जब नींद हो जाए ‘सोने’ से महंगी:आपके शरीर के ये 5 अंग बढ़ा देते हैं दिमाग पर लोड, आप भी परेशान तो नहीं?

एक महीने पहलेलेखक: मीना
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'हम औरतों की जिंदगी में नींद ‘सोने’ जैसी अमूल्य होती है। जब तक बच्चे छोटे होते हैं तब तक उनकी देखभाल करनी होती है जब वे ही बच्चे बड़े हो जाते हैं तब फिर उनके लिए सुबह जल्दी उठना पड़ता है क्योंकि उन्हें नौकरी पर जाना होता है और हम मां उनके लिए खाना बनाती हैं। आज से 17 साल पहले मेरे पति गुजर गए। तब मेरी उम्र 27 थी। ये सदमा मैं कभी नहीं भूल पाई। अब जब भी सोती हूं तो नींद टूट जाती है। अब उम्र 47 हो गई है, लेकिन नींद पूरी नहीं हुई।' ये शब्द हैं दिल्ली की शगुफ्ता रेहमान के।

शगुफ्ता रेहमान
शगुफ्ता रेहमान

शगुफ्ता की तरह ही ऐसी कई महिलाएं हैं जिनकी नींद पूरी नहीं होती। अमेरिका की संस्था सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन के मुताबिक,दो तिहाई महिलाओं को जरूरत से कम नींद मिलती है। इस पैंडेमिक में इसी वजह से महिलाओं में मेंटल इलनेस ज्यादा बढ़ी है। दिल्ली में क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि महिलाओं की नींद कई वजहों से टूट सकती है। उन्हीं कारणों में से एक कारण है सेंसरी ओवरलोड सिंड्रोम।
कान ,त्वचा ,आंख ,जीभ और नाक पांचों ज्ञानेंद्रिय से जब जरूरत से ज्यादा इन्फॉर्मेशन दिमाग तक पहुंचती है, जिसे वह प्रोसेस नहीं कर पाता तब इसे सेंसरी ओवरलोड सिंड्रोम कहते हैं।
क्या हैं इस सिंड्रोम के लक्षण?
डॉक्टर का कहना है कि ऑटिस्टिक, पोस्ट ट्रोमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD), एडीएचडी और ओसीडी के मरीजों में ये सिंड्रोम ज्यादा होता है। तो वहीं, ऐसे लोग जिन्हें एंग्जायटी, इरिटेशन, नींद में दिक्कत, पैनिक अटैक और तनाव की स्थिति में डील नहीं कर पाते उनमें भी इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। सेंसरी ओवरलोड सिंड्रोम के लक्षणों में चिड़चिड़ाहट, शोर को लेकर शिकायत करना, रोशनी दिखते ही आंखें बंद कर लेना, शोर सुनाई देने पर कान बंद कर लेना शामिल है। इसके अलावा ये लक्षण भी दिखाई देते हैं।

  • इरिटेशन
  • फोकस न कर पाना
  • गुस्सा आना
  • ज्यादा शोर होने पर खुद को नुकसान पहुंचाना
  • थकान और नींद न आना
ज्यादा चमक से भी दिक्कत होती है, जिससे आंखों पर असर पड़ता है
ज्यादा चमक से भी दिक्कत होती है, जिससे आंखों पर असर पड़ता है

सेंसरी ओवरलोड सिंड्रोम से बचाव क्या है?
शगुफ्ता बताती हैं कि रात को जब सोती हूं तो दिन भर के काम की चिंता और बच्चों के भविष्य की चिंता सताती है। सोते-सोते चौंक कर उठ जाती हूं। नींद कई बार टूटती है। यही नहीं घरेलू महिला की जिंदगी में कई ऐसे कारण होते हैं जो उन्हें सोने नहीं देते। नींद पूरी न होने से मुझे दूसरी अन्य बीमारियां भी होने लगीं। तब दिल्ली के 'इहबास' में इलाज कराने गई। डॉक्टर ने दिमाग शांत करने वाली दवाएं दीं। तब से नींद ठीक आती है। हालांकि अभी भी बीच-बीच में नींद आने की परेशानी से जूझने लगती हूं।
डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि महिलाओं पर ज्यादा जिम्मेदारी होती है। घर और ऑफिस दोनों संभालने पड़ते हैं। ऐसे में वे अपने स्ट्रैस को मैनेज नहीं कर पातीं, खुद को समय नहीं दे पातीं जिससे उनकी नींद पूरी नहीं होती। वे ज्यादा सेंसटिव और इमोशनल होती हैं, इसलिए उन्हें इस तरह की बीमारी होने का खतरा ज्यादा होता है। इस डिसऑर्डर से बचने के लिए ये तरीके भी अपनाए जा सकते हैं।
सेल्फ लव करना सीखें
महिलाओं को खुद के लिए समय निकालना जरूरी है। तभी वे अपने स्ट्रैस को मैनेज कर पाएंगी। खुद के लिए समय निकालकर अपनी हॉबीज को एक्सप्लोर कर पाएंगी और कम तनाव में नींद अच्छी ले पाएंगी। सेल्फ लव करना सीखें। महिलाएं खुद को अवॉइड न करें।

अपना 'मीट टाइम' तय करें ताकि स्ट्रेस को मैनेज किया जा सके
अपना 'मीट टाइम' तय करें ताकि स्ट्रेस को मैनेज किया जा सके

प्रोफेशनल और पर्सनल जिंदगी में करें बैलेंस
प्रोफेशनल और पर्सनल जिंदगी में बैलेंस करना सीखें। इससे वे अपने बाकी काम भी निपटा पाएंगी और सोते समय ओवर थिंकिंग का शिकार नहीं होंगी।
योग और मेडिटेशन
योग और मेडिटेशन नींद लाने में बहुत मदद करते हैं। योग से ध्यान बढ़ता है और नींद डिस्टर्ब नहीं होती। इसके साथ ही महिलाओं को अपने इंटरेस्ट डेवलेप करने चाहिए जिससे उन्हें चिंता से दूर होने का मौका मिले। और वे खुद के लिए जी पाएं।
सेंसरी ओवरलोड सिंड्रोम सेंसिस से जुड़ा है। ये सभी गतिविधियां दिमाग के कंप्यूटर से जुड़ी हैं। दिमाग में ओवरलोड बढ़ता है तो वह काम करने में स्लो हो जाता है। यही वजह है कि तमाम अन्य बीमारियां भी होने लगती हैं। इसलिए इस सिंड्रोम से बचने के लिए महिलाओं को सेल्फ लव सीखना चाहिए।

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