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  • Radhamani Of Kerala Delivers Books From Door To Door For Only 5 Rupees A Month, She Wants Women To Read And Move Forward

वॉकिंग लाइब्रेरियन कहते हैं लोग:केरल की राधामनी महज 5 रुपए महीने के शुल्क पर घर-घर पहुंचाती हैं किताबें, वे चाहती हैं महिलाएं पढ़ें और आगे बढ़ें

5 महीने पहले
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घर-घर जाकर किताबें मुहैया करने वाली 64 साल की केपी राधामनी को वायनाड और आसपास के लोग ‘वॉकिंग लाइब्रेरियन’ यानी घूमती-फिरती लाइब्रेरियन के नाम से जानते हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी राधामनी की ऊर्जा में कोई कमी नहीं है। वे रोजाना इलाके में महिलाओं और बुजुर्गों को किताबें उपलब्ध कराती हैं, वो भी महज 5 रुपए महीने के शुल्क पर। ऐसा इसलिए ताकि घर की जिम्मेदारियों में उलझी महिलाएं भी पढ़ें और आगे बढ़ें। हालांकि महामारी के चलते इस वक्त उनका घरों में जाना कम है, लेकिन फिर भी नियमित है।

राधामनी 2012 से रोजाना एक बैग में किताबें रखकर इस काम में लगी हैं।राधामनी ने यह जिम्मेदारी केरल राज्य के शिक्षा काउंसिल द्वारा शुरू किए गए ‘वनिता वयना पड्‌डती’ अभियान के तहत उठाई है, जिसका उद्देश्य महिलाओं में पढ़ने की आदत विकसित करना है। मूल रूप से कोट्‌टयम की रहने वाली राधामनी 1979 में वायनाड आ गई थीं। राधामनी बताती हैं ‘मैं रोजाना 20-25 मलयालम किताबें बैग में लेकर निकलती हूं। इसमें ज्यादातर नॉवेल, प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें और कुछ बच्चों के लिए किताबें होती हैं। मुझे ये किताबें नजदीकी लाइब्रेरी से मिल जाती हैं, जिन्हें मैं महिलाओं तक पहुंचाती हूं। हालांकि 25 रुपए सालाना या 5 रुपए महीना देकर कोई भी लाइब्रेरी का सदस्य बन सकता है लेकिन जो लाइब्रेरी नहीं जा सकता, उन्हें मैं घर पर किताबें मुहैया कराती हूं।’

राधा खुद दसवीं तक पढ़ी हैं। लेकिन किताबें पढ़ने का शौक उन्हें भी है। लाइब्रेरियन की भूमिका के अलावा वे प्लास्टिक रिसाइकिलिंग प्रोजेक्ट की भी सक्रिय कार्यकर्ता हैं। उनके पति पद्मनाभन नाम्बियान किराने की छोटी-सी दुकान चलाते हैं जबकि उनका बेटा ऑटो चलाता है। राधा कहती हैं, ‘अगर महिलाओं को घर बैठे किताबें मिल जाएं, तो वे भी पढ़कर आगे बढ़ सकती हैं। मुझे खुशी है कि मेरा रोज घर-घर जाकर किताबें पहुंचाने का असर अब दिखने लगा है। महिलाएं प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें ज्यादा पढ़ रही हैं। कई बच्चियां तो सफल भी हुई हैं। यही मेरा पारिश्रमिक है।’

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