकता है। इसमें मौजूद कैल्शियम, फॉस्फोरस और आयरन से टीबी रोगियों को ताकत मिलेगी और वजन भी बढ़ेगा।

जॉइंट पेन को जड़ से उखाड़ फेंकेगा
सर्दियों में जॉइंट पेन हो रहा हो, तो तिल के तेल को हल्का गरम कर लें। इसमें चुटकीभर हल्दी मिलाकर घुटनों की मालिश करने से आराम मिलेगा। इसे घाव पर लगाने से जख्म जल्दी भर जाता है। डायबिटीज में बार-बार यूरिन के लिए जाना पड़ता है। इससे शरीर में कमजाेरी भी आती है। इसके अलावा ऐसी स्थति में तिल को चबाकर खाने से भी फायदा मिलेगा ।

अगर बच्चा पांच साल की उम्र के बाद रात में बिस्तर गीला करता है, तो उसे भी तिल चबाकर खाने को दें। इस बात का खास ख्याल रखें कि डायबिटीज और बिस्तर गीला करने की स्थितियों में तिल के साथ गुड़ बिल्कुल नहीं देना है। अल्जाइमर, पार्किन्सन्स और मेमोरी लॉस होने पर काले या सफेद तिल के दो चम्मच तिल को एक-चौथाई चम्मच गुड़ के साथ खाएं और पानी भी पिएं। इससे फायदा पहुंचेगा।

पीसीओडी की परेशानी का अचूक इलाज
किशोरियों या युवा महिलाओं में ‘पीसीओडी’ या ‘पीसीओएस’ की समस्या बहुत ही आम है। इरेगुलर मेन्सट्रूअल सायकल की भी दिक्कतें आती हैं। इन स्थितियों में 2 चम्मच तिल को एक या दो मिनट तक हल्का गरम करके सादे गुड़ के साथ रोज सुबह खाली पेट लें। एक महीने तक इस तरह से लेने से फायदा होगा।

बेबी प्लान करने वाले पति-पत्नी कुछ महीने इसे खाएं, तो नतीजे अच्छे मिलेंगे। इससे महिला में ओव्यूलेशन और पुरुष में स्पर्म काउंट सुधरता है। दंपति के मन की मुराद पूरी होगी।

तिल के साथ गुड़ की बात करना भी जरूरी
गुड़ में पोटाशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, प्रोटीन और आयरन मौजूद होता है। यह शरीर की थकान को कम करता है और शरीर को शुद्ध करता है। यह शरीर में ब्लड के लेवल को बढ़ाता है। एक साल से पुराना गुड़ अच्छा माना जाता है। नए गुड़ का इस्तेमाल सर्दियों तक ही करें। एनीमिया में गुड़ और तिल को खाने से लाभ होता है।

इस मिठास के बिना अधूरी है मकर संक्रांति
मकर संक्रांति को तिल और गुड़ के बिना अधूरा माना जाता है। महाराष्ट्र में कहावत है, तिल गुड़ घ्या आणि गोड गोड बोला। इसका मतलब है तिल और गुड़ खाओ और मीठा बोलो। गुड़ और तिल से बनी मिठाइयाें की सेल्फ लाइफ लंबी होती है। जिम जानेवाले तिल और गुड़ की चिक्की खाएं, अच्छा रहेगा। यह मसल्स के लिए सही है। इसमें कैलोरी कम और फाइबर ज्यादा होता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती।

महिलाओं में थायराॅयड के कारण हेयर फॉल और हेयर लॉस होता है, ऐसे में तिल और गुड़ खाकर देखें, कमाल का फायदा नजर आएगा। पीरियड्स के कारण कई लड़कियाें को बार-बार बुखार आना, शरीर टूटना, कमरदर्द जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। इसमें भी तिल और गुड़ खाने से फायदा होगा।

क्या अंतर है काले और सफेद तिल में
वैसे तो काला और सफेद तिल एक जैसे ही हैं लेकिन फिर भी तुलनात्मक रूप से काले तिल को अच्छा माना गया है। काले तिल में एंटी-ऑक्सीडेंट प्रॉपर्टी ज्यादा होती हैं। इसमें विटामिन ए, ई और प्रोटीन की मात्रा सफेद तिल से अधिक होती है। जब पेट में गैस और कब्ज की शिकायत हो, तो तिल और गुड़ का कॉम्बीनेशन खाएं, फायदा मिलेगा।

खबरें और भी हैं...