रोने में शर्म कैसी:पेनकिलर से कम नहीं आंसू, दिल हल्का करने के लिए कहीं है क्राइंग रूम, तो कहीं अनोखा क्लब

5 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

आपने घर में बेडरूम, लिविंग रूम या फिर डाइनिंग रूम के बारे में खूब सुना होगा, पर क्या कभी क्राइंग रूम के बारे में सुना है? ये कोई मजाक नहीं है बल्कि स्पेन की राजधानी मैड्रिड में एक ऐसा रूम है जहां हताश, निराश, उदास और परेशान लोग जाकर दिल खोलकर रोते हैं। जी हल्का करते हैं। क्राइंग रूम नाम की यह जगह लोगों के दबे हुए गुस्से को बाहर निकालने के लिए बनाई गई है।

हालांकि, भारत इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं है क्योंकि यहां आंसू बहाना इंसान की कमजोरी समझी जाती है इसलिए तकलीफ होने पर भी पुरुष आंसू बहाने से परहेज करते हैं। कई शोध में खुलासा हो चुका है कि रोना शरीर, दिमाग और आंखों के लिए भी जरूरी है। मेडिकल युनिवर्सिटी ऑफ ओहियो के शोध की मानें तो 88.8% लोग रोने के बाद हल्का और तरोताजा महसूस करते हैं।

ये है देश का अनोखा क्लब
भारत में योगा क्लब, लाफ्टर क्लब या फिर हेल्थ क्लब तो बहुत हैं, लेकिन गुजरात के सूरत में क्राइंग क्लब भी है। यहां लोग रोने के लिए आते और हंसते हुए जाते हैं। इस क्लब में समाज के हर तबके के लोग आते हैं। रो कर अपने दिल के बोझ को हल्का करते है। यहां वीकेंड पर क्राइंग थैरेपी की क्लास होती है, जिसमें लोग अपने तनाव और अकेलेपन को दूर करते हैं।

आखिर आंखों में आंसू क्यों आते है?
रोने के पीछे साइंस काम करता है। इंसानों के आंखों से आंसू किसी दुख, परेशानी या फिर केवल खुशी के मौके पर ही नहीं आते हैं, बल्कि ये चेहरे पर तेज हवा या किसी खास गंध की वजह से भी आते हैं। साइकोलॉजिस्ट्स इस बात पर हमेशा जोर देते हैं कि भावनाओं के उबाल में रोना अच्छा होता है। इससे आंखें ही नहीं, बल्कि मेंटल हेल्थ बेहतर रहती है।

रोने से आंखें ही नहीं, बल्कि मेंटल हेल्थ भी बेहतर रहती है।
रोने से आंखें ही नहीं, बल्कि मेंटल हेल्थ भी बेहतर रहती है।

आंसुओं में छिपा है राज
द टोपोग्राफी ऑफ टियर्स की रिसर्च में आंसुओं की बारीकी जानने के लिए 100 अलग तरह के आंसुओं पर जांच की गई। इन्हें माइक्रोस्कोप के नीचे रख कर देखा गया तो सभी के आकार अलग अलग दिखे। इसमें पाया गया कि खुशी के आंसुओं का आकार प्याज काटने पर आने वाले आंसुओं से बिल्कुल अलग है। आंखों से गिरने वाले आंसुओं का साइज उनकी वजह पर निर्भर करता है।

क्या आंसुओं से फैल सकता है कोरोना
अमृतसर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की एक रिसर्च का दावा है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति के आंसुओं से भी वायरस के संक्रमण के फैलने का खतरा है। इस स्टडी के लिए मरीज की आरटीपीसीआर रिपोर्ट आने से 48 घंटों के भीतर आंसू के नमूने लिए गए थे। इसके मुताबिक कोरोना संक्रमित मरीजों के आंसू इनके देखभाल में लगे मेडिकल स्टाफ के लिए संक्रमण का खतरा बन सकते है। ऐसे में मेडिकल स्टाफ और आंख के डॉक्टरों को ज्यादा अलर्ट रहने की जरुरत है।
वहीं, एक अन्य स्टडी के अनुसार रोने से हमारे शरीर में पैरासिम्प्थेटिक नर्वस सिस्टम (पीएनएस) उत्तेजित होता है। इसकी वजह से शरीर को आराम करने और डाइजेशन में मदद मिलती है। इसलिए अगर आप अपने दुख को सीने में छिपाकर रखते हैं, तो कभी-कभी दिल खोलकर रोने से गुरेज न करें। याद रखें कि रोने से न सिर्फ दिल हल्का होगा, बल्कि सेहत को ये फायदे भी मिलेंगे।

बात-बात पर रोना बुरी आदत
नेशनल आई इंस्‍टीट्यूट के मुताबिक आंसू आंखों को लुब्रिकेंट करने के साथ-साथ आंखों की रोशनी भी बढ़ाता है। आंखों के मेंबरेंस की नमी को बनाए रखता है और इसे सूखने से बचाता है। जयपुर के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में क्रिटिकल केयर और आईसीयू, सीनियर कंसल्टेंट डॉ. पंकज आनंद बताते हैं कि जब हम टेंशन में होते हैं तो दुखी होने के कारण आंखों से आंसू निकलने लगते हैं। इससे स्ट्रेस कम होता है और हम हल्का महसूस करने लगते हैं। रोने से आंखें नम और साफ हो जाती हैं। किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

रोते वक्त बॉडी में ऑक्‍सीटॉसिन और इंडोरफिर केमिकल्स रिलीज होता है जो आपके मूड को बेहतर करने के साथ-साथ फिजिकल और मेंटल पेन को भी कम करता है। पर बात-बात पर रोना भी बुरी आदत है इससे आपका मूड हमेशा दुखी रहेगा, जो हेल्थ के लिए सही नहीं।