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  • From Pani Puri To Halwa Paratha, These 5 Chefs Missing Their Favorite Street Food In Lockdown, Describing Their Food Love On Social Media

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खाने के शौकीन ये शेफ:पानी पूरी से हलवा पराठा तक, लॉकडाउन में फेवरेट स्ट्रीट फूड को मिस कर रहे ये 5 शेफ, सोशल मीडिया पर यूं बयां किया अपना फूड लव

5 महीने पहले
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  • डोमा सेंट्रल कोलकाता की गलियों में मिलने वाले प्यारे कबाब को मिस कर रही हैं
  • दिल्ली में रहने के बाद भी संचित कटक के दही बड़ा आलू दम को खूब मिस करते हैं

जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है, तब से जिन चीजों को लोग सबसे ज्यादा मिस कर रहे हैं, उनमें स्ट्रीट फूड भी शामिल है। ऐसे ही लोगों में वो शेफ भी हैं जो खुद तो सारी दुनिया को एक से बढ़कर एक लजीज खाना पकाकर खिलाते हैं।

लेकिन जब उनके खाने की बारी आती है तो वक्त मिलते ही वे देश और दुनिया के बड़े रेस्टोरेंट में जाने के बजाय स्ट्रीट फूड खाना पसंद करते हैं। फिर चाहे दिल्ली के सरोजिनी नगर की चाट हो या मुंबई का वड़ा पाव।

देश के ऐसे कई शेफ हैं जिन्होंने सोशल मीडिया के जरिये अपने स्ट्रीट फूड के प्रति लगाव को दर्शाया है। उन्होंने ये भी बताया कि ऐसी कौन सी खाने की चीजें हैं जिन्हें लॉकडाउन के दौरान उन्होंने सबसे ज्यादा मिस किया। एक नजर टॉप 6 शेफ के स्ट्रीट फूड लव पर।

डाेमा ने याद किए प्यारे कबाब।
डाेमा ने याद किए प्यारे कबाब।

1. डोमा को याद आए प्यारे कबाब
डोमा वेंग कोलकाता में ब्लू पॉपी रेस्टोरेंट की शेफ हैं। डोमा डम्पलिंग और मोमोज बनाने के लिए जानी जाती हैं। लेकिन जब उनसे खुद उनके फेवरेट फूड के बारे में पूछा जाता है तो वे प्यारे कबाब खाना पसंद करती हैं। लॉकडाउन के बाद से अब तक वे सेंट्रल कोलकाता की गलियों में मिलने वाले प्यारे कबाब को मिस कर रही हैं।

वे कहती हैं लॉकडाउन से पहले प्यारे कबाब बनाने वाले ठेले पर लोगों की भीड़ देखते ही बनती थी। इन कबाब को हरे धनिये की चटनी के साथ खाना उन्हें बहुत पसंद है। प्यारे कबाब सीख कबाब की तरह ही होते हैं। इसे लोहे की सलाखों पर ग्रिल किया जाता है।

2. पवन बिष्ट नहीं भूल पाए हलवा पराठे का स्वाद
शेफ पवन बिष्ट कहते हैं ''लॉकडाउन से पहले मैं अपने दोस्तों के साथ रोज पुरानी दिल्ली या निजामुद्दीन जाकर हलवा पराठा खाता था। डीप फ्राई किए हुए पराठे को सूजी के हलवे के साथ खाना मुझे खूब पसंद है''।

इस पराठे को टूटी फ्रूटी से सजाकर आकर्षक बनाया जाता है। इससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है। पुरानी दिल्ली में मिलने वाले कबाब, बटर चिकन टिक्का को रूमाली रोटी, प्याज और हरी चटनी के साथ खाना उन्हें अच्छा लगता है।

पानी पूरी का नाम सुनते ही संजना के मुंह में पानी आ जाता है।
पानी पूरी का नाम सुनते ही संजना के मुंह में पानी आ जाता है।

3. संजना पटेल ने पानी पूरी को किया याद
ला फॉलिज चॉकलेट फैक्ट्री की एग्जीक्युटिव शेफ संजना पटेल फ्रेंच पेस्ट्रीज और ब्रेड बनाने के लिए जानी जाती हैं। वक्त मिलते ही उन्हें स्ट्रीट फूड पानी पूरी को एंजॉय करना अच्छा लगता है।

वे कहती हैं ''जब मैंने मुंबई के बांद्रा में अपने काम की शुरुआत की थी तो मैं हर हफ्ते एलको आर्केड में पानी पूरी खाने जाती थी। मेरी तरह मेरी दादी को भी चाट का बहुत शौक है। वे जब भी बांद्रा जाती हैं तो एलको की पानी पूरी जरूर खाती हैं''।

लॉकडाउन के दौरान भी संजना ने रगड़ा पेटिस के साथ एक्स्ट्रा मीठा और पानी पूरी को मिस किया। वे कहती है- ''शाम के वक्त रगड़ा पेटिस पर अलग से भुना हुआ जीरा डालकर खाना उन्हें पसंद है''।

हेमंत को याद आया भुर्जी पाव।
हेमंत को याद आया भुर्जी पाव।

4. हेमंत ओबेरॉय का आल टाइम फेवरेट भुर्जी पाव

तीन साल पहले हेमंत ने पहली बार ऑमलेट पाव और भुर्जी पाव को टेस्ट किया था। उन्हें बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के ऑमलेट और भुर्जी पाव का स्वाद लॉकडाउन के पिछले कुछ महीनों भी याद आया।

हेमंत कहते हैं - ''जब मैंने अपने रेस्टोरेंट की शुरुआत की थी तो मैं अपनी टीम के साथ पास ही बने स्टॉल पर ऑमलेट या भुर्जी पाव खाने जाता था। नाश्ते के लिए ये सबसे अच्छी डिश है। इसके साथ कोक बहुत अच्छा लगता है''।

हेमंत के अनुसार ''मैंने इसे घर में भी बनाया। लेकिन सबके हाथ के स्वाद में फर्क होता है। जब मैं इसे अपने घर में बनाता हूं तो इस बात का ध्यान रखता हूं कि ज्यादा तेल या मिर्च न हो जाए। लेकिन जब इसे स्टाल पर बनाया जाता है तो वे लोग सिर्फ स्वाद बढ़ाने पर ध्यान देते हैं। इसीलिए इन लोगों के बनाए भुर्जी पाव का स्वाद ज्यादा अच्छा होता है''।

कावन ने मिस किए मोमोज।
कावन ने मिस किए मोमोज।

5. शेफ कावन कटप्पा ने मोमोज को किया मिस
शेफ कहते हैं लॉकडाउन से अब तक मुझे स्ट्रीट फूड खाए लंबा समय हो गया। कोरोना का प्रभाव जब नहीं हुआ था तो वे बेंगलुरु स्थित तीन ऐसी जगह हैं जहां बार-बार मोमोज खाने जाते थे। उनमें से दो उनके रेस्टोरेंट के पास ही हैं।

इसलिए वहां जब भी समय मिले वे पहुंच जाते थे। कावन के अनुसार, मोमोज बनाने वाले हर स्टॉल की अपनी खासियत होती है। किसी के पास चटनी अच्छी होती है तो कोई मोमोज की फिलिंग अच्छी बनाता है। लेकिन मुझे बेंगलुरु की गलियों में बने गर्मागर्म मोमोज खाना पसंद है। इसका स्वाद मेरी जुबान पर हमेशा रहता है।

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