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World Suicide Prevention Day:हर 40 सेकंड में जा रही एक जान, महिलाओं की तुलना में दोगुने पुरुष कर रहे खुदकुशी

नई दिल्ली15 दिन पहलेलेखक: दीप्ति मिश्रा
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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में खुदकुशी करने वाले पुरुषों की संख्या महिलाओं से दोगुनी है। वहीं दुनिया भर में जान देने के मामले में भारतीय महिलाएं पश्चिमी देशों से आगे हैं।

रात के करीब 11:52 बजे थे। मैं सोने ही जा रही थी कि तभी मोबाइल की घंटी बजी। कोई नंबर था। मैंने फोन उठाया। उधर से आई आवाज सुनकर मैं अवाक रह गई। मेरी नींद अब तक उड़ चुकी थी और मैं तुरंत अस्पताल के लिए निकल पड़ी। दरअसल, मेरी दोस्त सुमेधा (पहचान छिपी हुई) की छोटी बहन ने मुझे फोन किया था। अस्पताल पहुंचने तक मैं मान ही नहीं पाई थी कि सुमेधा अपनी जान लेने की कोशिश भी कर सकती है। मैंने हमेशा उसे हंसते-खिलखिलाते देखा। हर छोटी-बड़ी समस्या को बड़ी ही संजीदगी से सुलझाते देखा था, लेकिन यह सच था। सुमेधा ने खुदकुशी करने की कोशिश की थी।

सुमेधा ब्रेकअप, जॉब जाने और कई अन्य पारिवारिक समस्याओं से जूझ रही थी। उससे बातचीत के दौरान मैंने कभी महसूस नहीं किया कि वह अपनी जान लेने के बारे में भी सोच सकती है। हमारे आसपास भी कई महिलाएं सुमेधा की तरह निराश और परेशान होंगी, जो अपनी झूठी हंसी से असलियत ढक लेती हैं। कुछ नाउम्मीदी को मात दे देती हैं। वहीं कुछ जिंदगी की लड़ाई में हथियार डाल देती हैं। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर एक नजर आंकड़ों पर डालें और जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ...


दुनिया: हर 40 सेकंड में एक मौत
दुनियाभर में आत्महत्या करने की प्रवृति महामारी का रूप ले चुकी है। साल दर साल खुदकुशी करने वालों के बढ़ते आंकड़े डराते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की इसी साल जून में जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल 7 लाख से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं। यानी हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति जान देता है। वहीं दुनिया भर में आत्महत्या के मामलों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या करीब दोगुनी है। डब्ल्यूएचओ (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, आत्महत्या के एक लाख मामलों में 12.6 फीसदी संख्या पुरुषों की है, जबकि महिलाओं की संख्या 5.4 फीसदी ही है।

देश: हर घंटे 15 लोग देते हैं जान
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (Nation Crime Record Bureau) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में साल 2019 में लगभग 1 लाख 40 हजार आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए, जो कि वर्ष 2018 की तुलना में 3.4 फीसदी ज्यादा हैं। देश में हर दिन 381 लोग मौत को गले लगा रहे हैं यानी कि प्रति घंटे 15 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 में आत्महत्या करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है।

आत्महत्या के कारण
आपाधापी भरी जीवनशैली के चलते बढ़ता तनाव, रिश्तों में उतार-चढ़ाव, पारिवारिक समस्याएं, नौकरी जाना, दहेज, घर में कलह, घरेलू हिंसा, सोशल मीडिया पर ब्लैकमेलिंग, प्यार में नाकाम रहने, किसी तरह की लत लगना, परीक्षा में फेल होने और शादी न होने, व्यापार में घाटा होने जैसे कई कारण हैं, जिनके चलते महिलाएं और पुरुष खुदकुशी कर लेते हैं।

क्या अलग-अलग हैं पुरुषों और महिलाओं के जान देने के कारण?
अगर आत्महत्या से जुड़ी खबरों पर गौर किया जाए, तो देखने को मिलता है कि महिलाएं और पुरुषों के खुदकुशी करने के कारण अलग-अलग हैं। जहां पुरुष नौकरी से निकाले जाने, व्यापार में घाटा, कर्ज में डूबने, प्यार में नाकाम रहने और इंटरव्यू या किसी परीक्षा में फेल होने पर मौत को गले लगा लेते हैं। वहीं महिलाएं पारिवारिक समस्याएं, दहेज की मांग, बार-बार शादी टूटना, घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं से तंग आकर अपनी जान देती हैं।

भावनात्मक रूप से मजबूत हैं महिलाएं?
हमारे समाज में महिलाओं को शारीरिक और भावनात्मक रूप से कमजोर माना जाता है। धारणा है कि महिलाएं जरा सी परेशानी आते ही हड़बड़ा जाती हैं, जबकि सच्चाई इसके विपरीत नजर आती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, तनाव की शिकार होने वाली महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में बहुत अधिक है फिर भी आत्महत्या करने वालों में पुरुषों की संख्या, महिलाओं की अपेक्षा दोगुनी है।

क्यों रुक जाती हैं महिलाएंविशेषज्ञों का कहना है कि पुरुष जब भी परेशान होकर आत्महत्या करने की सोचते हैं, तब वे सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं। वहीं हताश और निराश होकर जब भी महिलाएं आत्महत्या करने के बारे में सोचती हैं, तब अक्सर उनके मन में परिवार और बच्चों का ख्याल भी होता है कि उनके बाद माता-पिता का या बच्चों का क्या होगा? लोग क्या कहेंगे? इस तरह के विचार उन्हें आत्महत्या करने से रोक लेते हैं। उदाहरण के लिए - अक्सर खबरों में आता है कि बच्चों समेत महिला ने खुदकुशी की, जबकि इस तरह के मामले पुरुषों को लेकर रेयर ही मिलते हैं। इसके पीछे विशेषज्ञ बच्चों के प्रति मां की जिम्मेदारी के भाव को भी मानते हैं। वहीं इस जिम्मेदारी के भाव के चलते ही कई महिलाएं खौफनाक कदम उठाते हुए बच्चों समेत खुद को खत्म कर लेती हैं। ऐसे मामले भारत में ज्यादा हैं।

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