कर्ज लेकर विवाह करना पड़ा महंगा:बच्चे होने के बाद भी चुका रहे पैसे, रिकवरी एजेंट के निशाने पर परिवार

नई दिल्ली6 महीने पहले
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शादी की खातिर लाखों रुपए कर्ज में लिए जाते हैं। महंगे दरों पर खुले बाजार से लिए गया उधार को समय रहते नहीं चुकाने पर पूरा परिवार रिकवरी एजेंट के निशाने पर आ जाता है।

शादी के लोन को चुकाने के कारण दूसरी जगह निवेश करना संभव नहीं हो पाता।
शादी के लोन को चुकाने के कारण दूसरी जगह निवेश करना संभव नहीं हो पाता।

मजबूरी बन जाती है मुसीबत
राजस्थान के भेरूलाल सूर्यवंशी ने साल 2011 में अपनी शादी के लिए करीब 88 हजार रुपए का लोन लिया था। यह बढ़कर 3 लाख हो गया है। दो बच्चे होने के बावजूद भी वह आज ब्याज की राशि चुका रहे हैं।

कई बार शादी के लिए लोन लेते समय सभी जरूरी पेपर नहीं होने की वजह से व्यक्ति को सरकारी बैंक से लोन नहीं मिलता। इस कारण से उन्हें लोकल मार्केट से कर्ज लेना पड़ता है, जहां ‘रेट ऑफ इंटरेस्ट’ बहुत ज्यादा होता है। साथ ही इसकी सीमा तय नहीं होती।

वित्तीय मामलों के सलाहकार जितेंद्र सोलंकी कहते हैं कि इस तरह के कर्ज समय पर न चुकाएं जाएं, तो ब्याज बढ़ने के साथ-साथ पैसा वसूली के खराब तरीके भी अपनाए जाते हैं। कई बार लोन लेने वाला ही नहीं उसके परिवार पर भी खतरा मंडराता है। समय पर ईएमआई नहीं चुकाने पर रिकवरी एजेंट पैसे को वसूलने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। वहीं सरकारी बैंक में रिजर्व बैंक के बनाए नियमों के अंदर ही रिकवरी की जाती है।

समय पर ईएमआई नहीं चुकाने से रिकवरी एजेंट का खतरा हमेशा मंडराता रहता है।
समय पर ईएमआई नहीं चुकाने से रिकवरी एजेंट का खतरा हमेशा मंडराता रहता है।

लोन की आफत जान पर
वहीं दिल्ली के चांदनी चौक में खिलौने की दुकान में काम करने वाले एक मुस्तकीम शेख (नाम बदलकर) ने बताया कि उन्होंने अपनी दो बेटियों की शादी के लिए ओपन मार्केट से करीब 19.5 % के ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा।

लोन का ईएमआई समय पर नहीं चुकाने की वजह से रिकवरी एजेंट का फोन आना शुरू हो गया। एक-दो बार वसूली एजेंट घर आकर भी धमका गया। वह कहते हैं कि गांव में बची एकमात्र खेती की जमीन को बेचकर वह इस मुसीबत से छुटकारा पाने की सोच रहे हैं। भर्राई अवाज से यह बात कहते वक्त उनकी जुबान तक लड़खड़ाने लगती है क्योंकि इस जमीन को वह अपने बुढ़ापे का सहारा मानते हैं।

रिश्तेदारों से छिपाते हैं लोन की बात
हिंदुस्तानी समाज में शादियों में काफी खर्च किया जाता है। इस खास मौके पर रिश्तेदारों के लेन-देन, वर-वधू की पसंद-नापसंद से जुड़ी चीजों पर पानी की तरह पैसे बहाए जाते हैं। अगर पेरेंट्स अपने बेटे-बेटी की शादी पर पैसे खर्च नहीं करते हैं, तो उन्हें सामाजिक आलोचना का शिकार होना पड़ता है। शायद यही वजह है कि ज्यादातर पेरेंट्स शादियों के लिए कर्ज लेते हैं। रिश्तेदारों की बजाय बैंक या ओपन मार्केट से कर्ज लेने के पीछे उनकी यही मंशा होती है कि कर्ज का भेद बाहरवालों पर न खुलें।

एचडीएफसी बैंक में डिप्टी मैनेजर सलोनी सिसोदिया स्वीकारती हैं कि ओपन मार्केट से मिलने वाले लोन का ब्याज 30% तक भी चला जाता है। इस मार्केट में इस संबंध में कुछ भी फिक्स नहीं होता है। ऐसे में इंटरेस्ट चुकाना ही बड़ी बात हो जाती है मूलधन तो बाद की बात है।

पेरेंट्स पर ही होता है कर्ज का बोझ
ज्यादातर बैंकों में मैरिज लोन की अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। शादी के लिए लोन लने वाले ज्यादातर लोगों को पर्सनल लोन लेना पड़ता है। लखनऊ के अनिल श्रीवास्तव (नाम बदलकर) ने अपनी बेटी के शादी के लिए पर्सनल लोन लिया था क्योंकि उन्हें लड़केवालों की तरफ से आई कैश की डिमांड को पूरा करना पड़ा था।
आईडीबीआई बैंक में कार्यरत एक महिला अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर पर्सनल लोन 9.5 से 12.5 या 13.5% के बीच होता है। इस लोन के लिए आवेदन करने वालों का पुराना बैंक रिकॉर्ड (सिविल रिकॉर्ड) देखने के बाद ही लोन पर इंटरेस्ट रेट तय होता है। व्यक्ति का पेमेंट रिकॉर्ड अच्छा होने पर ब्याज की दर 10.75 से 11% के बीच हो सकती है।

इसके अलावा सैलरी अच्छी हो और कोई दूसरी बड़ी देनदारी नहीं हो, तो ब्याज की दर और भी कम हो जाती है।अगर पहले कभी लोन नहीं लिया है, (क्रेडिट हिस्ट्री) तो उनको करीब 11% ब्याज की दर पर लोन मिल जाता है। आईडीबीआई में पर्सनल लोन की लिमिट 5 लाख रुपए है। शादी के लिए पर्सनल लोन अप्लाई करने वालों में ज्यादातर नौकरीपेशा लोग होते है।आज भी पेरेंट्स ही शादी के लिए कर्ज लेते हैं। अपनी शादी के लिए कर्ज लेने वाले युवाओं की संख्या अभी भी बहुत कम है।

घरवालों पर भी मंडराता है खतरा
नोएडा के एचडीएफसी बैंक में क्लासिक रिलेशनशिप मैनेजर नीतिश अग्रवाल बताते हैं कि जहां तक एचडीएफसी बैंक की बात है, तो वहां पर्सनल लोन और मैरिज लोन में बस एक अंतर है कि शादी के लिए जाने वाले कर्ज को शादी के ही खर्चों में दिखाया जाता है। वहीं पर्सनल लोन का पैसा कहीं भी खर्च किया जा सकता है। पर्सनल लोन की तुलना में यह थोड़ा कम भी हो सकता हहै। इसे बैंक की ‘सीएसआर’ एक्टिविटी बेहतर है। हालांकि इसमें भी पर्सनल लोन की तरह ही डॉक्यूमेंटेशन पड़ता है।

फाइनेन्स एक्सपर्ट जितेंद्र सोलंकी के अनुसार सरकारी बैंक से लोन लेने में ही समझदारी है। सरकारी बैंकों में वसूली करने के लिए नियम और कायदे होते हैं। उतनी ही रकम वसूली जाती है जितने की लेनदारी होती है। बाहर सेर्ज लेने पर तय रकम से ज्यादा की वसूली की जाती है।