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किड्स काॅर्नर:बचपन से ही बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए उन्हें क्वालिटी टाइम दें, उसे हर परिस्थिति में सहनशील होना भी सिखाएं

सृष्टि चौबे, शिक्षाविद और काउंसिलर10 दिन पहले
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परिवार बच्चे की प्रथम पाठशाला होती है, जहां से वह जीवन का पहला सबक सीखता है। मां उसकी पहली गुरु होती है। बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने में पैरेंट्स की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। लेकिन आज के दौर में बच्चों को अच्छे संस्कार दे पाना माता-पिता के लिए मुश्किल होता जा रहा है। बच्चों कोे कितना ही समझा लें वे करते उनके मन की ही है। अगर उन्हें बचपन से ही अच्छे संस्कार दिए जाएं तो वे आगे चलकर संस्कारवान बनेंगे।

दें क्वालिटी टाइम

बच्चे का दिमाग कोरी स्लेट की तरह होता है, उस पर हम जो चाहे लिख सकते हैं। यह लिखावट उसके मन-मस्तिष्क में आजीवन रहती है। यह प्रक्रिया बच्चे की चार से छह साल तक की उम्र तक चलती रहती है। बच्चे अपने पैरेंट्स को जो करते देखते है, उससे ही सीखते हैं। जिस परिवार में माता-पिता दोनों वर्किंग हैं, वहां ज्यादा समस्या है। ऐसे में जरूरी है कि क्वालिटी टाइम देकर उन्हें सिखाएं।

उदाहरण देकर समझाएं

बच्चों से बात करके ही उनका विश्वास जीता जा सकता है। ऐसे में वाे जो महसूस करते हैं, समझते हैं, उसे वे पैरेंट्स से खुलकर बोल देते हैं। अगर उन्हें बात-बात पर डांटा-फटकारा जाए या टोका जाए तो बच्चे बातें छिपाना और बहाने बनाना सीख जाते हैं। उन्हें प्यार के साथ उदाहरण देकर सही-गलत में अंतर बताया जाए तो वे आपकी बात आसानी से समझ जाएंगे। संस्कारी बच्चे अच्छे समाज की नींव हाेते हैं। अच्छे संस्कारी समाज से ही राष्ट्र की उन्नति की दिशा तय होती है। आइए जानते हैं कि बच्चों को कौन से संस्कार देने चाहिए।

1. सत्य और ईमानदारी

बच्चे में सत्य बोलने की आदत डालनी चाहिए, लेकिन इसके लिए माता-पिता को स्वयं भी इसका पालन करना होगा। उनको यह समझाना होगा कि सत्य और ईमानदारी के रास्ते पर बाधाएं जरूर आती हैं, लेकिन जीत हमेशा सत्य और ईमानदारी की होती है। ऐसे में भविष्य में आपका बच्चा कभी पथ-भ्रष्ट नहीं होगा। इसके लिए उसे किसी कहानी के जरिए समझा सकते हैं।

2. ईश्वर में आस्था और सहयोग

बच्चे को बताएं कि ईश्वर में आस्था रखने से सही काम करने की प्रेरणा मिलती है। उसे बचपन से ही अन्य लोगों की मदद करने की भावना के प्रति प्रेरित करें। उसे यह समझाएं कि परिवार में सभी काम एक-दूसरे की मदद से ही संभव हैं। घर के सभी सदस्यों को काम बांटे, ताकि बच्चे को भी जिम्मेदारी का अहसास हो।

3. कर्तव्यनिष्ठा, प्रेम की भावना

बच्चे को बताएं कि प्रत्येक व्यक्ति का अपने परिवार, समाज, देश के प्रति प्रति अलग - अलग कर्तव्य होते हैं जिसे, उसे निभाना पड़ता है। उसे प्रेम का गुण बताएं कि आपसी सद्भाव और प्रेम-भाईचारे के साथ चलकर जीवन में आसानी से सफलता पाई जा सकती है। इसके अलावा बड़े-बुजुर्ग, बेसहारा, नि:शक्त, गरीब, बीमार आदि के प्रति मन में सहानुभूति रखना सिखाएं।

4. सहनशक्ति और चरित्रवान

आज के दौर में बच्चों के पास सहनशक्ति का अभाव है। उन्हें किसी का भी रोकना-टोकना पसंद नहीं आता है। इसलिए जरूरी है कि पैरेंट्स बच्चे को हर परिस्थिति में सहनशील होना सिखाएं। हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देेने के बजाय समझदारी और शांतिपूर्वक काम लें। इसी प्रकार उसे अच्छे चरित्र का महत्व समझाएं, क्योंकि एक बार चरित्र नष्ट होने पर वह दोबारा ठीक नहीं हो सकता।

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