ऐश्वर्या, समीरा रेड्‌डी को भी मां बनकर मिले ताने:बेबी बर्थ के बाद फिगर की टेंशन, लड़कियों पर परफेक्ट दिखने का प्रेशर बनाती है बॉडी पुलिस

नई दिल्ली4 दिन पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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महिलाओं का फिगर अगर एक-दो इंच डगमगा जाए, तो उन पर बदसूरती का तमगा लग जाता है। एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय और समीरा रेड्‌डी को भी प्रेग्नेंसी से भरे शरीर के कारण ट्रोलर्स के ताने सुनने पड़े। वहीं विद्या बालन ने भी स्वीकारा कि उनका बढ़ता वजन एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है।

बेटी आराध्या के जन्म के बाद ऐश्वर्या राय बच्चन भी बढ़े हुए वजन के कारण ट्रोल हुईं।
बेटी आराध्या के जन्म के बाद ऐश्वर्या राय बच्चन भी बढ़े हुए वजन के कारण ट्रोल हुईं।

पिछले महीने अनुष्का शर्मा ने भी एक इंटरव्यू में कहा कि महिलाओं पर हर उम्र में खूबसूरत दिखने का दबाव रहता है। अनुष्का को भी इस बात की चिंता थी कि बेबी बर्थ का उनके शरीर पर क्या असर पड़ेगा। साइकोलॉजिस्ट बताते हैं कि निगेटिव बॉडी इमेज का फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

समीरा रेड्‌डी की प्रेग्नेंसी के दौरान उन्होंने ट्रोलर्स की बातों का पलटकर जबाव दिया।
समीरा रेड्‌डी की प्रेग्नेंसी के दौरान उन्होंने ट्रोलर्स की बातों का पलटकर जबाव दिया।

महिलाओं को पसंद नहीं आता मोटापा
करीब 3300 लड़कियों पर हुए एक सर्वे में पाया गया कि करीब 90% महिलाएं अपने शरीर के किसी न किसी भाग की बनावट को लेकर असंतुष्ट रहती है। 15 साल से लेकर 65 साल की इन महिलाओं में से ज्यादातर की असंतुष्टि की वजह शरीर का वजन था।

विद्या बालन के बढ़े हुए वजन की वजह से उन पर भी काफी तंज कसा गया।
विद्या बालन के बढ़े हुए वजन की वजह से उन पर भी काफी तंज कसा गया।

कौन है परफेक्ट बॉडी की सोच के पीछे
ब्राउन यूनिवर्सिटी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार परफेक्ट बॉडी का विचार मीडिया, ब्यूटी इंडस्ट्री और हेल्थ-फिटनेस के पैरोकारों ने तय किया गया है। मीडिया में परफेक्ट बॉडी की महिलााओं की तस्वीरों को ही दिखाया जाता है।

इसके लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाता है या फिर बहुत ही कम वजन की महिलाओं की तस्वीरों को परफेक्ट बॉडी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। हर महिला के लिए ऐसा परफेक्ट शरीर पाना काल्पिनक और अस्वाभाविक है लेकिन इस सच से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि हर महिला की कल्पनाओं में वैसा ही शरीर पाने की इच्छा होती है।

चलिए मिलते हैं बॉडी पुलिस से
जो लोग लगातार शरीर की बनावट या बॉडी के साइज को लेकर टोकाटाकी और कमेंट करते रहते हैं, उन्हें बॉडी पुलिस का नाम दिया गया है। अध्ययन यह बताते हैं कि आपके चाहने वाले और करीबी भी बॉडी पुलिस हो सकते हैं। बॉडी पुलिसिंग की चपेट केवल महिलाएं ही नहीं पुरुष भी आ जाते हैं।

बॉडी पुलिस का काम यह बताना होता है कि ‘आप जैसे हैं, वह ठीक नहीं है।’ कई बार इस बॉडी पुलिस की दबाव में महिलाएं खुद को सुंदर दिखाने के हथकंडे अपनाने लगती है। इसमें डायटिंग करके खुद को स्लिम बनाने की चाहत, प्लास्टिक सर्जरी इसी पुलिस की देन है।

बहुत सारी लड़कियां बुलिमिया नर्वोसा का भी शिकार हो जाती हैं।
बहुत सारी लड़कियां बुलिमिया नर्वोसा का भी शिकार हो जाती हैं।

निगेटिव बॉडी इमेज की चिंता बीमार बना देती है
अक्सर निगेटिव बॉडी इमेज की चिंता महिलाओं के शरीर और दिमाग पर बुरा असर डालती है। मणिपाल हॉस्पिटल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. रुचि शर्मा के अनुसार कम उम्र की लड़कियां निगेटिव बॉडी इमेज का जल्दी शिकार हो जाती हैं। कुछ को खाना खाने के बाद अहसास होता है कि इससे वह मोटी हो जाएंगी, तो उल्टी करके सारा खाना बाहर निकाल देती हैं। इसे बुलिमिया नर्वोसा कहते हैं।

उन्होंने बताया कि एक टीनएजर लड़की के पेरेंट्स अपनी बेटी के खाना-पीना छोड़ देने के कारण परेशान होकर उनके पास आए। सुंदर दिखने की चाहत का असर किशोरी के मेंटल हेल्थ पर भी पड़ने लगा था। उसका बॉडी वेट गिरता जा रहा था। महिलाओं को यह खुद ही तय करना होगा कि उन्हें कैसा दिखना है उनके लिए खूबसूरती की परिभाषा क्या है। बाजार के हिसाब से खूबसूरत दिखने की चाह सेहत के लिए महंगी पड़ सकती है।