आपकी किडनी फेल और 'दिमाग पका' सकता है खराब तवा:मॉडर्न बनने के चक्कर में घरवालों को कबाड़ा तो नहीं खिला रही हैं आप

8 महीने पहले
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आप किचन में रोटी तो रोज बनाती हैं, लेकिन आप क्या ये जानती हैं कि आपका तवा कितना सेफ या रिस्की हो सकता है? डाइटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट शिल्पा मित्तल बता रही हैं गलत तवे के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान और सही तवा चुनने के आसान तरीके।

किचन में रोज इस्तेमाल होने वाले तवे की बात करें, तो इसका गलत चुनाव भी आपकी सेहत को खराब कर सकता है।
किचन में रोज इस्तेमाल होने वाले तवे की बात करें, तो इसका गलत चुनाव भी आपकी सेहत को खराब कर सकता है।

घर की महिलाएं खाना तो बहुत प्यार से बनाती हैं, अपने परिवार की सेहत का पूरा ध्यान रखती हैं, लेकिन कई बार गलत बर्तनों का चुनाव परिवार की सेहत पर भारी पड़ सकता है। यदि हम किचन में रोज इस्तेमाल होने वाले तवे की बात करें, तो इसका गलत चुनाव आपकी सेहत बिगाड़ सकता है।

डाइटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट शिल्पा मित्तल के अनुसार, मिट्टी और लोहे का तवा सेहत के लिए फायदेमंद होता है। लोहे के तवे में बनी रोटियों में आयरन कंटेंट बढ़ जाता है। मिटटी के तवे पर रोटी बनाने से मिट्टी के मिनरल्स मिलते हैं और प्रकृति से जुड़ाव बढ़ता है। आजकल मार्केट में एनोडाइज्ड तवा मिलते हैं, इनका उपयोग तब तक ही करना चाहिए, जब तक इनकी कोटिंग बरकरार है। कोटिंग निकल जाने के बाद इनका उपयोग हानिकारक हो सकता है इसलिए इन्हें बदल देना चाहिए।

कब न करें एनोडाइज्ड तवे का इस्तेमाल

आजकल मॉडर्न बनने के चक्कर में और सुविधा के लिए लोग एनोडाइज्ड तवा, पैन, कड़ाही आदि का इस्तेमाल करने लगे हैं। एनोडाइज्ड तवा या कड़ाही तब तक सुरक्षित होते हैं, जब तक इन पर कोटिंग लगी रहती है, कोटिंग निकल जाने के बाद इसका इस्तेमाल हानिकारक हो सकता है।

एनोडाइज्ड तवा या कड़ाही तभी तक सुरक्षित होते हैं, जब तक इन पर कोटिंग रहती है। कोटिंग उतर गई तो ये हानिकारक हो सकते हैं।
एनोडाइज्ड तवा या कड़ाही तभी तक सुरक्षित होते हैं, जब तक इन पर कोटिंग रहती है। कोटिंग उतर गई तो ये हानिकारक हो सकते हैं।

एल्युमीनियम के बर्तनों से होने वाले नुकसान

एनोडाइज्ड बर्तन वो हैं, जिनमें एल्युमीनियम के बर्तनों पर एक सुरक्षित कोटिंग की जाती है, ताकि उनका उपयोग हानिकारक न हो। लेकिन कई महिलाएं कोटिंग निकल जाने के बाद भी उन बर्तनों का उपयोग करती रहती हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक होता है। एल्युमीनियम बहुत जल्दी गर्म हो जाता है और इसके हानिकारक एजेंट भोजन के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। फिर भोजन के माध्यम से शरीर के अंदर पहुंचकर ये एजेंट शरीर को नुकसान पहुचाते हैं।

किडनी खराब होने से लेकर दिमाग तक पर असर
लंबे समय तक एल्युमीनियम के बर्तनों में पके भोजन के सेवन से शरीर में एल्युमीनियम की मात्रा बढ़ जाती है, जिसके कारण टीबी, किडनी फेलियर, अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यदि एल्युमीनियम के बर्तन में खाना बनाना जरूरी हो, तो बनाने के बाद बर्तन में से भोजन निकालकर दूसरे बर्तन में रख दें, ताकि भोजन लंबे समय तक एल्युमीनियम के संपर्क में न रहे।

जल्दी क्यों निकल जाती है एनोडाइज्ड बर्तनों की कोटिंग

कई महिलाएं एनोडाइज्ड बर्तनों की सफाई भी रेगुलर स्क्रबर से करती हैं, जिससे इनकी कोटिंग जल्दी निकल जाती है और उसके बाद इनका उपयोग हानिकारक हो सकता है। एनोडाइज्ड बर्तनों की सफाई घर के अन्य बर्तनों की तरह न करें। इन बर्तनों को धातु के स्क्रबर से साफ न करें, इनकी सफाई के लिए स्पंज या डिश रैग का इस्तेमाल करें। इससे कोटिंग जल्दी नहीं निकलेगी और आपके बर्तन लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे। इसके साथ ही इनको यूज करके समय हार्ड तरीके से लैडल या किसी पलटे का इस्तेमाल न करें।

एनोडाइज्ड तवा या कड़ाही को ऐसे साफ करें

एनोडाइज्ड बर्तनों पर चिकनाई जम जाती है। इसे साफ करने के लिए यह आसान तरीका ट्राई करें- एक बड़े बर्तन में पानी गरम करें। बर्तन इतना बड़ा हो कि एनोडाइज्ड बर्तन को उसमें रखा जा सके। पानी उबल जाने पर इसमें चार टीस्पून बेकिंग सोडा, दो चम्मच डिटर्जेंट पाउडर, एक चम्मच विनेगर, एक नींबू का रस और दो चम्मच लिक्विड डिश वॉशर डालें। अब इस पानी में चिकनाई लगा तवा या कड़ाही डाल दें और पानी ठंडा होने तक बर्तन को उसी में रहने दें। फिर स्क्रबर से बर्तन को साफ कर दें, चिकनाई निकल जाएगी।