सेहत की बात:महिलाओं के लिए जरूरी हैं ये 4 ब्लड टेस्ट

2 महीने पहलेलेखक: मीना
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हर महिला को हेल्दी लाइफस्टाइल रूटीन की जरूरत होती है, जिसमें स्वस्थ खानपान, एक्सरसाइज, मेडिटेशन, प्रोपर स्लीप, स्ट्रेस मैनेजमेंट और रूटीन डायग्नोस्टिक टेस्ट। जी हां, डायग्नोस्टिक टेस्ट्स सुनने में थोड़ा अटपटा लग रहा होगा, लेकिन ये स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी हैं। इन परीक्षणों से स्वास्थ्य की स्थिति का जायजा लगाया जाता है। दिल्ली की नमामी लाइफ में न्यूट्रीशनिस्ट शैली तोमर का कहना है कि 30 की उम्र के बाद महिलाएं कई तरह के हार्मोनल बदलावों से गुजरती हैं, जिस वजह से वे कई तरह की बीमारियों की चपेट में भी आ जाती हैं, लेकिन अगर नियमित तौर पर ब्लड टेस्ट कराए जाएं, तो शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है, और बीमारियों से बचा जा सकता है।

थायरॉयड प्रोफाइल
थायरॉयड प्रोफाइल ब्लड टेस्ट के माध्यम से होता है, यह टेस्ट आपके ब्लड में टी3, टी4 और टीएसएच के लेवल की जांच करता है। हालांकि, थायरॉयड डिसऑर्डर पुरुषों को भी प्रभावित करता है, लेकिन महिलाओं में यह आम परेशानी है। टी3, टी4 का कम लेवल और टीएसएच का हाई लेवल का मतलब है कि आपकी थायरॉयड ग्लैंड्स अंडरएक्टिव (हाइपोथायरॉयड) हैं जिसकी वजह से वजन बढ़ता है। तो वहीं, टी3, टी4 का हाई लेवल और टीएसएच का लो लेवल का मतलब है कि आपकी थायरॉयड ग्लैंड्स ओवरएक्टिव (हाइपरथायरॉयड) है, जो वजन कम होने का कारण बनता है। थायरॉयड डिसऑर्डर्स की वजह से एक्ने, हेयरफॉल, कब्ज और ड्राय स्किन होती है। अगर आप प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रही हैं या प्रेग्नेंट हैं, तब भी थायरॉयड प्रोफाइल जरूरी है। अगर आपके थायरॉयड लेवल नॉर्मल रेंज में हैं, तो हर साल में एक टेस्ट जरूर कराएं। अगर आपका थायरॉयड लेवल सामान्य नहीं है तो हर 3 महीने में टेस्ट कराएं।

हिमोग्लोबिन
हिमोग्लोबिन ब्लड टेस्ट आपके ब्लड में हिमोग्लोबिन की मात्रा को मापता है। हिमोग्लोबिन एक प्रोटीन का टाइप है, जिसमें आयरन मौजूद है और शरीर के सभी सेल्स में ऑक्सीजन की सप्लाई करता है। शरीर में कम हिमोग्लोबिन लेवल की वजह से एनिमिया होता है, जबकि हिमोग्लोबिन का हाई लेवल पोलिसिथेमिया का कारण बनता है। महिलाओं के लिए सामान्य हिमोग्लोबिन का रेंज 12-15 gm/dl (grams per decilitre) है। पीरियड्स के दौरान महिलाओं में खून की कमी होती है जिससे हीमोग्लोबिन का लेवल कम होता है। 7 से कम हीमोग्लोबिन खतरनाक माना जाता है और इसकी पूर्ति के लिए शरीर में रक्त को चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।

विटामिन बी12
बी12 टेस्ट शरीर में विटामिन बी12 की मात्रा को मापता है। इस टेस्ट को कोबाल्मिन के नाम से भी जाना जाता है। विटामिन बी12 ब्रेन हेल्थ और रेड ब्लड सेल्स के लिए जरूरी है। ये डिप्रेशन को कम करने में भी मदद करता है। विटामिन बी12 चिकन, मछली और डेयरी प्रोडक्ट्स में पाया जाता है। अगर आप वेजिटेरियन हैं, तो आपके शरीर में विटामिन बी12 की कमी होगी। प्रेग्नेंट महिलाओं में विटामिन बी12 की कमी शिशु में सिरियस बर्थ डिफेक्ट डाल सकती है। यही नहीं, मिसकैरिज, प्रीमेच्योर बर्थ का भी कारण बन सकता है। शरीर में विटामिन बी12 की सामान्य रेंज 211 - 911 pg/mL होता है। 200 pg/ml से कम होने पर शरीर में विटामिन बी12 की कमी कही जाती है।

विटामिन डी
विटामिनि डी हड्डियों और जॉइंट हेल्थ के लिए जरूरी है। तो वहीं, यह कैल्शियम लेवल को भी रेग्युलेट करती है। शरीर में विटामिन डी की कमी जॉइंट पेन, मांसपेशियों का दर्द, कमजोर इम्युनिटी और डिप्रेशन का रिस्क बढ़ा देता है। वे महिलाएं जो घर में रहती हैं, उनमें विटामिन डी की कमी होती है, क्योंकि वे सूरज की रोशनी में बहुत कम जा पाती हैं। सूरज की रोशनी शरीर में विटामिन डी के प्रोडक्शन में मदद करता है। प्रेग्नेंसी में विटामिन डी के लेवल के कम होने से गर्भकालीन मधुमेह और प्री-एक्लैम्पसिया होता ह, जो ज्यादा खतरनाक हो सकता है। सामान्य विटामिन डी लेवल 20 और 40 ng/mL होता है।

महिलाएं जिस तरह से अपने दिनचर्या में बाकी काम चिंता से करती हैं, ठीक उसी तरह उन्हें अपनी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए ये 4 बल्ड टेस्ट जरूर कराने चाहिए।

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