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  • 6 Women Of Assam Together Made 100% Compostable Yoga Mats, Did This Work To Save The Local Beel Lake From Hyacinth

सराहनीय पहल:असम की 6 महिलाओं ने मिलकर बनाई शत प्रतिशत कंपोस्टेबल योगा मैट्स, यहां की स्थानीय बील लेक को जलकुंभी से बचाने के लिए किया ये काम

25 दिन पहले
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असम की बील लेक को जलकुंभी से बचाने के लिए 6 महिलाओं ने 100% बायोडिग्रेडेबल योगा मैट्स बनाने का काम शुरू किया। ये वही झील है जिसे जलकुंभी से बचाने का प्रयास इससे पहले अपने स्तर पर कई पर्यावरणविद भी कर चुके हैं। इसी कड़ी में 6 महिलाओं ने एवनायरोमेंट फ्रेंडली बायोडिग्रेडेबल योगा मैट्स बनाई हैं। फरवरी 2021 से इन महिलाओं ने योगा मैट्स को अपनी आमदनी का जरिया बनाया और अच्छी खास कमाई भी की। इन महिलाओं में से एक मिताली मेनू दास ने बताया कि इस झील में मौजूद जलकुंभी से मछुआरे और अप्रवासी पक्षी प्रभावित हो रहे थे।

मिताली और उसके साथ जुड़ी 5 महिलाओं ने इस समस्या का हल निकालने के लिए मछलियों को पकड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाली जाली से सस्टेनेबल बैग्स बनाए। उसके बाद अपने काम को विस्तार देते हुए इन महिलाओं ने योगा मैट्स बनाने की शुरुआत की। मिताली की टीम मेंबर रूमी दास ने बताया कि ये मैट्स झील से जलकुंभी को निकालने के बाद उसे धूप में सूखाकर बनाए जाते हैं। लगभग 12 किलो जलकुंभी सूखकर 2 से 3 किलो रह जाती हैं। इसके तने से सूती धागे बनाए जाते हैं जिससे बाद में मैट्स तैयार होती हैं।

रूमी के अनुसार, इसे बनाने में किसी तरह के आर्टिफिशियल कलर या केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता है। इन कलर को नैचुरल डाइ से तैयार किया जाता है जो देखने में बहुत सुंदर लगती है। इनके साथ काम करने वाली अन्य महिलाओं के नाम ममोनी दास, भांति दास, सीता दास और मिताली दास हैं। इनके द्वारा डिजाइन की गई योगा मैट्स की कीमत 1,200 से 1,500 के बीच है। मिताली कहती हैं कि हम अपने इस काम से गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। हम चाहते हैं कि इस काम में हमारे साथ ज्यादा से ज्यादा महिलाएं जुड़ें। हम सभी महिलाएं गांव की महिलाओं को योगा मैट्स बनाने की फ्री ट्रेनिंग देकर सशक्त बनाना चाहते हैं।