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सिर्फ 34 साल उम्र में सारे 193 देश घूम लिए मेलिसा ने, परिवार ने कभी नहीं चाहा था कि लड़की ऐसा करे

एक वर्ष पहले
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  • ट्रैवेलिंग का ऐसा जुनून था कि कॉलेज की पढ़ाई समुद्र यात्रा के दौरान की
  • 30 की उम्र में घूम लिए थे दुनिया के 100 देश, अंटार्कटिका में मनाया बर्थडे

नाम : मेलिसा रॉय

उम्र : 34 साल 

उपलब्धि : दुनिया के सभी 193 देश घूमने वाली पहली दक्षिणी-एशियाई महिला। 


अनजाने देश पहुंचना, अंजान लोगों के घरों में रहना, सफर के लिए खर्च भी खुद ही जुटाना और महज 34 साल की उम्र वो कर जाना जो ज्यादातर औरतों को नामुमकिन लगता है लेकिन है नहीं। ऐसी हैं मेलिसा रॉय। मेलिसा की सोच और विजन एकदम साफ रहा है। कॉलेज के समय में एक लक्ष्य तय किया और उसे पूरा करके दुनिया को चौंकाया। 193 देशों की यात्रा का अंतिम पड़ाव था बांग्लादेश, जिसे मेलिसा ने 31 दिसम्बर 2019 को पूरा किया। लेकिन ये सफर इतना भी आसान नहीं था। 
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 'बंदिशों की बेड़ियां, बराबरी की कहानियां' थीम की एक और अहम किरदार हैं मेलिसा। जो कहती हैं अपने अंदर का डर निकालना है तो बाहर निकलिए, पढ़िए उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी...

पहला लक्ष्य 100 दिनों में 12 देश की यात्रा
अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में  कॉलेज की पढ़ाई करते समय ही मैंने यह तय कर लिया था कि एक दिन अपने दम पर दुनिया देखूंगी। इसकी शुरुआत गर्मियों की छुटि्टयों से हुई और पहली यात्रा के लिए दक्षिण अमेरिका का रुख किया। 1,000 स्टूडेंट्स के साथ एक विशाल क्रूज पर रही,जहां से दुनिया भर के खूबसूरत नजारों को दिलो-दिमाग में कैद किया। धीरे-धीरे 100 दिनों में 12 देशों का लक्ष्य रखा और उसे पूरा किया। ट्रैवेलिंग का ऐसा जुनून था कि कॉलेज के फाइनल ईयर सेमेस्टर की पढ़ाई समुद्र यात्रा के दौरान ही की। 

अंतिम कदम पिता की कर्मभूमि बांग्लादेश में रखा
मेरा जन्म 28 नवंबर 1985 को अमेरिका के मिशिगन के मोनरो में हुआ लेकिन बांग्लादेश मेरी यात्रा का अंतिम पड़ाव था, इसकी कई वजह हैं। मैं दुनिया का पूरा गोल चक्कर लगाना चाहती थी और यह मेरे लिए मेरी पुश्तैनी मातृभूमि पर घर वापसी जैसा है। मेरा परिवार बांग्लादेश से था इसलिए यह देश इस बात का प्रतीक है कि मैं कौन हूं, यहीं मेरी जड़ें है, मेरे पिता, मेरे दादा और नाना दोनों का जन्मस्थान यही है।

ऐसे लगाया दुनिया का चक्कर, 5 पड़ाव 
यात्रा का लक्ष्य तय करना जितना आसान था उतना मुश्किल था पैसे जुटाना। अब तक दुनिया का चक्कर लगाने वाले ज्यादातर लोग स्पॉन्सरशिप के जरिए सफर पूरा कर चुके हैं लेकिन इस दौरान न तो मैंने किसी से स्पॉन्सरशिप ली और न ही कोई यात्रा मुफ्त में की। 
यात्रा के लिए पैसे जुटाने के लिए लॉस एंजिल्स जाती थी कमर्शियल विज्ञापन करती थी। एक तय अमाउंट इकट्ठा होने के वापस सफर पर निकल पड़ती थी।
अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मैंने वेबसाइट का सहारा लिया। लोगों से रास्ता पूछ कर घूमने की बजाय होम स्टे काउचसर्फिंग के जरिए दुनियाभर के स्थानीय लोगों के घरों में मुफ्त में रहने की जगह हासिल की।
काउचसर्फिंग अच्छा है, क्योंकि इससे आपको एक देश में वीआईपी ट्रीटमेंट मिलता है। वेनेजुएला के राजनीतिक और आर्थिक संकटों के बीच बढ़ते तनाव के दौरान कोलंबिया से वेनेजुएला तक पैदल चलकर सीमा पार की।
मैं मध्य पूर्व में बहरीन, कुवैत, कतर और अन्य देशों में घूमने के बाद वह 2019 में मध्य में लौटी और अफग़ानिस्तान में अपना 34 वां जन्मदिन मनाया।

अंटार्कटिका में 30 वां जन्मदिन मनाया
एक साल में 34 देशों की यात्रा करने के बाद, अंटार्कटिका में अपना 30 वां जन्मदिन मनाया। यहां समय बिताना जीवन के सबसे यादगार पलाें में से एक थे। सबकुछ बिल्कुल वैसा ही था जैसा आप सपने में देखते हैं। इस तरह 30 साल की उम्र तक दुनियाभर के 100 देशों की यात्रा पूरी की। अंटार्कटिका का दौरा करने के बाद, उन देशों की भी यात्रा की, जो लिस्ट में नहीं थे। ओशिनिया द्वीप के लिए निकली और अफ्रीका महाद्वीप के सभी देशों की यात्रा करने के लिए 12 महीनों में तीन बार ट्रिप प्लान की।