पीरियड्स के दर्द से मैच हारी चीनी खिलाड़ी:क्या बदल रहा है महिलाओं का शरीर, पहले के मुकाबले क्यों नहीं सह पातीं माहवारी का दर्द

6 महीने पहलेलेखक: कमला बडोनी
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माहवारी का दर्द हर महिला अनुभव करती है, लेकिन हर महिला की दर्द सहन करने की क्षमता अलग होती है। ये दर्द किसी महिला को कम होता है, तो किसी को बहुत ज्यादा। चीनी खिलाड़ी झेंग किनवेन ने फ्रेंच ओपन में अपनी हार की वजह पीरियड्स के दर्द को बताया।

समय के साथ ये बड़ा बदलाव आया है कि महिलाएं अब माहवारी के दर्द पर बात करने लगी हैं। क्या पहले के मुकाबले आज की महिलाओं को माहवारी का दर्द ज्यादा होता है? एक्सपर्ट बता रहे हैं पीरियड्स के दर्द की वजह और उपाय।

चीनी खिलाड़ी झेंग किनवेन ने पीरियड्स को फ्रेंच ओपन हारने की वजह बताते हुए कहा, 'मैच से पहले पीरियड्स प्रॉब्लम शुरू हुई। इसकी वजह से मैच के बीच में ही मुझे पेट दर्द शुरू हो गया, जिसे सहन करन पाना मेरे लिए मुश्किल था। काश मैं एक पुरुष होती, तो मुझे इसे झेलना नहीं पड़ता।'
चीनी खिलाड़ी झेंग किनवेन ने पीरियड्स को फ्रेंच ओपन हारने की वजह बताते हुए कहा, 'मैच से पहले पीरियड्स प्रॉब्लम शुरू हुई। इसकी वजह से मैच के बीच में ही मुझे पेट दर्द शुरू हो गया, जिसे सहन करन पाना मेरे लिए मुश्किल था। काश मैं एक पुरुष होती, तो मुझे इसे झेलना नहीं पड़ता।'

पीरियड्स में क्यों होता है दर्द?

गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. शीतल अग्रवाल के अनुसार पीरियड्स में दर्द के तीन प्रमुख कारण हैं- सबसे बड़ा कारण लाइफस्टाइल है। महिलाओं के सोने, उठने, खाने-पीने की आदतें बदल गई हैं।

दूसरी वजह, पहले के मुकाबले अब महिलाएं कम एक्टिव हो गई हैं। घर के काम नहीं करती हैं। वो दिनभर ऑफिस में बैठकर काम करती हैं, जिससे उनका तनाव तो बढ़ गया है, लेकिन फिजिकल एक्टिविटीज कम हो गई हैं। तीसरी वहज फूड हैबिट्स हैं। खाने-पीने की आदतों में बदलाव के कारण मोटापा बढ़ गया है, जिससे बॉडी स्टिफ होती जा रही है और पीरियड्स में तकलीफें बढ़ने लगी हैं।

महिलाओं की दर्द सहने की क्षमता कम हुई है

डॉ. शीतल कहती हैं, “पहले महिलाओं के मन में पीरियड्स के दर्द को लेकर इतना डर नहीं था, लेकिन अब ये बढ़ गया है। महिलाएं दर्द के नाम से इतना डर जाती हैं कि उन्हें इसका एहसास ज्यादा होने लगता है। वो अपने दर्द को एक्सप्रेस करने लगी हैं। पीरियड्स के दर्द से बचने के लिए एक्टिव रहें, हेल्दी डाइट लें, रेगुलर योग और एक्सरसाइज करें, वजन न बढ़ने दें। मन में पीरियड्स का डर निकालें।

पीरियड्स में बेड पर पड़े न रहें, एक्टिव रहने से दर्द पर ध्यान नहीं जाएगा और इसका एहसास कम होगा। माहवारी के दौरान भी योग व पेल्विक रिलैक्सिंग एक्सरसाइज करें, वॉक पर जाएं, हेवी एक्सरसाइज से बचें। इससे आपको आराम मिलेगा।”

दर्द की वजह समझें

गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सरिता नाइक कहती हैं, “पीरियड्स में क्रैम्प्स आना आम बात है। कभी न कभी हर महिला इस तकलीफ से गुजरती है। नॉर्मल क्रैम्प्स या एक-दो दिन तक दर्द रहना आम बात है, लेकिन इसकी वजह से यदि महिला अपने रोजमर्रा के काम नहीं कर पाती या लड़की स्कूल-कॉलेज नहीं जा पाती, तो गायनेकोलॉजिस्ट मिलना चाहिए।

जरूरत पड़ने पर सोनोग्राफी भी हो सकती है। बहुत ज्यादा दर्द के कई कारण होते हैं, जैसे फायब्रॉइड, पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज, यूट्रस में गांठ, इसलिए दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।”

भावनाओं को समझें

साइकोलॉजिस्ट और हेल्थ काउंसलर नम्रता जैन के अनुसार, दर्द का असर हमारी भावनाओं पर भी पड़ता है इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हर महिला की दर्द सहने की क्षमता अलग हो सकती है इसलिए किसी और से अपना तुलना न करें। जब लगने लगे कि दर्द का असर आपके व्यवहार पर भी होने लगा है, तो उससे ध्यान हटाने के लिए शांत हो जाएं।

योग और मेडिटेशन से आपको आराम मिलेगा। मूड स्विंग से बचने का ये आसान तरीका है। भावनाओं के साथ साथ लाइफस्टाइल पर भी ध्यान दें। एक्टिव और फिट रहकर आप कई हेल्थ प्रोब्लम्स से बच सकती हैं।

गर्भाशय जब अपने अंदर की लाइनिंग को बाहर फेंकने की कोशिश करता है, तब पीरियड्स में क्रैम्प्स आते हैं।
गर्भाशय जब अपने अंदर की लाइनिंग को बाहर फेंकने की कोशिश करता है, तब पीरियड्स में क्रैम्प्स आते हैं।

दर्द दूर करने के उपाय

पीरियड्स में दर्द होने पर पेट के निचले हिस्से की सिंकाई करें, लिक्विड ज्यादा लें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। साथ ही आराम भी जरूरी है। शरीर के संकेतों को समझें, पूरे महीने हेल्दी डाइट लें, रेगुलर योग व एक्सरसाइज करें, इससे पीरियड्स के दौरान आप तकलीफ से बची रहेंगी। दर्द सहन न हो, तो डॉक्टर को दिखाएं।

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