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साहस को सलाम:गाजियाबाद की कामाक्षी शर्मा साइबर क्राइम को मिटाने में जी-जान से जुटी, 50,000 पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग देकर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम

3 महीने पहले
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अगर कोई अपराधी ऑनलाइन फ्रॉड या लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करता है तो वह सावधान हो जाए क्योंकि गाजियाबाद की कामाक्षी शर्मा ने ऐसे ही अपराधियों को सजा दिलाने का बीड़ा उठाया है। साइबर क्राइम की रोकथाम के प्रति लोगों को जागरूक करने और 50,000 पुलिसकर्मियों को साइबर क्राइम की ट्रेनिंग देने के चलते इस बहादुर लड़की का नाम इंडिया वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है।

कॉलेज के दिनों में मस्ती करते हुए अपने दोस्तों की आईडी हैक करने के शौक ने उन्हें साइबर क्राइम की दुनिया में शोहरत दिलाई। कामाक्षी ने बताया कि जब हैकर हैक कर धोखाधड़ी कर सकते हैं तो पुलिस उन्हें क्यों नहीं पकड़ सकती। इसी सोच के साथ मैंने पुलिस अधिकारियों के साथ काम करना शुरू किया।

अपने इस काम की शुरुआत में 2017 से वे पुलिस अधिकारियों के संपर्क में रहीं। इस बीच वे फोन ट्रेस करना और आईपी एड्रेस पता करने जैसे कामों में पुलिस की मदद करने लगीं। उनके काम को देखते हुए दो साल पहले दुनिया का पहला साइबर मिशन पूरा किया गया। इसके अंतर्गत जम्मू से लेकर कन्याकुमारी तक के पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दी गई। इस 35 दिन के मिशन में 50,000 पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग मिली।

कामाक्षी के अनुसार, महामारी के दौर में अधिकांश लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। ऐसे में साइबर बुलिंग के केस बढ़े हैं। कई लड़कियों के फोटो का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, वहीं लोखों रुपयों की धोखाधड़ी हो रही है। ऐसे में साइबर क्राइम के प्रति सजगता जरूरी है। कामाक्षी इस काम के अलावा कई इंवेस्टिगेशन एजेंसी के साथ जुड़ी हुई हैं। वे आर्मी के साथ ही फ्री लांसर के तौर पर भी काम करती हैं। कामाक्षी ने कहा कि साइबर क्राइम को खत्म करने के लिए कोई भी उनसे कभी भी संपर्क कर सकता है।