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  • Mandeep Kaur Married At 18, Divorced After Two Children, First Saleswoman Then Taxi Driver And Now Part Of New Zealand Police

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किया देश का नाम रोशन:मनदीप कौर की 18 की उम्र में शादी, दो बच्चों के बाद तलाक हुआ, सेल्स वुमन से लेकर टैक्सी ड्राइवर तक का सफर तय किया, फिर बनीं न्यूजीलैंड पुलिस का हिस्सा

2 महीने पहले
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पंजाब में मनदीप कौर का जन्म हुआ। 18 साल की उम्र में उनकी शादी हुई और 19 साल की उम्र में उन्होंने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। उस वक्त वे कॉलेज में फाइनल ईयर की स्टूडेंट भी थी। दूसरे बच्चे के जन्म के बाद मनदीप का तलाक हो गया और वे दो बच्चों के साथ अपने माता-पिता के घर चली गईं। अभी उनके पति से बच्चों की कस्टडी को लेकर जंग जारी ही थी कि वे अपने 6 और 8 साल के बच्चों को माता-पिता के पास छोड़कर ऑस्ट्रेलिया चली गईं। वे यहां एक ऐसे काम की तलाश में थी जिसे करने से वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने बच्चों की अच्छी परवरिश कर पाएं।

यहां आकर मनदीप ने सबसे पहले सेल्सवुमन की जॉब की। उसे अंग्रेजी बोलते नहीं आती थी। इसलिए वे अपनी बात कस्टमर को लिखकर बताती थीं। उससे बाद 1999 में वे न्यूजीलैंड आ गईं। यहां उन्होंने टैक्सी ड्राइविंग सीखी और इसे ही अपनी कमाई का जरिया भी बताया। यहां वे ऑकलैंड की वुमंस लॉज में रहने लगीं। इस लॉज में नाइट रिसेप्शनिस्ट का काम करने वाले एक रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर थे। उनका नाम जॉन पेलगर था। उन्हें वे अपना पिता मानती थी और प्यार से 'किवी डैड' कहती थीं।

जब मनदीप टैक्सी चलाकर घर पहुंचती तो पेगलर उनकी दिन भर की बातें सुनते। वे पुलिस प्रशासन में रहते हुए उनके द्वारा किए गए कामों के बारे में भी बताते। एक दिन मनदीप ने उनके सामने पुलिस ऑफिसर बनने की ख्वाहिश जाहिर की। पेगलर को बहुत अच्छा लगा और उन्होंने उसे पुलिस फोर्स में जाने का रास्ता भी बताया। सिर्फ पेगलर ही नहीं बल्कि मनदीप के माता-पिता और बच्चों ने भी उनका सपोर्ट किया। लेकिन वहां तक पहुंचना मनदीप के लिए आसान नहीं था।

2002 में मनदीप के बच्चे भी न्यूजीलैंड आ गए। दो साल बाद मनदीप का चयन पुलिस फोर्स में हुआ और उसने पहली बार पुलिस यूनिफॉर्म पहनी। जैसे-जैसे वक्त बीता मनदीप ने अपनी मेहनत के बल पर ऊंचाईयां हासिल की। जल्दी ही वे सीनियर कॉन्स्टेबल बन गईं। इसके बाद उन्होंने प्रमोशन के लिए अप्लाय किया। यहां हर बार उन्हें असफलता मिली लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आखिर उनका प्रमोशन हुआ और वे न्यूजीलैंड में भारतीय मूल की पहली सीनियर सर्जेंट बनीं। मनदीप कहती हैं - ''अगर आप अपने आसपास देखोगे तो हमेशा आपको ऐसे लोग दिखेंगे जो आपकी मदद कर सकते हैं। उन्हें पहचानो। खुद में बदलाव करो और उस बदलाव के जरिये दुनिया बदलो''।

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