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पुरानी बसों से बनाया महिलाओं के लिए चलता फिरता शोचालय, सभी तकनीकों के साथ बस में है फूड स्टेशन भी

3 वर्ष पहले
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  • पूणे में आज 12 पुरानी बसों को किया गया महिला शोचालय में तब्दील
  • वाई-फाई, सोलर सिस्टम और सेनेटरी नेपकिन की सुविधा भी मौजूद

लाइफस्टाइल डेस्क. अक्सर देखा गया है कि महिलाओं को साफ- सुथरे टॉयलेट की तलाश में काफी दूरी तय करनी पड़ती है। शहर में सार्वजनिक शोचालय होने के बावजूद अक्सर उनमें मौजूद गंदगी होने के कारण बीमारी का खतरा महसूस होना अब आम बात हो चुकी है। इन सब के बीच पूणे की एक महिला ने एक ऐसा हल निकाला है जिसके चलते ना केवल महिलाओं को स्वच्छ टॉयलेट बल्कि कई अन्य सुविधाएं भी मिल रही हैं। जी हां, पुणे की एंटरप्रन्योर उल्का सादरकर और उनके पति राजीव खेर ने मिलकर शहर की पुरानी बसों को सुविधाघर में बदल दिया है। इस सेवा के अंतर्गत लगभग 1.3 करोड़ रुपये का खर्च कर शहर में 13 बसें चलाई गई हैं।

बस में महिलाओं के लिए मिलेंगी ये सुविधाएं
पुणे शहर में मौजूद इन बसों को मी नाम दिया गया है। महाराष्ट्र में महिलाओं को संबोधन करने के लिए मी शब्द का प्रयोग किया जाता है। इन बसों को साधारण पब्लिक टॉयलेट से काफी अलग और बेहतर बनाया गया है। बसों के आकार के मुताबिक हर बस में 3 से चार इंडियन और वेस्टर्न टॉयलेट बने हैं। वॉशबेसिन, बच्चों के डायपर बदलने के लिए स्टैंड और बच्चों को दूध पिलाने के लिए भी स्थान बसों में मौजूद है। इन बसों में उपयोग होने वाले वाई-फाई, लाइड और बिजली से चलने वाले उपकरणों के लिए  सोलर सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे खर्च को कम किया जा सके।

अटेंडेंट के साथ बस में मिलेगा फूड स्टेशन भी
इन सुविधाघरों में सफाई, सहायता और देखरेख करने एक महिला अटेंडेंट भी हर समय मौजूद रहती है। इन बसों के बचे हुए स्थान में फूड कैफे बनाए गए हैं, जिनमें खाने-पीने के कई सारे आइटम भी मौजूद हैं। 

ऐसे हुई थी इस पहल की शुरुआत
पुणे शहर में कई इलाके ऐसे भी हैं जहां पब्लिक टॉयलेट बनाने के लिए जगह ही नहीं है। इस समस्या को हल करने के लिए पुणे के तत्कालीन महानगर पालिका आयुक्त कुणाल कुमार ने एक पहल की शुरुआत की थी। इस पहल के सहयोग के लिए उन्होंने उल्का सादरकर और राजीव खेर का सहयोग मांगा था। उल्का और राजीव पहले ही सेनेटरी उद्योग का हिस्सा हैं। दोनों ने साल 2006 में साराप्लास्ट प्राइवेट लि. की शुरुआत की थी। जब साल 2016 में महानगर पालिका आयुक्त का सहयोग मिला तो दोनों ने मिलकर पुरानी बसों को सुविधाघरो में बदलने का कार्य शुरू कर दिया। उल्का ने बताया कि उन्हें ये आइडिया सेन फ्रांसिस्को के एनजीओ से मिला था, जो पुरानी बसों को टॉयलेट में बदलते थे।

करना पड़ा कई सारी परेशानियों का सामना
जब उल्का ने पहली बार 2016 में पहली बस शुरू की थी तो कई महिलाओं का मानना था कि ये बस अंदर से काफी गंदी होगी। वहीं कुछ लोगों का ये भी मानना था कि तकनीकों से भरी होने के कारण इस बस की सुविधा के लिए ज्यादा पैसों की मांग की जाएगी, हालांकि इस बस के लिए बाकी पब्लिक टॉयलेट की ही तरह केवल पांच रुपये का भुगतान करना होगा।

कुछ जगहों पर उपलब्ध है मुफ्त सुविधाघर
पुणे के कुछ इलाकों में इन बसों को इस्तेमाल करने के लिए महिलाओं से पैसे नहीं लिए जाते हैं, वहीं जहां इन बसों का खर्च ज्यादा है ऐसी जगह में केवल पांच रुपये हर बार इस्तेमाल करने के लिए जाते हैं। ज्यादातर बसों को प्रतिदिन 200 से 300 बार इस्तेमाल किया जाता है, जिससे लगभग 45,000 रुपये मिलते हैं। इन रुपयों को बस में मौजूद अटेंडेंट्स की सैलेरी, खर्च और सफाई में इस्तेमाल किया जाता है।

जल्द देश के अन्य शहरोँ में भी शुरु होंगी बसें
फिलहाल पुणे, महाराष्ट्र में 13 बसों की शुरुआत कर दी गई है। इस साल के अंत तक मुंबई, हैदराबाद, बैंगलोर और नागपुर जैसे शहरों में सरकार की मदद से बसों को लॉन्च किया जाने वाला है। इन बसों की शुरुआत करने वाली उल्का सादरकर का सपना है कि वो पांच  सालों के अंदर ही 1000 बसों को देश के कई शहरों में ला सकें।

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