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डाउनलोड करेंवीमेन डेस्क. देश में अमन का पैगाम देने का जुनून और फिटनेस के लिए दौड़ने के जज्बे ने सूफिया खान को आम से खास बना दिया है। उन्हें उस लाइन में लाकर खड़ा कर दिया है जहां बराबरी की मिसाल दी जाती हैं। जहां पुरुष-महिला का भेद नहीं है और समाज की बेड़ियों को तोड़कर कुछ हासिल करने की खूबसूरत तस्वीर नजर आती है। राजस्थान के अजमेर की सूफिया ने 87 दिनों में 4 हजार किलोमीटर की दौड़ पूरी करके गिनीज रिकॉर्ड बनाया है। लेकिन वह न तो थकीं हैं और न रुकी हैं। फिर रिकॉर्ड बनाने के लिए उन्होंने एक नया लक्ष्य तय किया है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 'बंदिशों की बेड़ियां, बराबरी की कहानियां' थीम की एक और अहम किरदार हैं 33 साल की सूफिया। जो कहती हैं अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए सबसे बेहतर जरिया है रनिंग। दैनिक भास्कर से हुई बातचीत में उन्होंने बताई अपनी कहानी। पढ़िए उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी...
जॉब छोड़कर देश को दिया संदेश
16 साल की उम्र में पिता को खोने के बाद मां ने परवरिश की। पढ़ाई पूरी करते ही दिल्ली में एविएशन इंडस्ट्री में बतौर जॉब शुरू की थी। खुद को फिट रखने के लिए दौड़ लगानी शुरू और यही मेरा जुनून बन गया। इस जुनून को कायम रखते हुए 10 साल पुरानी नौकरी छोड़ दी।

दिन की शुरुआत सुबह 4 बजे होती थी
दिन की शुरुआत सुबह 4 बजे होती थी। अलग-अलग मिजाज वाले शहरों से निकलते समय कई बार बीमार हुई। श्रीनगर बेहद ठंडा था तो वहीं पंजाब और दक्षिण के शहरों में गर्मी ज्यादा थी इसलिए डिहाइड्रेशन से जूझना पड़ा। कुछ शहरों में इतनी ज्यादा धूल-मिट्टी थी कि फेफड़ों में इंफेक्शन हो गया। 4 दिन तक जालंधर में भर्ती रही। इस दौरान कुछ स्थानीय बुजुर्ग लोगों ने मदद की। अगर बीमारी नहीं पड़ती तो शायद ये सफर 87 दिनों से भी पहले पूरा हो गया होता। सफर की खास बात रही कि जिसे भी मेरे बारे में पता चलता वो भी मेरे कुछ दूर तक दौड़ता था। पुलवामा से गुजरते समय सेना ने जवान भी मेरी जर्नी के साथी बने।

रनिंग में रिकॉर्ड बनाने में तीन पड़ाव
बात तीन साल पुरानी है, जब मैंने रनिंग इवेंट में हिस्सा लेना शुरू किया। धीरे-धीरे मैराथन का हिस्सा बनीं। फिटनेस के लिए दौड़ना मेरा पैशन बन गया और 2018 ग्रेट इंडियन गोल्डन ट्राईएंगल (नई दिल्ली, आगरा, जयपुर) के 720 किमी सफर महज 16 दिनों में पूरा करके रिकॉर्ड बनाया। यह पहली कामयाबी थी जब नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ।
पहले पड़ाव के बाद मैंने ‘रन फॉर होप’ मिशन की शुरुआत की। होप यानी H - Humanity (मानवता), O - Oneness (एकता), P - Peace (शांति), E - Equity (समानता)। रनिंग के साथ देश के कोने-कोने में एकता, शांति और समानता का संदेश देने का लक्ष्य बनाया। सफर की शुरुआत कश्मीर के श्रीनगर से 25 अप्रैल 2019 से हुई जो 21 जुलाई को कन्याकुमारी में खत्म हुआ। मैं इस दौरान 22 शहरों से गुजरी और रोजाना 50 किलोमीटर दौड़ी। 4035 किमी का सफर 100 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य बनाया जिसे 87 दिनों में पूरा किया। इसे गिनीज रिकॉर्ड में शामिल किया गया।
अब दौड़ के तीसरे पड़ाव की तैयारी कर रही हूं। स्वर्णिम चतुर्भुज (दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई और मुंबई की दूरी) को महज 150 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य बनाया है। इसकी शुरुआत 8 फरवरी से हुई है। 2016 तक ये रिकॉर्ड पुणे की मिशेल ककाड़े के नाम है। उन्होंने 193 दिन, 1 घंटे, 9 मिनट में 5963.4 किलो मीटर का सफर तय किया था। मैंने इसे पूरा करने के लिए 150 दिनों का टार्गेट रखा है।
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