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लाइफस्टाइल डेस्क. ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा में लाने के पीछे एक किरदार 75 वर्षीय भाजपा नेत्ता शुभांगिनी राजे गायकवाड़ को भी माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक शुभांगिनी ही सिंधिया को प्रधानमंत्री मोदी के करीब लाईं। हालांकि शुभांगिनी ने आधिकारिक तौर पर इस तरह की किसी भी भूमिका से इंकार कर दिया है।
शाही परिवार से है ताल्लुक
बड़ौदा शाही परिवार में राजमाता का दर्जा हासिल शुभांगिनी का भी संबंध ग्वालियर से है। वह ग्वालियर के शाही जाधव परिवार से हैं। शुभांगिनी राजे बड़ौदा के खेड़ा संसदीय क्षेत्र से दो बार लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। 1996 में निर्दलीय और 2004 में भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुनाव लड़ा। हालांकि दोनों ही बार वे चुनाव हार गईं। 2014 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने बड़ौदा से भी अपना नामांकन भरा था। शुभांगिनी राजे उस वक्त उनके साथ थीं। वे मोदी की प्रस्तावक थीं। शुभांगिनी के पति रणजीत सिंह गायकवाड़ कांग्रेस नेता रहे। वह 1980 से 89 तक बड़ोदा से कांग्रेस सांसद रहे। शुभांगिनी राजे अब स्वास्थ्य कारणों से लाइमलाइट से दूर रहती हैं। उनका अधिकांश समय अब बड़ौदा में अपने निवास लक्ष्मी विलास पैलेस में ही गुजरता है। वे 2015 से बड़ौदा की द महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी की चांसलर हैं।
सिंधिया कनेक्शन
ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे बड़ौदा राजघराने से हैं। बड़ौदा की राजमाता शुभांगिनी राजे प्रियदर्शिनी की बड़ी मां हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गायकवाड़ परिवार के पास 20 हजार करोड़ की कुल संपत्ति है। अकेला लक्ष्मी विलास पैलेस ही 600 एकड़ में फैला हुआ है। लक्ष्मी विलास पैलेस देश के सबसे बड़े निजी निवास में शामिल है। 600 एकड़ में बना यह महल ब्रिटेन के शाही निवास बर्किंघम पैलेस से चार गुना बड़ा है। गायकवाड़ परिवार में पैतृक संपत्ति को लेकर आपसी विवाद भी चल रहा है।
चर्चाओं के पीछे: भाजपा नेता, बड़ौदा की शुभांगिनी राजे और जफर इस्लाम हैं। क्योंकि माना जा रहा है कि यही वो दो चेहरे हैं, जिन्होंने ज्योतिरादित्य की भाजपा में आने की राह बनाई।
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