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सर्वे:प्रेग्नेंसी में मेटल व पेस्टिसाइड के संपर्क में रहने वाली महिलाओं के बच्चों को ऑटिज्म का खतरा, बच्चों के शरीर में मिली कैडमियम, लेड और थैलेट्स की अधिक मात्रा

2 महीने पहले
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जो महिलाएं प्रेग्नेंसी में इंडस्ट्रियल केमिकल जैसे मेटल या पेस्टिसाइड्स के संपर्क में रहती हैं, उनसे पैदा होने वाले बच्चे ऑटिज्म का शिकार हो सकते हैं। हाल में किए गए सर्वे में ये बात सामने आई है। यह सर्वे सिमोना फ्रेजर यूनिवर्सिटी के रिसचर्स ने किया। इसके अंतर्गत कनाडा की महिलाओं में प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने के दौरान ब्लड और यूरिन के सैंपल लेने पर 25 केमिकल्स पाए गए। उन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान केमिकल के संपर्क में रहने का शिशु में होने वाली ऑटिज्म की बीमारी से डायरेक्ट कनेक्शन बताया।

वे केमिकल जो गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, उनमें मेटल्स, पेस्टिसाइड्स, पॉलीक्लोरिनेटेड बाइफिनाइल्स, थैलेट्स और बीस्फेनॉल-ए शामिल हैं। प्रेग्नेंसी और डिलिवरी के बाद शिशु पर इन केमिकल का प्रभाव जानने के लिए कनाडा के दस शहरों की टीम ने मेटरनल इन्फेंट रिसर्च ऑन एनवायरोमेंट केमिकल्स पर स्टडी की। 2008 से 2011 के बीच इन महिलाओं के शुरुआती तीन महीनों पर सर्वे किया गया। फिर डिलीवरी के बाद शिशु पर केमिकल के प्रभावों को देखा गया। इन महिलाओं द्वारा जन्मे 3-4 साल के 600 बच्चों पर रिसर्च किया गया।

रिसर्चर्स ने बच्चों में ऑटिज्म के गंभीर प्रभाव देखें और उन्हें टी-स्कोर दिया। जब इन बच्चों के यूरिन और ब्लड का सैंपल लिया गया तो उसमें कैडमियम, लेड और थैलेट्स की अधिक मात्रा देखी गई। बच्चों के स्वभाव में बदलाव और ऑटिज्म की वजह ये केमिकल रहे। ये रिसर्च अमेरिकन जर्नल ऑफ एपिडेमोलॉजी में भी प्रकाशित की गई।

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