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अच्छी आदतें:हमारी दादी-नानी बैठकर खाना क्यों बनाती थीं, आयुर्वेदाचार्य से जानें इसके फायदे, मॉडर्न किचन बिगाड़ रहा महिलाओं की सेहत

2 महीने पहलेलेखक: कमला बडोनी
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महिलाओं का अधिकतर समय किचन में बीतता है और मॉडर्न किचन की बनावट उनकी सेहत बिगाड़ रही है। किचन को बदलना मुश्किल है, लेकिन काम करने का तरीका बदलकर महिलाएं कई बीमारियों से बच सकती हैं। डॉ. राहूल मारवाह, एमडी आयुर्वेद, फाउंडर वेदा हेल्थब्लिस आयुर्वेदा, मुंबई बता रहे हैं मॉडर्न किचन से होने वाले नुकसान और उनसे बचने के सही तरीके।

मॉडर्न लाइफस्टाइल ने हमें सुविधाएं दी हैं, तो बदले में बीमारियां भी कम नहीं दी हैं। यदि हम किचन की बात करें, तो मॉडर्न किचन में सारी सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद इसकी बनावट महिलाओं की सेहत बिगाड़ रही है।

बैठकर खाना बनाने के फायदे

हमारी दादी-नानी पारंपरिक रसोई में पीढ़े पर बैठकर खाना बनाती थीं, जिसमें अधिकतर समय उनका एक पैर क्रॉस पोजीशन में जमीन को टच करता था और दूसरा पैर वो मोड़कर अपने पेट से चिपका लेती थीं। डॉ. राहूल मारवाह कहते हैं कि इस पोजीशन में बैठकर खाना बनाना एक तरह की स्ट्रेचिंग एक्टिविटी है, जिससे महिलाओं के पेट, पीठ और हिप की मसल्स पर प्रेशर पड़ता है और वो मूवमेंट में रहते हैं। दिनभर में तीन से चार बार खाना-नाश्ता बनाते समय महिलाएं इसी पोजीशन में रहती थीं, जिससे उनका पेट नहीं बढ़ता था, मोटापा नहीं चढ़ता था और उन्हें लोअर बैक की तकलीफ भी नहीं होती थी। इसके अलावा बर्तन, कपड़े, झाडू-पोंछा का काम भी महिलाएं बैठकर करती थीं, जिससे उनकी अच्छी-खासी एक्सरसाइज हो जाती थी और उनका शरीर स्लिम और फिट रहता था।

मॉडर्न किचन के नुकसान

जब हम खड़े होकर काम करते हैं, तो हमारे शरीर का भार लोअर बैक एरिया और एंकल (टखनों) पर पड़ता है और इन बॉडी पार्ट्स में दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। इसके साथ ही आजकल के किचन की ऊंचाई ढाई से तीन फीट होती है और चूल्हे व बर्तन की ऊंचाई अलग से होती है, इस पोजीशन में काम करने से महिलाओं की शोल्डर पेन, बैक पेन की तकलीफ होने लगती है। आजकल महिलाएं फोन पर बात करते हुए खाना बनाती हैं और फोन को कान और कंधे के बीच में रखकर काम करती हैं। इससे उनका बॉडी मूवमेंट बिगड़ जाता है और गर्दन पर प्रेशर आने से नेक प्रॉब्लम बढ़ जाती है।

मॉडर्न किचन बिगाड़ रहा है महिलाओं का बॉडी शेप

किचन में बहुत देर तक खड़े रहकर काम करने से कई महिलाओं के बैक में कर्व बढ़ जाता है और उनका बॉडी पोस्चर बिगड़ जाता है, उन्हें बैक पेन की तकलीफ होने लगती है। वजन बढ़ने से लोअर बैक, घुटनों और टखनों पर प्रेशर पड़ता और दर्द की शिकायत भी बढ़ जाती है।

योग व एक्सरसाइज से सुधारें सेहत

यदि हम अपनी दिनभर की गतिविधियों पर नजर डालें, तो पाएंगे कि हमारी दिनभर की एक्टिविटी में शरीर की एक मूवमेंट बिल्कुल नहीं होती और वह है फॉरवर्ड बेन्डिंग। हम अपना अधिकतर काम खड़े होकर करते हैं और झुककर कुछ नहीं उठाते, जिसके कारण पेट पर प्रेशर नहीं पड़ता और पेट बढ़ने लगता है। ऐसा महिला और पुरुष दोनों के साथ हो रहा है। इसके लिए योग व एक्सरसाइज बहुत जरूरी है। पद्मासन, बटरफ्लाई, पवनमुक्तासन और मत्स्यासन ये चार योगासन से आप बैक, लोअर बैक और पेट की मसल्स को स्ट्रांग बना सकती हैं। ये योगासन नियमित रूप से करने के बाद यदि आप किचन में लंबे समय तक खड़ी रहती भी हैं, तो आपको तकलीफ नहीं होगी।

किचन के समय में कटौती करें

यदि महिला दिन में दो बार खाना और दो बार चाय-नाश्ता बनाती है, तो इसमें उसे तीन से चार घंटे का समय लगता है। इसके साथ ही हर बार उन्हें बर्तन भी खड़े होकर ही धोने होते हैं यानी कुल मिलाकर महिलाओं को किचन में पांच से छह घंटे खड़े रहना पड़ता है और ये उनकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। किचन में खड़े रहकर काम करने का समय बचाने के लिए सब्जी काटने, आटा गूंधने जैसे काम डायनिंग एरिया या लिविंग रूम में करें और कोशिश करें कि ये काम आप पीढ़े या चटाई पर बैठकर करें। आप इन कामों के लिए घर के अन्य सदस्यों की मदद भी ले सकती हैं।