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हौसले की जीत:तिरूनवंतपुरम की प्रुथू बचपन से चल नहीं सकती, स्कूल में हर वक्त दूसरे बच्चों से अलग होने का अहसास हुआ, पर हिम्मत नहीं हारी, सीए एग्जाम पास कर बनीं आत्मनिर्भर

8 महीने पहले
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तिरूवनंतपुरम के श्री चित्र तिरुनाल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी में एक साल की प्रुथू को लेकर जब उसके माता-पिता ने डॉक्टर्स को दिखाया तो ये पता चला कि प्रुथू की हडि्डयां टूटी हुई है इसलिए वह कभी चल नहीं पाएगी। डॉक्टरों ने उसे एक दुर्लभ बीमारी बताई जिसका नाम स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी टाइप 2 था। उन्होंने ये भी कहा कि ये बीमारी उम्र बढ़ने के साथ और बढ़ेगी। उस वक्त प्रुथू के माता-पिता के दुख का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन जब यही बेटी बड़ी होने लगी तो उन्होंने हर हाल में अपनी बेटी को हिम्मत बंधाई और उसे अपने कॅरिअर को ऊंचाई पर ले जाने का सपना भी दिखाया। आज अपने हौसले के बल पर दिव्यांग होने के बावजूद प्रुथू चार्टर्ड अकाउंटेंट बनीं।

प्रुथू बिना किसी सहारे के चल भी नहीं सकती। ऐसे में उसे माता-पिता का सपोर्ट मिला और छ: साल की उम्र में प्रुथू का एडमिनशन एक प्रायवेट स्कूल में हुआ। यहां प्रुथू को पहली बार यह अहसास हुआ कि वह अन्य बच्चों से हटकर एक स्पेशल चाइल्ड है। उसकी मां हर वक्त उसके साथ रहती और उसे अन्य बच्चों की तरह आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित भी करतीं। जल्दी ही प्रुथू ने अपनी योग्यता को स्कूल में साबित कर दिखाया।

बोर्ड की एग्जाम के वक्त भी प्रुथू को निमोनिया हो गया। लेकिन उसने खुद बिना किसी की मदद के एग्जाम दिया और 88% हासिल किए। प्रुथू को बी कॉम में 90 % मार्क्स मिले। उन्हीं दिनों क्लास के अन्य स्टूडेंट ने उसे सीए करने की सलाह दी और उसने अलपुज्जा के सीए इंस्टीट्यूट में एडमिशन लिया। लेकिन यहां सेकंड फ्लोर पर क्लास लगती थी जहां तक जाना उसके लिए मुश्किल था।

तब उसने पलारीवत्तम लॉजिक इंस्टीट्यूट जॉइन किया और ग्राउंड फ्लोर पर क्लास अटैंड करने लगी। प्रुथू के ये सारे प्रयास उस वक्त सफल रहे जब सीए का रिजल्ट आया और वह पास हो गई। मुश्किल हालातों के बाद भी प्रुथू ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर सीए बनने का सपना पूरा किया और वह आत्मनिर्भर बनी।