हाइमनोप्लास्टी:सेक्स को लेकर खुली सोच रखती लड़कियां, शादी के नाम पर क्यों सर्जरी की तरफ दौड़ती हैं?

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: भारती द्विवेदी
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  • ऑपरेशन में 50 से 70 हजार तक आता है खर्च
  • दोनों ही सर्जरी डे केयर प्रोसिजर है
  • सर्जरी के लिए डॉक्टर समाज की दकियानूसी सोच को मानते हैं जिम्मेदार

कॉलेज के जमाने में मेरी एक दोस्त थी, जो काफी बोल्ड और इरादों में मजबूत मानी जाती। उसकी कई असफल प्रेम कहानियों की आंसुओं की गवाह मैं रही हूं। उसने अच्छी नौकरी पाई और फिर सरकारी नौकरी वाले लड़के से शादी की। वो हमेशा से इस बात को लेकर साफ थी कि शादी वो गवर्नमेंट जॉब वाले लड़के से ही करेगी। शादी तय होने के बाद वो वर्जिनिटी को लेकर परेशान रहने लगी। तब उसके दिमाग में हाइमनोप्लास्टी का आइडिया आया। फिर उसने शुरू की रिसर्च। अस्पताल, खर्च और सेफ्टी पर सबकुछ पता किया। हालांकि उसने सर्जरी नहीं कराई और न ही पति को सच्चाई बताई। पति को गफलत में रखने का उसने जो तरीका चुना, वो एक अलग कहानी है, लेकिन यहां सवाल आता है कि लड़की की वर्जिनिटी को लेकर समाज इतना कुंठित क्यों हैं जो मजबूत और खुले विचारों वाली लड़कियां भी शादी के नाम पर सर्जरी तलाशने लगती हैं!

वजाइनोप्लास्टी और हाइमनोप्लास्टी क्या बला है?

इसे समझने के लिए हमने तीन अलग-अलग डॉक्टरों से बात की। एलिगेंजा कॉस्मेटिक सर्जरी में बतौर सर्जन कार्यरत डॉ. विमल मलिक ने बातचीत के दौरान बताया कि वो कई सालों से ये सर्जरी कर रहे हैं। डॉ. विमल मलिक बताते हैं, वजाइनोप्लास्टी (Vaginal rejuvenation) ज्यादातर वो महिलाएं कराती हैं, जिन्होंने बच्चे को जन्म दिया है या फिर वो अनमैरिड लड़कियां जो सेक्सुअली बहुत एक्टिव रही हों। इस सर्जरी में वजाइना में कसाव को बढ़ाया जाता है।

क्यों हो रही है हाइमनोप्लास्टी?

हाइमनोप्लास्टी का मकसद है हाइमन रिकवरी। इसका सीधा मतलब वर्जिनिटी से है। लड़कियों की वजाइना के अंदर एक पतली झिल्ली होती है, जिसे हाइमन कहा जाता है। ये झिल्ली सेक्स के अलावा कई कारणों से टूट जाती है, जैसे खेलकूद, हॉर्स राइडिंग, साइकिलिंग, जिमनास्टिक्स, वेट लिफ्टिंग, पीरियड्स के दौरान टैंपून या कप के इस्तेमाल से।

इस पर हमने मूलचंद हॉस्पिटल की सीनियर स्त्रीरोग विशेषज्ञ मंजू हॉटचंदानी से भी बात की. डॉ. मंजू के अनुसार वजाइनोप्लास्टी योनि कसाव की सर्जरी नहीं है, बल्कि ये उन लड़कियों के लिए है, जिनका वजाइना जन्म के साथ विकसित नहीं हो पाता है।

अपोलो हॉस्पिटल में प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक सर्जन डॉक्टर अनूप धीर ने भी हाइमनोप्लास्टी और वजाइनोप्लास्टी पर वही बात की, जो डॉ. मलिक ने की थी। डॉ. मंजू की बात पर वो कहते हैं कि वजाइना डेवलपमेंट की सर्जरी को भी वजाइनोप्लास्टी ही कहते हैं लेकिन इसके केस बहुत कम आते हैं।

कितनी सेफ है सर्जरी?

डॉक्टरों के मुताबिक, ये सर्जरी डे केयर प्रोसिजर है। इसमें पहले मरीज को एनस्थीसिया दिया जाता है इसलिए सर्जरी के पहले रूटीन चेकअप होता है, यह देखने के लिए कि लड़की एनस्थीसिया के लिए फिट है या नहीं। वैसे तो सर्जरी का कोई साइड इफेक्ट नहीं है लेकिन इसके बाद 40-45 दिन तक आपको अपना ख्याल वैसे ही रखना होता है, जैसे डिलीवरी के बाद रखा जाता है। ऑपरेशन में 50 से 70 हजार रुपये तक खर्च होते हैं।

हाइमनोप्लास्टी कराने वाली ज्यादातर लड़कियों का रुझान एक जैसा?

हाइमनोप्लास्टी को लेकर कुछ डॉक्टर ये भी बताते हैं कि इस सर्जरी के लिए ज्यादातर एक खास समुदाय की लड़कियां आती हैं। हमने उनसे दोबारा साफ-साफ पूछा कि वो किस आधार पर ये दावा कर रहे हैं। तो वो कहते है कि लड़की के कुंवारेपन को लेकर रुढ़िवादी सोच होने की वजह से ऐसा हो सकता है। डॉ मलिक और डॉ धीर दोनों ही ये बात कहते हैं कि हालांकि इसमें मिडिल ईस्ट से आई लड़कियां ज्यादा होती हैं। अपने देश की बात करें तो हरियाणा की लड़कियां सर्जरी चाहती हैं। ये सारी ही लड़कियां मिडिल क्लास परिवार से आती हैं। डॉ. धीर आगे कहते हैं कि बहुत बार लड़कियां अपना सही नाम-पता भी नहीं बतातीं। यहां तक कि फॉलोअप चेकअप के लिए भी नहीं आती हैं।

क्या कहते हैं धर्मगुरु?

डॉक्टरों ने जो दावा किया, उस पर हमने दिल्ली स्थित गरीबनवाज़ फाउंडेशन के चेयरमैन मौलाना अंसार रज़ा से बात की। सबसे पहले हमने उनसे पूछा कि क्या वो वजाइनोप्लास्टी और हाइमनोप्लास्टी के बारे में जानते हैं? मौलाना ने इस टर्म को सेक्स चेंज समझा और कहने लगे कि कुदरत ने जैसा हमें बनाया है, वैसे ही रहना चाहिए। उसे चैलेंज करना ठीक नहीं। फिर जब हमने उन्हें समझाया कि ये दोनों सर्जरी क्या हैं तो उन्होंने कहा, ऐसी कोई चीज होती है, वो नहीं जानते थे।

मौलान अंसार रज़ा
मौलान अंसार रज़ा

बकौल मौलाना रज़ा, जो लोग भी ऐसा कर रहे हैं वो इस्लाम के खिलाफ है। शरीयत इसकी इजाजत नहीं देता। इसी वजह से हमारे यहां पर्दे का हुक्म है। इस्लाम में लड़का-लड़की दोनों के लिए ही शादी से पहले रिश्ता हराम है।

दकियानूसी सोच में समाज अब भी जकड़ा है

मौलाना रज़ा ये भी कहते हैं कि उनकी जानकारी में ऐसा कोई मामला नहीं आया है, बल्कि डॉक्टरों की ऐसी बातें गलत हैं। और अगर लड़कियां ऐसा कुछ करा भी रही हों, तो ऐसा दूसरे समुदायों में भी हो रहा होगा। हाइमनोप्लास्टी के लिए तीनों डॉक्टर भी समाज की दकियानूसी सोच को जिम्मेदार मानते हैं। वे कहते हैं कि इसको किसी एक समुदाय से जोड़कर देखना भी ठीक नहीं है क्योंकि सभी समुदाय इसी समाज का हिस्सा हैं।

डॉक्टर और मौलाना की बात इसलिए भी सही लगती है क्योंकि समाज की सोच सभी समुदायों पर कमोबेश एक जैसा असर डालती है। बहुत मामलों में सोच बदली है लेकिन वर्जिनिटी को लेकर सोसायटी अब भी भ्रम में जी रही है। सोसायटी यही मानती है कि लड़कियां जब सेक्सुअली एक्टिव होती हैं तभी ये हाइमन ब्रेक होती है। जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।

जाते-जाते एक सवाल लड़कों से- उनके लिए ये समझना इतना मुश्किल क्यों है कि शादी के लिए लड़कियां आसमान से नहीं आएंगी! सेक्स रेश्यो की बात करें तो लड़कों की तुलना में लड़कियां ऐसे ही कम हैं, और जो हैं वो भी आपकी तरह किसी के प्यार में हो सकती हैं। अपने पार्टनर के साथ बतौर कपल खुद को एक्सप्लोर कर सकती हैं। जब आप रिश्ते में होते हैं तो उसके साथ सबकुछ बांटना चाहते हैं लेकिन शादी की बात चलते ही वर्जिन लड़की तलाशने लगते हैं. आखिर इतनी हिप्पोक्रेसी क्यों?