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बहू-ससुर का दोस्ताना रिश्ता:डिंपल यादव, काजोल और अब कटरीना रख रहीं रिश्ते की नई बुनियाद, सास के 'ओहदे पर संकट'

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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कटरीना कैफ की अपने ससुर शाम कौशल के साथ डांस करती तस्वीर खूब वायरल हुई और इसे खूब पसंद किया गया। हिंदुस्तानी परिवार में सास-बहू के रिश्ते हमेशा से ही चर्चा में रहे हैं। ऐसे में दो पीढ़ियों के अहम किरदार के रूप में ससुर और बहू के मधुर बनते रिश्ते आज के भारतीय समाज में ससुराल की उदारवादी परिभाषा गढ़ रहे हैं।

ससुर और बहू दोनों के रिश्तों में पहले से अधिक नजदीकियां नजर आती हैं।
ससुर और बहू दोनों के रिश्तों में पहले से अधिक नजदीकियां नजर आती हैं।

जब ससुर ने साथ दिया बहू का
मेंटल हेल्थ एंड वेलनेस क्लीनिक मनस्थली की फाउंडर डाॅ. ज्योति कपूर बताती हैं कि एक मामले में सास की बहू से बिल्कुल नहीं बनती थी। दोनों में टकराव इतना बढ़ गया कि बहू को यह महसूस हो गया कि सास के साथ उसका गुजारा संभव नहीं है। पति ने भी इस मामले पर चुप्पी साध रखी थी इसलिए पत्नी को यह लगा कि अब सेपरेशन ही चारा रह गया है।

डॉ. कपूर ने बताया कि इस केस में फादर-इन-लॉ ने अपनी पत्नी को उसकी गलतियों के बारे में बताया। ससुर ने ही सास को समझाया कि वो गलतियों को दूर करें और बहू की बात को समझें। इससे घर सेपरेशन और डिवोर्स जैसे कड़वे अनुभवों से बचा रहेगा।

ससुर का भरोसा बेटे के तुलना में शिक्षित बहुओं पर अधिक बढ़ता दिखता है।
ससुर का भरोसा बेटे के तुलना में शिक्षित बहुओं पर अधिक बढ़ता दिखता है।

जब ससुर ने निभाया पिता जैसा रोल
नई दिल्ली के एक सभ्य घर में अधेड़ उम्र की महिला को ‘ऑब्सेसिव कंप्लशन डिसॉर्डर’ की समस्या थी। जब तक बहू घर में नहीं आई थी, तब तक पति और बेटा उनके अजीबोगरीब व्यवहार को नजरअंदाज कर रहे लेकिन बेटे की शादी के बाद स्थिति बदल गई। बहू को सास के व्यवहार से तकलीफ होने लगी।
ससुर यह समझने लगे थे कि नई बहू शिकायत करने के बजाय खुद में घुटती रहती है। इसके बाद वे अपनी पत्नी को इलाज के लिए मनोचिकित्सक के पास ले गए और एक घर टूटने से बच गया।

क्यों सास का रिश्ता पीछे छूट रहा है?
‘इन-लॉ रिलेशनशिप : मदर्स, डॉटर्स, फादर्स, सन्स’ के लेखक जोफ्री ग्रिफ के अनुसार, शादियों में केवल पति-पत्नी ही आपस में नहीं मिलते, बल्कि सास-ससुर जैसे नए रिश्ते भी बनते हैं, जिनके साथ परिवार के सभी सदस्य छोटी-बड़ी खुशियां और परेशानियां शेयर करते हैं। करीब 1500 सास-ससुर पर हुए अध्ययन में उन्होंने पाया कि आज बहुओं का ‘इन-लॉज’ के साथ प्यार और नजदीकियां बढ़ी हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कुछ लोगों से यह रिश्ते अभी भी संभाले नहीं संभल रहे। जहां तक सास-बहू के रिश्ते का सवाल है, तो इस किताब में यह भी लिखा गया है कि सास के मन में बहू को लेकर यह संदेह बना होता है कि ‘क्या बहू उसे मां की जगह दे पाएगी?’

सीनियर साइकेट्रिस्ट डाॅ. ज्योति कपूर कहती हैं कि भारतीय समाज में सास के कई तरह के भय होते हैं। उन्हें लगता है कि अब बेटे को शेयर करना होगा। उसे यह भी लगता है कि रसोई की व्यवस्था उसके हाथ से निकल जाएगी। घर का निजाम भी बहू के हाथों में आ जाएगा। इन वजहों से वह बहू को प्रतियोगी के रूप में देखती है। इसके ठीक उलट ससुर को ऐसी किसी बात का कोई भय नहीं होता कि आज जो चीज उनकी है, वह बहू के आने के कारण उनसे छिनने वाली है।

समाचार, नई तकनीक, मोबाइल जैसी चीजें इनके बीच बॉन्डिंग का माध्यम बन रही हैं।
समाचार, नई तकनीक, मोबाइल जैसी चीजें इनके बीच बॉन्डिंग का माध्यम बन रही हैं।

ससुर में पिता को ढूढ़ती हैं बहू
अध्ययन बताते हैं कि पिता और पुत्री का रिश्ता बहुत ही गहरा होता है। यूएस की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में 700 परिवारों पर 5 साल तक हुए अध्ययन में पाया गया कि जिन लड़कियों को पिता का भरपूर प्यार मिला उन्हाेंने जीवन में कभी भी अकेलापन महसूस नहीं किया। इस शोध से जुड़े अध्ययनकर्ताओं ने माना कि उदासी या तनाव से गुजर रही बेटियों को पिता का साथ मिले, तो इससे अच्छी दवा दूसरी नहीं हो सकती।

साइकेट्रिस्ट डॉ. ज्योति कपूर के अनुसार आज लड़कियां अपने ससुर में अपना पिता तलाश रही हैं। वहीं ससुर भी बहुओं को इंटेलिजेंट मानते हैं। उनसे ऑफिस की बातें शेयर करते हैं। उनके आइडियाज पर भरोसा जताते हैं। मोबाइल और इंटरनेट से जुड़ी जरूरतों के लिए उन पर निर्भर करते है। ससुर-बहू के बीच बने इस नए समीकरण का पूरे परिवार पर अच्छा असर पड़ता हैं। सास को यह महसूस होता है कि शादी के बाद बेटे का झुकाव तो पत्नी की ओर बढ़ा ही है कहीं ससुर भी बहू के सपोर्ट में न आ जाए। ऐसे में वह खुद भी अपने बर्ताव में नरमी लाने का प्रयास करती है।

ससुराल में ससुर-बहू का रिश्ता पिता-पुत्री के रिश्ते का विकसित रूप जैसा है।
ससुराल में ससुर-बहू का रिश्ता पिता-पुत्री के रिश्ते का विकसित रूप जैसा है।

सेलिब्रिटी ससुर-बहू के मीठे रिश्ते
एक बार मुलायम सिंह यादव से सदन में अशिष्टता से बात कर रहे विपक्षी पार्टी के सदस्य का विरोध करते हुए उनकी बहू डिंपल यादव ने भरे सदन में पलटकर कहा था कि ‘आपको’ इनसे इस तरह बात नहीं करनी चाहिए। अपनी बात को खुलकर कहने वाली अभिनेत्री काजोल ने भी एक बार फिल्मफेयर अवार्ड लेते समय अपने ससुर वीरू देवगन को स्टेज पर बुलाकर उनसे सम्मान लिया था। अमिताभ भी अक्सर इवेंट्स में ऐश्वर्य के साथ नजर आते हैं। यह सारे उदाहरण इस बात की पैरवी करते हैं कि समाज में धीमे-धीमे ही सही, एक पॉजिटिव बदलाव की शुरुआत हो चुकी है, जो रिश्तों को सहेजने और बचाए रखने के लिए अच्छा कदम है।