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  • Lady Teacher turned driver After Losing Her Job In Bhubaneshwar's Smritirekha Lockdown, Working Hard To Fulfill The Responsibility Of The Family

काम छूटा पर उम्मीद नहीं छोड़ी:भुवनेश्वर की स्मृतिरेखा लॉकडाउन में नौकरी छूटने पर लेडी टीचर से बनी ड्राइवर, परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए खूब कर रहीं मेहनत

25 दिन पहले
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महामारी के दौर में भुवनेश्वर की एक टीचर की जब नौकरी नहीं रही तो उसने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में ड्राइवर बनना मंजूर किया। इस महिला का नाम स्मृतिरेखा बेहरा है जो फर्स्ट लॉकडाउन से पहले शहर के चेकिसैनी क्षेत्र में प्राइमरी क्लास के बच्चों को पढ़ाती थीं। लॉकडाउन के चलते जब स्कूल बंद हो गया तो 29 वर्षीय इस महिला ने अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए ड्राइवर बनना मंजूर किया। वे नगर निगम का कचरा इकट्‌ठा करने के लिए गाड़ी से घर-घर जाती हैं। उसके पति एक प्रायवेट फर्म में काम करते हैं जिनकी सैलरी महामारी के चलते आधी हो गई। ऐसे में इस कपल के लिए घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया। पिछले साल इस कपल की परेशानी उस वक्त बढ़ी जब पिता का निधन हो गया और मां को कैंसर डाइग्नोस हुआ।

मुश्किल हालातों के बीच स्मृतिरेखा का कहना है कि भाग्य ने हमेशा उनका साथ दिया। उसने आगे कहा - ''मैं पढ़ी-लिखी थी, इसलिए आसानी से काम मिल गया क्योंकि मैं हर हाल में आग बढ़ना चाहती थी''। महर्षि कॉलेज ऑफ नैचुरल लॉ से पॉलिटिकल साइंस में पढ़ाई करने वाली बेहरा के अनुसार 2019 में द सेंटर फॉर यूथ एंड सोशल डेवलपमेंट ने हमारी झुग्गी में 15 महिलाओं के लिए ड्राइविंग ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया था। इस ट्रेनिंग के पूरा करने के बाद उन्हें ड्राइविंग की नौकरी मिली। स्मृतिरेखा का पति अपनी पत्नी की तारीफ करते नहीं थकता जिसने मुश्किल वक्त में पति का साथ देने के लिए ड्राइविंग करना भी स्वीकार कर लिया।

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